Sunday, 19 February 2017

कहानी खत्म होने पर भी किस्सा बाकी रहे

कहानी खत्म होने  पर भी  किस्सा बाकी रहे
हर शख्सियत के भीतर एक बच्चा बाकी रहे

कमी  कोई तो  रह  गई है  मौला  तेरे देने में
ऐसा क्या की जिन्दगी में बस धुंआ बाकी रहे

नही देता है  बिखरने  सिमटे हुए  जज़्बो को
जब तलक उम्मीदों का  एक लम्हा बाकी रहे

जिंदा रहने के लिए चंद सिक्के भी जरूरी है
यूँ न हो परदा गिरे तो बस तालियां बाकी रहे

हंसाया खूब किरदार ने खेल जारी रहने तक
तमाशे खत्म फिर काहे सिसकियाँ बाकी रहे

आंसूओ के हिसाब कौन रखता है

आंसूओ के हिसाब कौन रखता है
हाथ  सुखे "गुलाब" कौन रखता हैं

होंगी  कुछ  तो  जरूर  मजबूरियां
वरना सर पे अजाब कौन रखता है

नहीं  फबती  है  हरदम  उदासियां
यूँ ही  चेहरे  नकाब कौन रखता है

ढुंढ लेती है  खुद  मुश्किले  हमको
चाह  करके  जनाब कौन रखता है

अपनी ख्वाहिश है धूप मुट्ठी भर ही
अपने घर आफताब कौन रखता है

बरसी है  बेहिसाब  ही  तसल्लियां
इतने  झुठे  हुबाब  कौन  रखता है

आरज़ू  शिकवे  उम्मीद  बेचैनियां
साथ इतने अहबाब कौन रखता है

मुस्कुराहट  तबस्सुम  ये  कहकशें
गम के है असबाब कौन रखता है