अहमियत नही रह गई उल्फ़त की जमाने मे
दिल्लगी करते है अब तो लोग दिल लगाने मे
दुसरे के दर्द की अब परवाह नही करता कोई
चुकते नही है लेकिन अपने जख्म दिखाने मे
आते है यार मिलने तो रखते है साथ ही खंजर
उनका कोई सानी नही मुँह पर यारी निभाने मे
दीवाना सर फोड ले या कपडे फाड कर फिरे
मजा आता है हसीनो को दीवानो को सताने मे
हमारी कोशिश होती है उनको कोई गम न मिले
वो नही रखते है कसर कोई बाकी हमे रूलाने मे
बरबादी मेरे दिल की कहो इससे और क्या होगी
मजा आता है उनको महफिल मे दास्तां सुनाने मे