Wednesday, 12 May 2021

दस्तूर पासबानी निभाने का शुक्रिया

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दस्तूर    पासबानी    निभाने   का     शुक्रिया
किस्तों में  रोज  मरना   सिखाने का  शुक्रिया/1/

सिस्टम  की लाश  कांधो पे  ढोता  है आदमी
हालत   जटिल   इतने    बनाने  का  शुक्रिया/2/

मरने  की   आरजू में    जीये   जा रहे हैं  सब
जद्दोजहद    के   दौर     बढ़ाने  का  शुक्रिया/3/

कुछ  दायरों में ही  ये  सिमट कर के रह गयी
खुशियों को  इस मकाम पे  लाने का शुक्रिया/4/

महफ़िल  जमें  हुए  भी   जमाना  गुजर गया
मशरूफियत  को   यार   बनाने  का शुक्रिया/5/

चेहरे  के   सारे  दाग    दिखाया   वो  आईना
भीतर की असलियत को छिपाने का शुक्रिया/6/

अब तक  सहा  है  और  भी  सह लेंगे  हादसे
मजबूत   इतना   हमको  बनाने  का  शुक्रिया/7/

गैरों  ने  खूब   साथ  दिया   खोल कर  जिगर
अपनो  के  हर  कदम  पे  बहाने  का शुक्रिया/8/

पासबानी _ध्यान रखना

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