दर्द को हौसले मिल गए
दरमियां फासले मिल गए
जब दरकने लगे भीत ही
दीमकों को भी घर मिल गए
ढुंढता फिर रहा था हमे
दर्द को हम यहीं मिल गए
सब्र मुझको नही थी मगर
दर्द को भी दहर मिल गए
सब तरफ हो रहा है धुंआ
सांस में है जहर मिल गए
होश ही फिर न हमको रहा
सामने वो हमें मिल गए
ख्वाहिशों को पकड़ न सके
जब जरुरत से हम हिल गए
यक ब यक उनसे हम मिल गए
फूल से फिर चमन खिल गए
कैसे जलवा करुं मै तेरा
महफिलों में आ जाहिल गए
वो परिंदा न आया इधर
कल शहर से जो बिस्मिल गए
चांद तड़पा किए रात भर
दीद तेरे हो मुश्किल गए
जिंदगी सांस लेने लगी
आशना जो तेरे मिल गए
मुश्किलें क्यूँ खड़ी हो गई
हौसले जो गले मिल गए
जब जरुरत से हम हिल गए
हादसों को भी दम मिल गए
याद तेरी सताती हमें
पहले ही कहकहे मिल गए
मुड़ के देखा जो पीछे जरा
बिछड़े लम्हें वहीं मिल गए
जागती रात भर रात भी
रात हम रात से मिल गए
आह दिल से निकलती रही
आशना जो तेरे मिल गए
खुशनुमा फिर सुबह हो गई
रात वो ख्वाब में मिल गए
चांद तड़पा किए रात भर
दीद तेरे हो मुश्किल गए
अब मैं सजदा करुंगा तेरा
मस्जिदों से है जाहिल गए
साजिशें फिर चल ही गई
मसअले दैर से मिल गए
खूब ढूंढा किए हैं तुझे
चांद के सामने मिल गए