Monday, 29 May 2017

ओ कागजी शेरों अब ये जंग जुबानी बंद करो

ओ कागजी शेरों  अब ये  जंग जुबानी बंद करो
हाथ खोलो असली शेरो का अब सीधे जंग करो

मुगालता है दुश्मन को ये देश महज गरियाता है
मुंह खोल तोपों का बता दो हमें लडना आता है

आपके निंदा की पुरा मुल्क कड़ी निंदा करता है
ये मुंह बयानी हमारे हौसले को शर्मिंदा करता है

अंधी लंगड़ी गुंगी बहरी सी दिखती ये सरकार है
कहने लगे हैं अब तो सब ये रंगा हुआ सियार है

अपनी न सही देश की ही लाज बचालो मोदीजी
राष्ट्रधर्म जो सीखा संघ से उसे निभालो मोदी जी

मेंहदी  वाले  हाथों ने  जब  मंगलसूत्र  उतारा है
छप्पन इंची छाती लेकर भी बाप बेचारा हारा है

इस त्योहार जो बेटा मां की साड़ी लाने वाला था
वो वीर सिपाही देश के तिरंगे मे लिपटा आया है

कबतक इन शहीदों का अपमान करोगे मोदीजी
दुश्मन की गीदड़भभकी कितना सकोगे मोदीजी

एक बार ऐलान तो कर दो  होश  बिगाड़ रख देंगे
हमने जो  हाथ खोले तो  पडोस  बिगाड़ रख देंगे

इतिहास तो हमारा ही है भूगोल भी बदल जायेगा
अबके युद्ध से घाटी का माहौल भी बदल जायेगा

देश में आक्रोश बहुत है कुछ तो करो ऐ मोदी जी
उबल रहा है सारा मुल्क यूँ चुप न रहो ऐ मोदी जी