Wednesday, 12 May 2021

इस जहां में मुहब्बत बची है कहाँ

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इस  जहाँ  में     मुहब्बत     बची  है  कहाँ
कौन  करता  है   मतलब  बिना  कुछ यहाँ 
किसको कहते हैं इक चलती फिरती अजाँ... 
कोई   पूछे  तो   बस   याद  आती  है  माँ... 

एक   अहसास  है          एक   विश्वास है
दूर  है      पास  है      वो  मगर   खास है
जिसके  कदमों  तले   है    जमीं  आसमाँ...
कोई  पूछे  तो    बस    याद   आती है माँ... 

मर्म को  जिसने  सिखलाया  है मर्म  क्या
पूछे  ईश्वर   जिसे  आ  के    है  धर्म क्या
जिसने दुनिया को सिखलाई पहली जबाँ...
कोई  पूछे  तो  बस    याद  आती  है  माँ... 

नेमतें    फूल    बरसाती    पथ  पर   मेरे 
हौसले       मुस्कुराते   हैं     अक्सर  मेरे 
देखकर   मुश्किलों   की    ये  मजबूरियाँ...
कोई  पूछे  तो    बस    याद  आती है माँ... 

झूठ  भी  जिसके  पहलू  में  सच्चा हुआ
हर  बुरा  जिसको  छू करके अच्छा हुआ
जिसकी   गोदी  में   खेले  है दोनो  जहाँ ...
कोई  पूछे  तो   बस   याद    आती है माँ...

बांध   सकता   भला   कौन  है  शब्द  में 
उसके  उपकार  से   सब   ही  हैं कर्ज़ में 
उसके  जैसा   कहाँ    कौन  है   मेहरबाँ...
कोई  पूछे  तो   बस   याद   आती है माँ...

सारे   रिश्ते      सजे   थे      सभागार में
पर थे  हल्के  बहुत  सब ही  व्यवहार में
सब  पे  भारी  पड़ी  माँ  की ही  लोरियाँ... 
कोई  पूछे  तो   बस   याद  आती  है माँ...

वक़्त बे वक़्त यूँ ही प्यार जता जाती है

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वक़्त  बे  वक़्त   यूँ  ही  प्यार  जता जाती है 
चूम  कर    माथा  मेरा   लाड़ लड़ा  जाती है/1/

जाग   जाती  है  अचानक  जो कभी रातों में
सर   मेरा   धीरे  से  सहला के सुला जाती है /2/

माँ ने  रिश्तो को  अकेला कभी  होने न दिया
ख्वाब में   आ  के  भी  वो  नेह लुटा जाती है/3/

क्यूँ करूँ  सजदे  इबादत  क्यूँ जियारत करूँ
गर्दिशे  वक़्त     मेरे  साथ    दुआ   जाती है/4/

माँ किसी एक दिवस की नही मोहताज कोई
माँ ही जीने का सबक पहला सिखा जाती है/5/

माँ ने  रिश्तों को  निभाया है  बड़ी  शिद्दत से
सारे   तकरार   सरलता  से   भुला   जाती है/6/

माँ को  बाहर  न  कभी जाते हुए देखा मगर 
दुनिया दारी  की   सभी  बातें  बता  जाती है/7/

माँ के हाथों का वो जादू कहीं मिलता ही नही
बासी  रोटी  जो  चुपड़  सुब्ह खिला जाती है /8/

डांट  गलती  पे  लगा  जाती है  गुस्सा होकर
तो  कभी  प्रेम  से   लोरी  भी  सुना  जाती है /9/

खींच कर पांच लकीरें गढ़ा इक लफ्ज़ है माँ
उसके  कदमों  तले  जन्नत की सदा जाती है /10/

तश्तरी में परोसी न मिलती सनम

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तश्तरी  में   परोसी    न   मिलती  सनम
कद्र  कर  लो   जरा  जिंदगी  की सनम/1/

काम  ऐसा  करो   हो  किसी  का  भला
उम्र   गुजरे     मलंगों    सरीखी   सनम/2/

तू  न   उतरा   खरा   आजमाया   बहुत
अब  करें  क्या  भला  आस कोई सनम/3/

कैद   अपने  दियों  में   मिले  सब यहाँ
चाह  सूरज  नही  है   किसी  की सनम/4/

गम  के  बादल  छटे  ना  छटे जीस्त से
फिर  भी   नाराजगी   तो   रहेगी सनम/5/

चार कांधे भी मुश्किल से मिलते हैं अब
क्या  सुनाए  व्यथा  बेहिसी  की  सनम/6/

कागजों   पर   दिखी   हैं   बड़ी  राहतें
पर हकीकत  नही ठीक कुछ भी सनम/7/

कायदे     में   रहें     फायदे     में   रहे
है  न  अच्छी   सदा   होशियारी  सनम/8/

साथ   देना   तेरा   इक  बड़ी  भूल थी
हो  न  तुझसे   सकी  पासबानी  सनम/9/

चांद  तारों   की  बातें   हुई   खत्म  तो
अब निभा लो जरा  दुनिया दारी सनम/10/

रात  ही है  भरम दिन का पालो न तुम
रंग  बदला  है  बाकी  है  वो  ही सनम/11/

लोग  मरने  की  ही करते बस हैं दुआ
हाल  में   जैसे    हमने  गुजारी  सनम/12/

कौन  मर्जी  से  अपनी  फिरे  है  यहाँ 
करती  हैं  दर ब दर  जिम्मेदारी सनम/13/

एसी कमरों से संचालित क्रांतिकारियों की यलगार

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ए सी  कमरों से  संचालित, क्रांतिकारियों की  यलगार, 
सुविधाओं  से उपजा  नारा, कैसे  करे दुश्मन  पर वार, /1/

कुंद पड़ चुकी आंदोलन की, आदत सत्ता रस कर पान, 
पीर  परायी  भूल  गए  तुम, भोग  विलासों  में   संग्राम,/2/

नंगा  नाच  रहे  हैं  लंपट,  चोर  उचक्के  और  बदमाश, 
जीत  का  जश्न  मना लाशों पर, छाया है  हर्षो उल्लास,/3/

मुर्दों  की  बस्ती  का  हाकिम,  है  वो  मुर्दों  का  सरदार, 
अंधा  भी है  बहरा  भी है,  सुनता न  कोई  चीख पुकार,/4/

लोकतंत्र की  परिभाषा ही, बदल  गयी है आज के दौर, 
जिसकी लाठी भैंस उसी की,चल है पड़ा अब ये ही तौर,/5/

तेरे  कल के  कारण  तुझको, ताज  मिला है  ले तू जान, 
रूप दिखा तू कल जैसा ही, रख सबके विश्वास का मान,/6/

निर्मम   हत्याओं पर   मौन,  प्रदर्शन   इक  कमजोरी है,
ये    नेतृत्व    नपुंसकता  है,     आडंबर    पुरजोरी    है,/7/

फर्क़  पड़ा  क्या  सांकेतिक, धरना प्रदर्शन करके बोल, 
कितने  घाव  लगाया  मरहम, कितने दर्द मिटाया तोल,/8/

मौन  रहे तो  दम  घुटता है, मुँह  खोले तो  जाती  जान, 
सच   लिखने से   यारी  टूटे,  चाटूकारी  से   जाए  मान,/9/

मौन है कंगूरे चुप मीनार है

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मौन  है   कंगूरे          चुप   मीनार है
खौफ़  अज़ानो     घंटियों  में   यार है/1/

है  बड़ी   दहशत  में  ही    आबोहवा
इक  वबा  ने    कर  दिया  लाचार है/2/

मर  चुके  हैं  लोग     जिंदा जिस्म है
शहर  ये   मुर्दों  का   इक   बाजार है/3/

छ्प  रही  बस  रेप  हत्या  की खबर
खून  से  लथपथ   मिले  अखबार हैं/4/

अब  कतारें   लग  रही    श्मशान में
क्या  वहांँ  पर  भी   कोई  बाजार है/5/

लग  रही      चारागरों   में  बोलियाँ 
क्या  यही   हाकिम   तेरा व्यापार है/6/

बारूदों  के  ढेर  में      हैं  हम  खड़े
जो  सुलगने    हर  समय    तैयार है/7/

हो चुकी  खामोश  कब  की जिंदगी
आदतन  पर  दिल धड़कता  यार है/8/

भूलने  का   प्रश्न  ही    उठता   नही
मेरे  जीने   का   तू    ही   आधार है/9/

जिक्र  खुद से  कर दिया  हमने तेरा
क्या कहें उस दिन से दिल बीमार है/10/

दूरियाँ       मजबूरियाँ      तन्हाईयाँ
इश्क  के   बस  तीन  ही हथियार है/11/

ताक  पर  है  हर  तमन्ना  आजकल
जिंदगी   से      जिंदगी     बेज़ार है/12/

आइये सब मिलके कुछ अच्छा करे
सहमा सहमा    खौफ़ तर  संसार है/13/

दायरों में घिरी रोशनी की तरह

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दायरों   में    घिरी    रोशनी    की   तरह
हर कदम पर  मिली  अजनबी  की तरह/1/

हम  समंदर  में   रह  के  भी  प्यासे  रहे
जिंदगी   ना  मिली   जिंदगी   की  तरह/2/

मुश्किलें     तो   रही     यूँ    सराबोर ही
खुदकुशी  पर  लगी  बुजदिली की तरह/3/

लग  गयी   बातें   इतनी   बुरी क्यूँ उन्हें 
कह गये हम जो कुछ दिल्लगी की तरह/4/

वो  तो   हालात  में   खो   गयीं   रौनकें
वर्ना  गुजरी  है  कल मसखरी की तरह/5/

एक   लम्हा   गुजरता   नही   बिन  तेरे
रह  गयी  बन  के तू इक कमी की तरह/6/

खामुशी  की   हमारी  थी  आदत  जरा 
पर  लगी   ये  उन्हें   बेरूखी  की  तरह/7/

तू  न  कर   फिक्र   चाहे  मेरी  जिन्दगी 
है   सहेजा   तुझे    दिलबरी  की  तरह/8/

मत किया कर यकीं  मेरी सब बात पर
होती  है   झूठ  भी   शायरी  की  तरह/9/

समय के मुताबिक जो चलता नही है

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समय  के  मुताबिक  जो चलता नही है
कभी  वो   पटल  पर   उभरता  नही है/1/

है   बदलाव   स्वीकार   पाने  अ सक्षम 
जो  रहते  समय  तक  संभलता नही है/2/

वहां  कुछ  उजाला   नजर  आ  रहा है
पर  इस  वक़्त  सूरज निकलता नही है/3/

अंधेरा   है  कायम   अभी   चांद   पीछे
वहां   रोशनी    कोई    करता    नही है/4/

अगर   ठोकरों  से   संभलता  नही जो
कभी  फिर  वो  आदम सुधरता नही है/5/

बहुत   थक  गए     ढोते  ढोते   अंधेरा
अंधेरों  में   जीवन    गुजरता    नही है/6/

उड़ाए  बहुत   बुलबुले  अब तलक तो
दिल अब बुलबुलों पर मचलता नही है/7/

भरोसा   जिसे   हौसलों  पर  है  अपने
समय   के   थपेड़ों   से  डरता  नही है/8/

विपत्ति  से  विपदा  से  डरता नही जो 
अतातायियों  से      सिहरता    नही है/9/

बने   राष्ट्र निर्माण  में  जो  भी   बाधक
उसे   देश    स्वीकार    करता   नही है/10/

कहां  तक   संभाले संभलता नही अब
बहानों  से  दिल  अब  बहलता नही है/11/

उड़ाए  बहुत   बुलबुले  अब तलक तो
दिल अब बुलबुलों पर मचलता नही है/12/

जिंदगी हर बार हमको यूँ ही छल जाती है क्यूँ

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जिंदगी  हर बार  हमको  यूँ ही  छल जाती है क्यूँ
आने से पहले ही खुशियाँ  जाने टल जाती है क्यूँ /1/

जी  टका  सा  देखता  रह  जाता  है  यूँ  ही  सदा
साजिशें फिर बदनसीबी की ही चल जाती है क्यूँ/2/

सोचने   बैठो  तो   इक  लम्हा   गुजरता   ही नही
देखते  ही  देखते   सदियाँ  निकल  जाती  है क्यूँ/3/

जानवर   की  कोख  से   जनते   न देखा आदमी
आदमी  की  नस्ल  फिर  ऐसे  बदल जाती है क्यूँ/4/

डर को भी  लगने लगा डर  देख कर हालात अब
गिद्ध सी मौका  परस्ती  फिर  मचल जाती है क्यूँ/5/

करलो कुछ कंट्रोल अपनी जहर उगलती ये जबाँ
देख  दौरे हाल  भी  कमबख्त  चल  जाती है क्यूँ/6/

जिंदगी है  लाक,     डाउन   जिंदगानी   हो  गयी
साजिशें  तकदीर  की  ऐसे भी  चल जाती है क्यूँ/7/

कुछ  समझने  सोचने  का  भी कोई अवसर नही
एक  पल में   देह   मिट्टी  में  बदल  जाती है क्यूँ/8/

किसी के काम आ जाए कहीं कुर्बान हो जाए

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किसी  के   काम  आ  जाए  कहीं  कुर्बान  हो  जाए
बने  हिन्दू     बने  मुस्लिम     मगर   इंसान  हो जाए/1/

मिली है  आदमी  की  जिंदगी तो कर गुजर कुछ वो
करे   कल याद   दुनिया   फक्र  से  सम्मान हो जाए/2/

न  बैठो  हाथ पर  धर  हाथ अपना हार कर हिम्मत 
करो  कुछ  तो  जतन  ऐसा  कि सब हैरान हो जाए/3/

चखा हो  स्वाद  जिसने भूख का क्या जायका जाने
उसे  मिल जाए  रूखी सूखी  बस अहसान हो जाए/4/

बढ़ाओ  हाथ  तो  इमदाद  को  मौका  दिया  रब ने
मुकम्मल   इस  बहाने  ही   तेरा   ईमान   हो  जाए/5/

बचा लो  आज  अपने आप को इतना बहुत है बस
जरा सी   गलतियों से  ना  बड़ा  नुकसान  हो जाए/6/

कभी तो मैं से बाहर भी निकल कर देख लो भइया
खबर क्या खुद से ही अपनी कहीं पहचान हो जाए/7/

बड़े   गंभीर  हैं   हालात    विपदा   ये   भयावह है
गुजारो   सावधानी  से   जरा    आसान   हो  जाए/8/

उदासियाँ हर तरफ दिखी है

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उदासियाँ    हर  तरफ  दिखी है
हर एक   चेहरे   पे   ही  गमी है/1/

है   खौफ़  बरपा  हुआ दिलों में
तसल्लियाँ   जो  है   कागजी है/2

जिधर  भी  देखो  है बस अंधेरा 
हवा  अजब सी  ही चल पड़ी है/3/

पड़ा  है  बीमार   सारा  सिस्टम
सिसकती   राहों  पे   जिंदगी है/4/

पड़ी  जरूरत  जो  यार  की तो
कहीं  किसी  का   पता  नही है/5/

बदल  गया  वक़्त  जो जरा सा
नियत  सभी  की  बदल गयी है/6/

हसीन  सपने  दिखा दिखा कर
छिपाई  हाकिम  ने  हर कमी है/7/

बुझे    हजारों   घरों के दीपक 
वो   दे  रहा    मुफ्त  रोशनी है/8/

न हारना खुद से बस कभी तुम
कोई    समस्या   बड़ी   नही है/9/

छटेंगे  बादल   दिखेगा   सूरज
अभी  निगाहों  में  कुछ नमी है/10/

सवेरे   का   इंतजार   कर बस
न  उम्र   ज्यादा  ये  रात की है/11/

बस अब  तुम्ही हो  मेरा सहारा 
किसी से  उम्मीद  कुछ नही है /12/

प्रभू जी   संजीवनी  ले  आओ
कि अब तो सांसे उखड़ रही है/13/

सब्र कर रात के उस पार सहर का घर है

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सब्र  कर  रात  के  उस  पार  सहर  का  घर है
भोर  के   गर्भ  में    सूरज  है   उजाला  भर है/1/

इक  दिया  आस  का हमने भी जला रक्खा है 
रात  लम्बी  है  जरा  तेल  भी  कुछ  कमतर है/2/

इक  खबर  से  न  जियादा  है कोई हस्ती तेरी
ऐ  बशर  बस  तू  सियासत  के  लिए  नंबर है/3/

था  जिन्हें  हिन्द  पे कल नाज कहाँ हैं वो अब
आज  तस्वीर  नजर  आयी  कितनी बदतर है/4/

कत्ल  कर दो मुझे  गर  मसअला हल होता है
पर  सवालो  को   न  मारो  यूँ  ही  ये  बेघर है/5/

वक़्त बतलाता है अब आदमी की असलियत
पैरहन   ने  तो  कहा   झूठ   यहाँ   अक्सर है/6/

कर  दो   मंदिरों  को   मस्जिदों  को  चारागर
पारसाई  न  हो  किस  काम  के  ये खंडर है/7/

अब  कहाँ  जाए  भला चोट लिये हम अपनी
पासबाँ   भी  तो  है  नासाज़  पड़ा  बिस्तर है/8/

खून  तो  सबका  है शामिल यहाँ नाकामी में
दोष  इक जैसा ही सबके  ही यहाँ सर पर है/9/

 सहर - सुबह/बशर - आदमी /पैरहन - लिबास /
/पारसाई - धर्मात्मा /पासबाँ - रक्षक /नासाज़ - बीमार/

क्या गिला तुझसे करें जिंदगी तू पत्थर है

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क्या  गिला  तुझसे  करें   जिंदगी  तू पत्थर है
तू  है  गुस्ताख   बहुत   दूर  से    ही   सुंदर है/1/

भाग्य  जब  साथ न दे  तो ये समझ लेना तुम
कर्म  ही   पार    लगाएगा    ये  भव सागर है/2/

क्या  बुरा   इससे  जियादा  भी  कोई  देखेगा
हमने देखा है कि हम खुद से ही खुद बाहर है/3/

रंजो गम   रोज   सुनाने  को   चली  आती है
जिंदगी  ख्वाब  में  भी  अब  तू मिले दूभर है/4/

अश्क  सुखने  भी न  पाते हैं अभी आंखों से
फिर   चले  आते    नये   सोग  भरे  मंजर है/5/

रात के  जुगनू  बचा कर के जरा रख लो तुम
वक़्त के  पास   अंधेरों  का   बड़ा  लश्कर है/6/

यूँ  न मजबूर करो हँसने को हर पल मुझको
मैं  हूँ  जिंदा  यही  बस  बात बहुत बेहतर है/7/

इतना  पानी  तो बचा कर ही रखो आंखों में
रोज  अखबार  में  आती है  खबर महशर है/8/

अब  तो  गंगा  ने भी   इंकार  किया धोने से
हर  ही  इंसान  के  सर   पाप  भरा  गट्ठर है/9/

इक खबर से न जियादा  है कोई हस्ती तेरी
ऐ बशर  बस  तू  सियासत के लिए नंबर है/10/

दस्तूर पासबानी निभाने का शुक्रिया

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दस्तूर    पासबानी    निभाने   का     शुक्रिया
किस्तों में  रोज  मरना   सिखाने का  शुक्रिया/1/

सिस्टम  की लाश  कांधो पे  ढोता  है आदमी
हालत   जटिल   इतने    बनाने  का  शुक्रिया/2/

मरने  की   आरजू में    जीये   जा रहे हैं  सब
जद्दोजहद    के   दौर     बढ़ाने  का  शुक्रिया/3/

कुछ  दायरों में ही  ये  सिमट कर के रह गयी
खुशियों को  इस मकाम पे  लाने का शुक्रिया/4/

महफ़िल  जमें  हुए  भी   जमाना  गुजर गया
मशरूफियत  को   यार   बनाने  का शुक्रिया/5/

चेहरे  के   सारे  दाग    दिखाया   वो  आईना
भीतर की असलियत को छिपाने का शुक्रिया/6/

अब तक  सहा  है  और  भी  सह लेंगे  हादसे
मजबूत   इतना   हमको  बनाने  का  शुक्रिया/7/

गैरों  ने  खूब   साथ  दिया   खोल कर  जिगर
अपनो  के  हर  कदम  पे  बहाने  का शुक्रिया/8/

पासबानी _ध्यान रखना

हर दिन के हादसों ने संभलने नही दिया

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हर दिन  के  हादसों  ने  संभलने    नही दिया
मुश्किल  ने   दौरे हाल    बदलने   नही दिया/1/

अच्छा लगा ये सुन के कि  कुछ दाम बढ़ गये
रिश्तों को  खोटे  सिक्को ने  चलने नही दिया/2/

उत्सव  कहा  गया  है  ये  मातम के  दौर को
कुछ  इस तरह  भी  दर्द  मचलने  नही दिया/3/

कीमत  यहाँ  पे  आजकल बस पैरहन की है
किरदार   खुश्बू दार   निकलने    नही  दिया/4/

कतरा तलक  निचोड़  तो  डाला है जिस्म से
बस  आखिरी में  जान   निकलने  नही दिया/5/

हाकिम तो कह रहा था कि सब ठीक है मगर
सच्चाइयों  ने   झूठ   को   चलने  नही  दिया/6/

हैरान  हूँ  मैं   वक़्त  की    मुस्तैदी   देख कर 
लम्हों ने   कोई   दर्द    फिसलने   नही  दिया/7/

कितनी  हो  रात  स्याह  गुजर जाएगी जरूर
हमने  कभी   यकीन  को   ढलने  नही दिया/8/

उखड़ती सांसे मलाल दे ना

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उखड़ती   सांसे   मलाल  दे ना
कि  जिस्म से जाँ निकाल दे ना/1/

मेरी    ये    सांसे   उधार  ले ले 
बदी  ये  रब  पर  तू टाल दे ना/2/

हर  एक  मंजर हृदय विदारक
दे बख्श और अब बवाल दे ना/3/

प्रभू   ये  हालात   अब सुधारो
नया  कोई  अब  सवाल दे ना/4/

लगे   डराने      है  अब अंधेरे
तू  रोशनी  दे     उजाल दे ना/5/

बुझा  न  बेबस घरों के दीपक
उदासियों  को   जमाल  दे ना/6/

हताश  करने  लगी  हैं  खबरें
बुरे  यूँ  मन  में  खयाल दे ना/7/

भूख ये कब तक पाला जाए

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भूख ये  कब तक  पाला  जाए
पेट  में  कुछ  तो   डाला  जाए/1/

अतड़ी  अकड़  रही  हैं  भीतर
रोटी   नही   तो    हाला  जाए/2/

सिस्टम      वेंटिलेटर     पर है
खुद को खुद ही संभाला जाए/3/

कागज  पर  है  सारी  तरक्की
चल  के   वहीं   खंगाला जाए/4/

हास्पिटल       बीमार   पड़े हैं
अखबारों   को   मशाला जाए/5/

श्मशानों   में   भीड़    बहुत है
ऊंचे     रूतबे     वाला  जाए/6/

सांसो  के     बाजार    सजे है
कब तक मौत को टाला जाए/7/

मुर्दा  जमीर  हुए  जो उन पर
श्रद्धा  पुष्प     उछाला   जाए/8/

कर लो शोकसभा आयोजित
सूरज  कर  मुँह  काला  जाए/9/

दिल वही माहौल मंजर भी पुराना ढूंढता है

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दिल  वही  माहौल  मंजर  भी  पुराना ढूंढता है
वो  पुराने  यार  गलियाँ   वो  ठिकाना ढूंढता है/1/

वक़्त कुछ जल्दी में है तेजी से भागा जा रहा है
दिल  नही पर मानता   गुजरा जमाना ढूंढता है/2/

हर  कोई  आया  नजर  हैराँ  परेशाँ ही यहाँ पर
आस  उम्मीदों का बस वो टिमटिमाना ढूंढता है/3/

बंदिशें  चारो  तरफ है  खौफ़ का बरपा कहर है
ऐसे  में  पागल  हुआ  मन  मुस्कुराना  ढूंढता है/4/

वेंटिलेटर पर है सिस्टम सांसें उखड़ी जा रही हैं
जिंदा  रहने  को  बशर नकली बहाना ढूंढता है/5/

क्या हुआ  है बंद  मंदिर मस्जिदें या पाठशाला 
पीने वाला  तो यहाँ  बस   दारूखाना ढूंढता है/6/

बढ़ रहे  इमदाद  के खातिर  हजारों हाथ भी है
मुँह चलाने वाला तो बस  कुछ बहाना ढूंढता है/7/

आपदा  को  भी  बदलते  अवसरों में  यहाँ पर
त्रासदी  के  दौर में  भी  वो  खजाना  ढूंढता है/8/

ठंडे  पड़ने  लग गये  चूल्हे यहाँ कितने घरों के
ताक पर  रखकर अना वो आबोदाना ढूंढता है/9/

कागजी  झूठी  तरक्की में ही खोया हुक्मराँ है
आंकड़ों में  वो  गरीबी  का  ठिकाना  ढूंढता है/10/

छोड़ो भी संसार की बातें

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छोड़ो   भी     संसार    की बातें
कुछ  कर  लो व्यवहार की बातें/1/

वेंटिलेटर      पर       सिस्टम है
झूठी   हैं    सरकार    की  बातें /2/

उखड़ी   जाती    सांसे पल पल 
मत    करिए    बेकार  की बातें/3/

कांधे  पर     ढोया    जो   लाशें
वो  ही   जाने    हार   की  बातें/4/

वक़्त   बड़ा   गंभीर   है  आया
छोड़ दें  अब  तकरार  की बातें/5/

मुश्किल वक़्त जो काम आए हैं
भूल   अलमबरदार   की   बातें/6/

अखबारों  में     कब    आते हैं
ऐसे  कुछ   किरदार   की  बातें/7/

दस  की  चीज   बिकी सौ में है
क्या  कहिए   बाजार  की बातें/8/

छोड़   न   पाए   लोभ   प्रवृत्ति
भूल  गए    उपकार   की  बातें/9/

लिख सकता हूँ मैं भी चांदऔर
खुशबू  या    श्रृंगार   की   बातें/10/

चारो  तरफ    अफरा-तफरी है
कैसे  लिखूं  मैं   प्यार  की बातें/11/

बिगड़ते को बनाना जानता है

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बिगड़ते   को      बनाना  जानता है
बहुत  है   वो    सयाना    जानता है/1/
 
शरारत   करता है  साजिश नही पर
वो    रूठे  को     मनाना जानता है/2/

गिले शिकवे किसी से क्या करे अब
समझता है      निभाना   जानता है/3/

मुहब्बत  का   नही  करता  दिखावा
वो  दिल से  दिल लगाना जानता है/4/

है   मिलता   गर्मजोशी  से   सभी से
रवायत   सब    निभाना   जानता है/5/

दिखाकर  ख्वाब  बहला  देता है वो
वो   रो कर  भी   हँसाना  जानता है/6/

समझता है  सही क्या है गलत क्या
वो  हर  रिश्ता   निभाना  जानता है/7/

वो बस चुपचाप करता काम अपना
नही    हल्ला     मचाना   जानता है/8/

दवा काम आयी ना कोई दुआ जब
वो  फर्ज अपना निभाना जानता है/9/

बड़ा  शातिर है  वो माहिर खिलाड़ी
तरीके       शातिराना     जानता है/10/

उसे  सब  तौर   मालूम  खेल  के है
वो  चौसर  भी  बिछाना  जानता है/11/

छिपाकर रंजो गम रखता है दिल में
हमेशा        मुस्कुराना     जानता है /12/

इतना सहमा डरा जिगर क्यूँ है

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इतना   सहमा   डरा  जिगर क्यूँ है
खौफ़ में    बस्तियाँ   डगर   क्यूँ है/1/

क्यूँ है  उतरा  हर एक  चेहरा यहाँ
फासला आज   इस  कदर  क्यूँ है/2/

जुर्म    संगीन   ही   हुआ  है कुछ
वरना  आंखे  यूँ  तर ब तर क्यूँ है/3/

खूब   की  आपने   तरक्की फिर
सांस  लेना भी  अब  दुभर क्यूँ है /4/

काट  डाला था  कल दरख़्तों को
आज   लाचार   हर बशर  क्यूँ है/5/

कहकशां तक पहुंच थी कल तेरी
आज मुश्किल जरा सफर क्यूँ है/6/

कुछ दुआ या दवा न काम आयी
जिंदगी   इतनी  मुख्तसर  क्यूँ है/7/

घुप्प अंधेरा  है  हर तरफ या रब
रोशनी   कर  दे  बे खबर  क्यूँ है/8/

कह रहा है  निजाम ठीक है सब
त्राहि-त्राहि फिर इस कदर क्यूँ है/9/

चाक चौबंद   अगर  व्यवस्था है
भीगी भीगी  सी हर नजर क्यूँ है/10/

वेंटिलेटर   पे   सारा  सिस्टम है
हुक्मराँ  इतना   बेखबर  क्यूँ है/11/

वो  रहा  है     मेरी   दुआओं में
उसके दिल में भरा जहर क्यूँ है/12/

ये वक़्त जिससे दगा करेगा

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ये   वक़्त    जिससे  दगा करेगा
वो  क्या   किसी  का बुरा करेगा/1/

है  सब मुकद्दर का खेल कहकर
बस अपने   रस्ते    चला  करेगा/2/

अंधेरा  है   बस   ये मुट्ठी भर ही
बुरा   उजालों  का   क्या करेगा/3/

जरा सी  किरणें ही देखकर शब
समेट   खुद   को    चला करेगा/4/

उम्मीद  कायम अभी है दिल में
जो  कुछ   करेगा  भला  करेगा/5/

बंधी है  सबकी  ही आस उसमें
कि  सबका अच्छा खुदा करेगा/6/

मिटाए   हैं   जो   दरख्त लाखों
कहो  तो   कैसे   फला   करेगा/7/

तरस  रहे  आज  सांस  खातिर
न  सोचा  कुदरत  गिला करेगा/8/

इन हुक्मरानों  ने  कब  सुनी है
यतीम  लाचार   सिसकियों की/9/

कराहता   मन    किसे   पुकारे
जी किससे अब आसरा करेगा/10/

दर्द सहकर हँसा करे कोई

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दर्द   सह कर     हँसा    करे    कोई
और  कितना     वफा     करे   कोई/1/

है   बहुत  ही   खराब    शय   प्यारे
इश्क  का    मत    नशा    करे कोई/2/

जाने  कब  आएंगे   ये  अच्छे  दिन
कब  तलक  यूँ      मरा  करे   कोई/3/

कल भी उम्मीद सबकी थी कल से
आज  से   आस   क्या   करे  कोई/4/

कौन  सीखता  है    सिर्फ  बातों से
वक़्त   अब     हादसा   करे   कोई/5/

सब हैं  अपनी ही  मस्तियोँ में यहाँ
बेसबब   क्यूँ     दुआ    करे  कोई/6/

खुदखुशी   पे   बहुत है   हो हल्ला
मौन  पर   क्या  गिला    करे कोई/7/

कौन   अच्छा  है    इस  जमाने में 
क्यूँ  किसी  का   भला   करे कोई /8/

खेल   सब  है    नसीब  का  प्यारे
खामखाँ     बद्दुआ     करे    कोई/9/

छेद  हजारों   हैं  जिंदगी  में  मेरी
अब  कहाँ तक  सिला  करे  कोई/10/

तल्ख़ लहज़ा जरा नही अच्छा

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तल्ख़   लहज़ा    जरा   नही  अच्छा 
कोई   शिकवा  गिला   नही   अच्छा /1/

दिल  ये   सहमा  डरा  सा   रहता है 
रंजो  गम     फासला    नही  अच्छा /2/

दर्द    देकर     जो    हाल    पूछे  हैं 
ऐसा   भी     बावफा   नही   अच्छा/3/

बात  बिन  बात      कैसी    नाराजी 
बेवजह     अनमना    नही    अच्छा/4/

कहकहों   में  ही   दब  गई  सिसकी 
मन  ये  भारी      भरा    नही अच्छा/5/

बतकही    से    है   खामोशी बेहतर
बेसबब      बोलना     नही   अच्छा/6/

दिल से दिल तक हो राब्ता हो अगर 
बेरूखा पन     जरा    नही   अच्छा/7/

वक़्त   के  साथ   जो   बदल  जाए
है   बशर    वो   बुरा    नही  अच्छा/8/

देखो दूर दूर हबीब है डरे सहमे सारे तबीब हैं

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देखो   दूर दूर   हबीब  है       डरे   सहमे       सारे    तबीब हैं 
लगे  सामने   खड़ी  मौत  है   दौरे  हाल  क्या  हीय अजीब है/1/

कहो  कैसा  आया  अजाब  है     हुई   जिंदगी  ही   खराब है
है  मुहाल  सांस  भी  लेना  अब   ये  हवाएँ   इतनी  मुहीब है/2/

हुए   बंद   सारे  ही   काम  हैं    बढ़ी   मुश्किलें  भी  तमाम हैं
लगा   अब  सताने   शिकम  बहुत   हुआ  फिक्रमंद  गरीब है/3/

वो जो रहता सबके जिगर में था वो नजर से सबकी उतर गया
वो दिखाया ख्वाब था खुल्द का  आज सबके सर पे सलीब है/4/

तू  खयाल में    मेरे  ख्वाब में    है  महक  तेरी   मेरी  सांस में
तू  समाया है   मेरी   धड़कनों  में भी   तू  ही  मेरा   नसीब है/5/

लिखा जो भी  दिल से लिखा है बस बना बेबसी की जुबान है 
मेरा शौक  बस  है  सुखनवरी   मुझे  कहते  सब  यूँ अदीब है/6/

हबीब - दोस्त
तबीब - चिकित्सक
अजाब - कष्ट
मुहीब - भयानक
शिकम - पेट
खुल्द - स्वर्ग
सलीब - सूली

हादसों ने गुले गुलजार नही होने दिया

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हादसो  ने   गुले  गुलजार   नही   होने  दिया
मन मुटावों  ने  भी   गुफ्तार  नही  होने दिया/1/

दरमियाँ  आ  गयी  हर बार  कहाँ से  ये अना
जिसने मिल कर कोई त्योहार नही होने दिया/2/

लाश  के   ढेर   सियासत  ने   लगा  रक्खे हैं
लोभ  ने  पारसा   किरदार   नही  होने  दिया/3/

फिर पलायन का लगा दिखने भयावह मंजर
त्रासदी  ने   हमे  खुशकार   नही  होने  दिया/4/

कैद  खुद को  भी किया रब ने हमारे खातिर
पर  हमें   खौफ़  ने   बेदार   नही  होने दिया/5/

ये  जो  हालात है  कुछ  दिन में सुधर जाएंगे
पर  जरूरत  ने  समझदार  नही  होने  दिया/6/

कशमकश  जद्दोजहद  ने  है  सताया  इतना
कल  के  जैसा  कभी इतवार नही होने दिया/7/

ख्वाहिशें  लेने  न  देती  कभी  फुर्सत हमको
ख्वाब  हालात  ने   साकार  नही  होने  दिया/8/

जाने  क्या सोच के ठहरा रहा गुजरा ही नही
एक  लम्हा   हमे  दो चार   नही   होने  दिया/9/

जो जरूरत के समय  साथ खड़ा तो दिखता
बेहिसी  ने यूँ  भी  गमख्वार  नही  होने दिया/10/

फिर  मेरे  हिस्से  ही  आए  हैं  कई  समझौते
अपनी फितरत ने ही हुशियार नही होने दिया/11/

उम्र भर मुझको जरूरत ने सताया है बहुत

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उम्र भर  मुझको   जरूरत  ने   सताया है  बहुत
बस   जरा  और   जरा  कह के छकाया है बहुत/1/

शौक  सब   भूल  गये   छोड़  दिये  ख्वाब सभी 
हसरतों  ख्वाहिशों ने  दिल को रूलाया है बहुत/2/

कोई  उम्मीद  नही    फिर  भी    तेरी    राहों में
रात भर  हमने   चरागों  को   जलाया है  बहुत/3/

रात भर   नींद  से     बस   जद्दोजहद  होती है
खुद को भरमाने को बस करवटें खाया है बहुत/4/

दिन  गुजर  जाएंगे  दहशत  भरे रख सब्र जरा 
इस तरह दिल को तसल्ली भी बंधाया है बहुत/5/

रोज  ही  चेहरे  बदल   जिंदगी  मिलती हमसे
हमने  उम्मीद  का  नुक़्ता भी लगाया है बहुत/6/

उड़  गये    पंख   निकलते   ही    परिंदे   सारे
बागबाँ   नीड़  में  फिर  आँसू  बहाया है बहुत/7/

पन्ना पन्ना है  मेरी  जिन्दगी का  इसका गवाह
वक़्त ने  मुझको   पढ़ा  और  पढ़ाया है बहुत/8/

देख   हालात   लगे   ख्वाहिशें   ढंकने  बच्चे
वक़्त  से  पहले  बड़ा  वक़्त  बनाया है बहुत/9/

तंग गलियों से  गुजर जाती है खामोश हयात
पर किताबों में तो  कुछ और  पढ़ाया है बहुत/10/

रवायत बस निभाया जा रहा है

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रवायत   बस  निभाया   जा  रहा है
ज़बर   ही    मुस्कुराया   जा  रहा है/1/

परिंदे      आसमाँ    मंडरा     रहे हैं
दरख़्तों  को    हटाया    जा  रहा है/2/

महज  दो  चार  दिन  की जिंदगी है
शिकन  माथे  पे  लाया  जा  रहा है/3/

खबर पल की नही कोई भी लेकिन 
जहन  में  ख्वाब  लाया  जा रहा है /4/

अजब   दस्तूर है   दुनिया का देखो
जतन   कल का  बनाया जा रहा है/5/

जुबां पर रख जहर की  पोटली को
हमी  पे    आजमाया     जा रहा है/6/

गुजरता जा रहा  मुझमें मुसलसल
मुझे  मुझसे   भुलाया    जा रहा है/7/

बिखरने  मैं  लगा  भीतर ही भीतर
मुझे   कुछ   यूँ  मिटाया जा रहा है/8/

तनाबें   बांध   ली   है  जिंदगी की
समापन   ओर   जाया  जा रहा है/9/

सवालों को छिपाया जा रहा है

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सवालों    को    छिपाया   जा रहा है
बवालों   को    दबाया     जा  रहा है/1/

असल  मुद्दों से  भटका कर  तमाशा
नया  हर दिन   दिखाया   जा रहा है/2/

हमीं  से     लूट कर    गाढ़ी  कमाई
मजा  जम कर  उड़ाया  जा  रहा है/3/

बुझी  आंखों  में  झूठे  ख्वाब देकर
हमे   बस    बरगलाया   जा  रहा है/4/

सियासत  पर  लगे  सब  दाग धब्बे
दिलासों   से    धुलाया   जा  रहा है/5/

बता जमहूरियत का हमको मालिक
हुकूम  हम पर  चलाया  जा  रहा है/6/

थमाकर  झुनझुना  आश्वासनों  का
हमें    पागल    बनाया   जा रहा है/7/

कोई  अधिकार हक  हमको नही है
हमे    उल्लू    बनाया   जा   रहा है/8/

करा  इक बार बस   मतदान हमसे
हमें   सपना   दिखाया   जा रहा है/9/

हमारे   फर्ज   बतला कर   बखूबी
अमल  हमसे   कराया   जा रहा है/10/

चला हम पर ही लाठी कायदों की
हमें  जीना   सिखाया  जा  रहा है/11/

लगा हर बार मिलकर जिंदगी से

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लगा   हर बार  मिल कर   जिंदगी से
मिले  जैसे  किसी  फिर  अजनबी से/1/

वही    जद्दोजहद  है    कशमकश है
मिले  अरसा  हुआ  हमको  खुशी से/2/

बचा  ले  रब  यकीं  उनका तू है गर
जिन्हें  उम्मीद  है  तो  बस  तुझी से/3/

तमन्नाएँ  मचल  कर  रह  गयी  बस
उबर  पाएं  न  हम  अपनी  कमी से/4/

मिले  हैं  पीठ  पर  खंजर  ही इतने
कि  डर   लगने  लगा  है  दोस्ती से/5/

जरूरी  है  निवाला   जीने  खातिर
न  भरता  पेट  तमगो  की  तही से/6/

बदलता   रहता  है   किरदार  मेरा
अदाकारी     मिली  है    शायरी से/7/

मिलो जिंदा दिली से सबसे हँसकर 
न कुछ उम्मीद पर रक्खो किसी से/8/

मुहब्बत से रहो आपस में मिलकर 
हुआ हासिल भला क्या दुश्मनी से/9/

रात दी है तो कभी कोई सहर भी देना

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रात  दी  है  तो   कभी   कोई   सहर  भी देना
हौसला  कम  न  हो  बाजू  में  असर भी देना /1/

काफिया  साथ  रदीफ़  और  बहर  भी  देना
दर्द  को  दर्द  हो  वो लफ्ज़ ए असर भी देना/2/

कुछ  बुझी  आंख  की  उम्मीद सहारा मै बनूं
रब  मेरे  मुझको  चमकने  का  हुनर भी देना/3/

कुछ  रूहानी से  खयालात  जहन  में  उतरे
इक  ग़ज़ल   ऐसी  कहें इतना हुनर भी देना/4/

मेरे  लफ्जों  में  जरा  वज्न  भी देना या रब
छू  अगर  पाऊँ  दिलों को तो खबर भी देना/5/

मैं के फेरे में ही दुनिया तो है उलझी उलझी 
मुझको  अहसास  जरा  मैं के इतर भी देना /6/

आदमी यूँ तो नही दुनिया में तेरी कुछ कम
दरमियाँ  भीड़ के  तू  पाक  जिगर भी देना/7/

खयालों का जखीरा हूँ मगर जोकर नही हूँ मैं

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खयालो  का  जखीरा   हूँ   मगर  जोकर  नही  हूँ मैं
मै  रखता  ताप  हूँ  लेकिन  कोई  अख्तर  नही हूँ मैं/1/

कलम  के  जोर  पर  दुनिया  जगाने  वास्ते निकला
बड़ा   ही   चोट  करता  हूँ  यूँ  तो  पत्थर  नही हूँ मैं/2/

समेटे  हूँ  मैं   भीतर  खुद के   तूफानी  बवंडर  इक 
समंदर  हूँ  मैं  गहरा    आब   चुल्लू भर   नही  हूँ मैं/3/

बदलना  चाहता  हूँ  मैं  जमाने  को  कलम  के  दम
खटकता  हूँ   मैं  लोगों  को  भले  खंजर  नही हूँ मैं/4/

बड़ा  लड़का  हूँ  मैं  घर का  बड़ी  उम्मीद है मुझसे
अभी  भी   आस  हूँ  मैं   खंडहर  जर्जर  नही हूँ मैं/5/

मिले  जब  ओहदों  पर  शोहदे  अपमान है पद का
गलत  कहता  गलत  को  मौन  रहता पर नही हूँ मैं/6/

लिखुँ अब और क्या कुछ भी समझ आता नही मेरे 
बड़ी    जद्दोजहद  है   चैन से   पल भर   नही हूँ मैं/7/

जिंदगी कुछ शादमानी दे मुझे

2122 2122 212
जिंदगी   कुछ    शादमानी   दे मुझे
भुली  बिसरी  कुछ  कहानी दे मुझे/1/

सांस   लेना   ही   नही   हैं जिंदगी
जीने   खातिर    बदगुमानी दे मुझे/2/

बढ़ गया कद हसरतों का अब बहुत
मुख्तसर  सी    जिंदगानी   दे  मुझे/3/

अब तलक गुजरी है रस्मन तौर पर 
दर्द  की   अब    मेजबानी  दे  मुझे/4/

हर कदम  पर  मुंतजिर है मुश्किलें
जिंदगी   आंखों  में   पानी  दे मुझे/5/

अख्तियारी दे कुछ अपने आप पर
इतनी  तो  अब  मेहरबानी  दे मुझे /6/

मेरी  बस्ती  हिंदू-मुस्लिम  है बहुत
दिल   खुदा   हिंदुस्तानी   दे  मुझे/7/