Wednesday, 12 September 2018

जिंदगी ये अजनबी सी हो गई

जिंदगी ये अजनबी सी हो गई
हर खुशी ही खुदखुशी सी हो गई

हसरतें औ ख्वाहिशें सब उड़ गए
रोशनी भी तिरगी सी हो गई

चांद तारों का सफर भुला ये दिल
सिसकियाँ सुन के लोरी सो गई

अतड़ियां जब ऐठी है भुख से
जंग उसूलों से हमारी हो गई

मुश्किलों से सामना ऐसा हुआ
चैन अपना नींद अपनी खो गई

साजिशें ही साजिशें है सब तरफ
नेमतें जो उनपे भारी हो गई

मसखरे से हो गये हैं हम यहां
जिंदगी भी मसखरी सी हो गई

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