Monday, 9 April 2018

अहमियत नहीं रह गई उल्फत की जमाने में

अहमियत नही रह गई उल्फ़त की जमाने मे
दिल्लगी करते है अब तो लोग दिल लगाने मे

दुसरे के दर्द की अब परवाह नही करता कोई
चुकते नही है लेकिन अपने जख्म दिखाने मे

आते है यार मिलने तो रखते है साथ ही खंजर
उनका कोई सानी नही मुँह पर यारी निभाने मे

दीवाना सर फोड ले या कपडे फाड कर फिरे
मजा आता है हसीनो को दीवानो को सताने मे

हमारी कोशिश होती है उनको कोई गम न मिले
वो नही रखते है कसर कोई बाकी हमे रूलाने मे

बरबादी मेरे दिल की कहो इससे और क्या होगी
मजा आता है उनको महफिल मे दास्तां सुनाने मे

हमे दिल लगाने की इजाजत नहीं है

हमे दिल लगाने की इजाजत नही है
   हमारी खातिर जहां मे मोहब्बत नही है

निगाहे तो कितनी इधर फिरती है लेकिन
किसी दिल मे रहे हम ऐसी किस्मत नही है

वफाई के बदले वफा ही मिला करे
  ऐसी आज दुनिया मे शराफत नही है

ठहरा हुआ सैलाब अनायास बह चला
वरना हमारी रोने की आदत नही है

खुशी जितनी छिन सको जिंदगी से छिन लो
वक्त के पास कोई मुरव्वत नही है

हमने तो देख ली जी भर के दुनिया
अब और कुछ देखने की चाहत नही है

नजदीकियों हालात का पता चलता है

नजदीकियों  हालात का पता चलता है
मुश्किलों में  औकात का पता चलता है

इक उम्र गुजर जाये तब कहीं जाकर ही
गुजरे हुए  लमहात  का  पता  चलता है

नीयत  चेहरों  से   बयां   कहां  होती हैं
मुंह  खुले  तो  जात का  पता चलता है

कब उजालों ने  जाना हाल  अंधेरों का
रातों  को  ही  रात  का  पता  चलता है

दीवारें  जो  घर  की   दरकने  लगती है
रिश्तों  की  सौगात  का  पता  चलता है

भर आती है  बैठे कभी  यूँ ही  आंखे ये
फुर्सत में ही जज्बात का पता चलता है

साहिल  बैठे  लोग   गहराई  क्या  जाने
मंझधार में  आफात का  पता चलता है