Saturday, 15 September 2018

करो चरागां शहर को वो आ रहे होंगे

करो चरागां  शहर को वो आ रहे होंगे
रवायतें  वो  जरा सी  निभा  रहे होंगे

मेरी बस्ती से अंधेरा कभी नहीं मिटता
वो  जूगनू  मेरे  खातिर   ला  रहे होंगे

कभी देखो तो उतर कर गरीब बस्ती में
बेचारगी  में भी  वो   मुस्कुरा  रहे होंगे

कभी ठहर के  नही मोड़ पे देखा उसने
दुआएं   राह में  जादू   बिछा  रहे होंगे

मुझे न फुरसत मजहब तलाश करने की
शह्र ए आली  मेरा फतवा  ला रहे होंगे

तमाम  उम्र  गुजरती  रही  सवालों  में
तमाम  उम्र   हमें   आजमा  रहे  होंगे

हमारे  साथ  निभाना  नही  उन्हें आया
चलो  किसी से  सही वो निभा रहे होंगे

ये पोशिदा सी कहानी से जिंदगी गुम है
खुशी  जरा सी  ढेरों गम  बुला रहे होंगे

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