Monday, 6 September 2021

सोचने भर से तो चिट्ठी नही आया करती

सोचने  भर  से  तो  चिट्ठी  नही  आया करती
याद  आती  है   तसल्ली  नही  आया  करती/1/

सिलसिला जब भी खयालों का शुरू होता है
फिर किसी तर्ह भी झपकी नही आया करती/2/

हम  कई बार  टहल  आए हैं  उन गलियों से
उस  तरफ  कोई  दुपहरी  नही आया करती/3/

शाम  ठहरी  है  थकी  आस  लिए चौखट पे
कोई  खुश्बू  कोई  तितली नही आया करती/4/

पेट  भरने  के लिए  फिर से दिलासे ही मिले
भूख के  हिस्से  में  रोटी  नही  आया  करती/5/

जिम्मेदारी  का  धरा  बोझ  हो  जिनके कांधे
उनके  हक में  कोई मस्ती नही आया करती/6/

कैसे मुमकिन है बिछड़ तुझसे रहें हम जिंदा
इन  खयालों पे  हँसी भी  नही  आया करती/7/

इन परिंदों ने  किसी का  भी  बिगाड़ा क्या है
डर से छत पर  कोई टोली नही आया करती/8/

दूर से  ही  भली  लगती  है  ये आतिशबाजी
घर  जलाकर ही  दिवाली  नही आया करती/9/

जिंदगी   बात   बिना   बात   खफ़ा   होती है
पर  सभी को  ये अदा  भी नही आया करती/10/

खुद में भी मिल नही रहा खुद को

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खुद में  भी  मिल नही रहा खुद को 
रख  न  जाने  कहाँ   दिया खुद को/1/

आंख   भर   कर के    मुस्कुराएँ  हैं
यूँ  भी  दी   हमने है  सजा खुद को/2/

दी  गई   दिल  को  यूँ  तसल्ली भी
फिर   बताया  गया   बुरा  ख़ुद को/3/

कुछ   अंधेरा    बता    रहे  हैं  उसे
जो  उजाले  किया  जला खुद को /4/

आएंगे  अच्छे  दिन कभी न कभी
दे  रहे   सब  यहाँ   दगा  खुद को/5/

दरमियाँ    भीड़   के    रहे   तन्हा
हिज्र  में  ऐसे  दी  सजा  खुद को/6/

आजमाती है  हर  कदम पर हमें 
जिंदगी है समझती क्या खुद को/7/

शेर  सुनता  यहाँ  है  कौन भला
हर  कोई  है  तलाशता  खुद को/8/

हर दिन के हादसों से हैरान जिंदगी है

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हर  दिन  के   हादसों  से    हैरान   जिंदगी है
नफरत   मिटा   दिलों  से   ईमान   जिंदगी है/1/

खुशियाँ लुटा सभी में  दिल को खुशी मिलेगी
दो चार  दिन  यहाँ  पर   मेहमान   जिंदगी है/2/

हसरत औ जिम्मेदारी और कोई भी जरूरत
ये  तीन  गर  न  हो  तो   आसान  जिंदगी है/3/

अब  आंख  बंद  करते लगने लगा है डर सा
सिरहाने   ख्वाब    बैठे   परेशान  जिंदगी है/4/

लम्बे  सफर  के  खातिर अच्छा न साथ मेरा
दो  चार   पल  कहो  तो   कुर्बान  जिंदगी है /5/

रोटी  मिले  मुझे  बस   चाहत  मेरी  यही थी
अब ख्वाब में उलझ कर हलकान जिंदगी है/6/

कल रात खूब बातें  खुद से किया है जी भर
तुझको   भुलाने  का  ही   ऐलान  जिंदगी है/7/

पड़ता है फेंकना हर दिन ही  कबाड़ में कुछ
इस  हद   भरे  हुए  हैं    अरमान  जिंदगी है/8/

अब भूल मैं चुका हूँ  तुमको है याद मुझको
रहता  ये  याद  हर  पल  बे जान जिंदगी है/9/

महफ़िल सजी है सांवरे की हर कदम पे आईये

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महफ़िल  सजी है  सांवरे , की हर कदम पे आईये
छप्पन  लगे  हैं भोग भी ,जी भर के लुत्फ़ उठाईये/1/

पूजन के भोग के यहाँ , है दाम  सब अलग अलग
कीमत चुकाते जाईये , नेकी     कमाते      जाईये/2/

कीमत  बगैर  आजकल , संभव   न  पूजा  बंदगी
बाजार  सज रखे हैं बस , कीमत   सही   लगाईये/3/

बिकने लगी  दुआएँ भी ,  औकात  के  हिसाब से
गर  जेब  गर्म  है  नही , तब  आस  मत  सजाईये/4/

दर दर   नुमाईशें  लगीं ,   सामान   बन  गये  प्रभू 
जज्बात  बिक रहे हैं बस, सेवा को  मत  लजाईये/5/

स्वीकार  कीजिए  प्रभू , निर्धन  की  याचना कभी
चाहत न राज पाठ की बस दिल से दिल मिलाईये/6/

कुछ भी न पास है मेरे , अर्पित करूँ  बता मैं क्या
बस  भाव  पुष्प  कर रहा , अर्पित मैं  मान जाईये/7/

🙏🌹।।जय श्री श्याम ।।🌹🙏

मुश्किल जरा सी देखकर कमजोर दिल दहल गया

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मुश्किल  जरा  सी  देख कर  कमजोर दिल दहल गया
जिसने   लिया  है   हौसले  से  काम   वो  सँभल  गया/1/

जद्दोजहद   का   नाम   ही   तो   जिंदगी  है   साथियों 
हिम्मत  किया  जो  बढ़ चला उसका समय बदल गया/2/

मजबूरियाँ       जरूरतें       महरूमियाँ       उदासियाँ
इनसे  निजात  पा  लिया  समझो कि  वो  निकल गया/3/

कोई  यकीं  नही   किसी   का  कब  बदल  वो जाएगा
बेहद  अजीज   खास  भी   मौका  लगा तो  छल गया/4/

मन के  ही   हारे   हार  है  मन के  ही   जीते   जीत है
मन पर  जो   पार  पा  लिया  वो  आसमाँ उछल गया/5/

है  धूप छांव   की   तरह    इस  जिंदगी  के   खेल भी
इक पल में चढ़ गया शिखर इक पल में देख ढल गया/6/

मन  पर    रहे    लगाम   गर     आराम  है    सुकून है
बर्बाद   जिंदगी   समझ   मन  गर   मचल मचल गया /7/

दुर्भावना   न   पालिए       मन  में   किसी  के  वास्ते
संगत  बुरी  हुई  अगर  समझो  कि  पुण्य  फल  गया /8/

कहीं बे हताशा बरसना खुशी का

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कहीं   बे हताशा    बरसना    खुशी  का
कहीं  हर  घड़ी  बस  है  रोना  कमी का/1/

कही   अर्श  पर  है  कही   फर्श   पर है
न  आया  समझ  फलसफा जिंदगी का/2/

तमन्ना     तसल्ली    दिलासा    भरोसा
हर इक  रोज  है  बस  तमाशा इसी का/3/

बड़ी   सेल  अरमानों  की  चल  रही है
सजा    खूब    बाजार   है   बेबसी का/4/

तरीके  बहुत   गम   छिपाने  के  है पर
है  मुश्किल  बहुत  मुस्कुराना नमी का/5/

गिले  शिकवे   तन्हाई   आंसू   उदासी
मजा  हमने  पाया है  ये  आशिकी का/6/

बदलने  का   तेरे   कोई   गम  नही है
हमें तो है अफसोस दिल की लगी का/7/

लहू  पीने  की  एक  लत है  जरा बस
भला  चाहती  यूँ  सियासत  सभी का/8/

खड़ी दर पे  उम्मीद के खत लिए धूप
खुले  जाने  दर  कब मेरी बेहतरी का/9/

नजर  का  नही  दोष  है जाविए का 
रहा है  नजरिया  जुदा हर किसी का/10/

चाहिये ख्वाहिशें कुछ खुशी के लिए

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चाहिये  ख्वाहिशें  कुछ  खुशी  के  लिए
है    तमन्ना   जरूरी     सभी    के  लिए/1/

मन  के  बहलाव  खातिर  मिले तो सही
कुछ  तसल्ली   भले  दो  घड़ी  के लिए/2/

मन  ये  बेचैन  है  आजकल  कुछ जरा
छटपटाने    लगा  है   किसी   के  लिए/3/

खा  गया  हर  कदम  पर  भरोसा मुझे
अब बचा खुद  न  मैं अपने ही के लिए /4/

प्यास  सदियों  की  जैसे  कोई तीव्र हो
यूँ   तरसते   हैं   हम   रोशनी  के लिए/5/

जिंदगी   से     नदारद   रही    जिंदगी
हम    भटकते  रहे     जिंदगी  के लिए/6/

दरमियाँ    हादसों  के    हुआ   हादसा
थम  गई  जिंदगी   अपने  जी के लिए/7/

खूब  रोया  है  परदे  में  मुँह को छिपा
जो  कि  मशहूर  है   मसखरी के लिए/8/

दर्द   कितने   समेटे  है   सीने   में   वो
ढो   रहा     लानतें   रहबरी   के  लिए/9/

कुछ न मतलब है अखबार को झूठ से
सुर्खियाँ   चाहिए   सनसनी   के  लिए/10/

बात  कहिये  उन्हे  जो  सुने बात कुछ
जो  न  सुनते  कहो क्या हँसी के लिए/11/

अब तलक जो  कहा या सुना ही गया
था नजरिया किसी का किसी के लिए/12/

छू कर मुझे करीब से सहसा गुजर गया

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छू कर  मुझे    करीब से    सहसा   गुजर गया 
खुशियों का काफिला अभी  आया गुजर गया/1/

त्योहार  के  बहाने  भी   कुछ  काम  आये ना 
रिश्तों से अब तो बिछड़े भी अरसा गुजर गया/2/

रहता जो हर समय ही था अपनो की भीड़ में 
करवट  यूँ  वक़्त  ने  लिया  तन्हा  गुजर गया/3/

कम्बख्त   दिल   बना  रहा   ता उम्र  मुंतजिर 
राहों  को    ताकते   हुए   लम्हा   गुजर  गया/4/

रिश्ते   सहेजते   रहे    मोती   की   जैसे  हम
इसमें  ही  वक़्त   राएगाँ  कितना  गुजर गया /5/

नादानियों   के    नाम   रही    सारी   जिंदगी 
बर्बाद  खुद  को  कर  लिए मौका गुजर गया/6/

दैरो  हरम   में  ढूंढ  लिया   पर   मिला  नही
कैसे   कहाँ   न  जाने   फरिश्ता   गुजर गया/7/

बेसुध  सा  हो के  गिर पड़ा चौराहे जब कोई 
बंदा  कोई  मदद  को  न  ठहरा  गुजर  गया/8/

दौर है त्रासदी का सोग तर ही मंजर है

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दौर  है  त्रासदी  का   सोग तर   ही  मंजर है
सारे  चेहरे  ही   दिखे  हैं  उदास    मुज़्तर है/1/

देख   हालात     वतन    शर्मशार   हैं  बेहद
आदमीयत  है   नदारद    जमीर    जर्जर है/2/

शर्म की  बात पे  जब  नाज़ होने  लग जाए 
मान लेना  की  ये  ज़महूरियत  का कैंसर है/3/

है  बड़ी  जद्दोजहद  सांस सांस  के  खातिर
जिंदगी   सस्ती है   मंहगा  हुआ  सिलेंडर है/4/

एक  उनको ही  कभी  शर्म  क्यूँ नही आती
जिनके  कांधो पे है जिम्मा बने जो रहबर है/5/

अधखिले फूलों को मत तोड़ बेहिसी से रब
कैसे  तू इतना हुआ संग दिल क्या पत्थर है/6/

अब तो स्वागत का तरीका बदल गया यारों 
भाप  काढ़ा  लो या पानी भी गर्म घर घर है/7/

और क्या हाल है सब ठीकठाक है न मियां
पूछ ले  इतना भी  कोई तो आज बेहतर है/8/

मुज़्तर - व्यथित बेचैन

उनके किस्से कभी अखबार में नही आते

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उन के   किस्से   कभी  अखबार   में   नही आते 
भूखे   रह कर    भी  जो    बाजार में   नही आते/1/

डबडबा   जाती  हैं   आंखे  भी   राह  तकते हुए 
दूर   रह कर   भी   जो    त्योहार  में  नही  आते/2/

चीख हमारी जो निकल आयी जुल्म सा हो गया
कत्ल   करके    वो    गुनहगार   में   नही  आते/3/

रह  गयी    मौकापरस्तों  के       इर्द गिर्द  सदा
जो   भले   लोग  हैं    सरकार   में    नही आते/4/

कागजों  पर    ही  चली    राहतों की  बंदरबांट 
झोपड़ों  पर    जो  हैं    लाचार   में   नही आते/5/

है   हमारे  भी   यहां   बेशुमार     ख्वाहिश मंद
पर   हुनर   सबके    इश्तेहार   में    नही  आते/6/

बेबस यतीम लोग मिले सिसकियाँ मिली

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बेबस  यतीम  लोग  मिले  सिसकियाँ  मिली
दफ्तर  बदल बदल के  थकी अर्जियाँ मिली/1/

हाकिम तो कह रहा है कि सब ठीक ठाक है 
पूछे  तो  कोई   उससे   किसे  रोटियाँ मिली/2/

भेजी  गई  है  लानतें  दिल  खोल  कर  उसे
अखबार  में फिर आज  यही सुर्खियाँ मिली/3/

कहने  को  जी  रहे हैं मगर मर चुके हैं लोग
पड़ताल पर बदन में फकत पसलियाँ मिली/4/

हर बार  ख्वाब   झूठे  दिखाये  गये  हैं  बस
पर   दूर दूर   जिस्म  से   परछाईयाँ   मिली/5/

गुजरी   तमाम  उम्र   ही  बस  गज्ल गोई में
उसकी   वसीयतों  में   फकत  रद्दियाँ मिली/6/

मैले  ही  होंगे   रिश्ते   बनेंगे  अगर  लिबास
होकर  के  इस्तेमाल तो बस फब्तियाँ मिली/7/

रोया  तो  वक़्त  भी  मेरे  हालात  पर बहुत 
मेरी  वजह  से   ही  तुम्हे   दुश्वारियांँ  मिली/8/

दिल जिगर जान तेरे नाम ही कर जाएंगे

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दिल   जिगर  जान  तेरे नाम  ही कर जाएंगे
हम  तेरे   वास्ते  हद  से   भी   गुजर जाएंगे/1/

जब  जरूरत  पड़ी  सींचा है लहू से तुझको
सोचना  मत   ऐ वतन  मौत  से डर  जाएंगे/2/

इक न इक दिन  तो ये हालात मियां बदलेंगे 
है  यकीं   खौफ़ जदा    दौर   गुजर  जाएंगे/3/

रात  के  बाद   नयी   सुब्ह   यकीनन  होगी
देख कर   धूप  सभी   चेहरे  निखर  जाएंगे/4/

दिल है सहमा हुआ  पहले से ही हालातों से
खौफ़ मंजर  न  दिखा  सोग से भर  जाएंगे/5/

हादसा   रोज़  नया   एक   चला   आता है
गर  ये  हालात  न  सुधरे  तो किधर जाएंगे /6/

हम बिछड़ कर यूँ भला तुझसे जियेंगे कैसे 
हो  के  आजाद  तेरी  याद  से  मर  जाएंगे/7/

तू  गिरफ्तार कर ले जहन में अपने हमको
गर दिया  छोड़ जो तुमने तो बिखर जाएंगे/8/

हम तो पैगाम मुहब्बत का लिये निकले थे
क्या पता  था  हमे की  लोग यूँ डर जाएंगे/9/

दूर से ही  भली लगती है  ये आतिशबाजी
पास से  देख  के  बच्चे  भी  सिहर जाएंगे/10/

गर नही कुछ भी बुरा इतना तो अच्छा क्या है

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गर नही  कुछ भी बुरा  इतना तो अच्छा क्या है
तेरी   दुनिया  में   खुदा  रोज़   तमाशा  क्या है/1/

अब  तो  बच्चे  भी सिहरने हैं लगे देख ये सब
हर   गली   मोड़  पे   ही   शोर शराबा  क्या है/2/

सहमे सहमे  से  दिखे  खौफ़ जदा  चेहरे सभी
कैसे    हालात    ये   सुधरेंगे   इशारा   क्या है/3/

सोग  के  घर  में  बयानों  के  हैं  मातम  पसरे
ऐ  सियासत   तू   बता   तेरा   इरादा   क्या है/4/

तू  पयंबर  है  फकत  अम्नो अमां  का साहब
फिर तेरा फित्नो फसादों  से  ये रिश्ता क्या है/5/

मेरी आंखों  को  न  तुम ख्वाब दिखाओ कोई 
मै   हूँ   बेचैन   बहुत    भूख  से  चर्चा क्या है/6/

मत  सुनाओ   हमें   झूठे   ये   फसाने  छोड़ो
रोज़  सुनते  हैं  ये  किस्से तो  नया सा क्या है/7/

एक  मुद्दत  से   वो   रोया  ही  नही  था  जैसे
जब वो  रोया  तो  गया  भूल  तरीका  क्या है/8/

रूठने  टूटने   का  हक   नही   होता  है  उसे 
जिम्मेदारी का जो मतलब है समझता क्या है/9/

कैसे मुमकिन है  बिछड़ तुझसे रहें हम जिंदा
सांस  चलती  है  नही  जानते  जीना  क्या है/10/

है  अभी  दूर  बहुत   दूर  तलक   जाना  हमें
ये समझने को तू आखिर  मेरा लगता क्या है/11/

जब बरसने लगे  बूंदों की तरह  लफ्ज़ कभी
भीग जाता कोई मौसम हो जिगर का क्या है/12/

Wednesday, 18 August 2021

मजबूर सी रही है क्यूँ हर खुशी हमेशा

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मजबूर   सी  रही  है   क्यूँ   हर   खुशी   हमेशा
मिलती  है  अजनबी  बन  क्यूँ   जिंदगी  हमेशा/1/

रहती  हैं  क्यूँ  हवाएँ    हमसे  खफ़ा खफ़ा  सी
चाहें  हैं  हम   तो  सबकी   ही   बेहतरी  हमेशा/2/

इतनी   तो   है   गनीमत   मैं  सांस   ले  रहा हूँ
तरसे     कहीं  कहीं  पर       है  जिंदगी हमेशा/3/

मुस्कान   के   मुखौटे     हमने   पहन   लिये है 
चेहरे  पे    यूँ   उदासी    अच्छी   नही   हमेशा/4/

बस   इंतजार   ही   तो   आया   हमारे  हक में
था  वक़्त   बंट  गया  वो  यारों  में  ही  हमेशा/5/

किसने  कहा   मुनासिब   है   जंग  लाजमी है
अम्नो अमान     सबकी   चाहत   रही  हमेशा/6/

कुछ  भी  नही  बदलता  बदलाव से समय के
इंसान   कौड़ियों   का   था   है  अभी  हमेशा/7/

चंदा  सितारे  जुगनू   बस  रात  के  हैं  मेहमाँ
इक  ज्योत  यूँ  जलाओ   हो  रोशनी  हमेशा/8/

तकलीफ़ हो रही अब पढ़ कर उन्हें कदाचित
पैगाम  आ  रहा   मत   लिख  बेबसी  हमेशा/9/

उपदेश  जाहिलो  के  खातिर  नही कभी भी
कुत्ते   हों  पालतू   पर   भौकेंगे   ही   हमेशा/10/

रहता है  कौन  मुझमें  मेरे सिवा भी छिपकर
अच्छी  नही  है  दिल  से  यूँ  दिल्लगी हमेशा/11/

मुहब्बत बांटते है हर तरफ ईमान रखते हैं

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मुहब्बत  बांटते  है     हर  तरफ    ईमान  रखते हैं
लबों  पर  हर घड़ी हम मुल्क का यशगान रखते हैं/1/

न नफरत की कोई भी बात  ही हम भूलकर करते
जिगर  दिल जान में अपने हम हिंदूस्तान रखते हैं/2/

कहीं गिरजा  कहीं मस्जिद  कहीं देखो शिवाला है
है  मिट्टी का असर सबका ही हम सम्मान  रखते हैं/3/

हजारों  रंग हैं   इसके   अलग   तहज़ीब  भाषा है
कभी क्रिसमस कभी होली कभी रमज़ान रखते हैं/4/

करे  जो  बद नजर दुश्मन निगाहें नोंच लें उसकी
विपत्ति  के  समय  इक जूटता का ध्यान रखते हैं/5/

हुए  इस  सरजमीं  कुर्बान  लाखों  ही सिकंदर हैं
सभी से खास हम अपनी अलग पहचान रखते हैं/6/

सलीके  से  सजाया है  लहू  देकर  वतन अपना
वतन की  राह में  खुद  को  सदा कुर्बान रखते हैं/7/

तिरंगा     गर्व  है  मेरा     तिरंगा    जान  है  मेरी
झुकाते  शीश  इसके  सामने  हम  मान रखते हैं/8/

तमन्ना है यही बस मुल्क के कुछ काम आ जाएं 
वतन के  वास्ते  मर  मिटने का अरमान रखते हैं/9/

अब दिल में कोई शौक कोई चाह नही है

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अब  दिल में कोई  शौक कोई चाह नही है
बस  जी  रहे  हैं   जिंदगी   परवाह नही है/1/

अरसा हुआ है खुल के नही मुस्कुराए हम
अश्कों के  बरसने  की  कोई  थाह नही है/2/

जिंदा हैं  मगर  जिंदगी  है  हमसे  नदारद
इससे  बड़ी मुश्किल की कोई राह नही है/3/

सामान  तो  सौ  वर्ष  के  कर डाले इकट्ठे
पर अगले ही पल से कोई आगाह नही है/4/

रुक तो  नही सकता है  अंधेरा ये  हमेशा
सच बात है  सौ फीसदी अफवाह नही है/5/

जिनके  भरे  हैं  पेट    वही   शोर  मचाते
बेबस की  जुबां पर कोई भी आह नही है/6/

नफरत से  नही प्यार से जीतेंगे जहां हम
है  भिन्न  नजरिया   कोई  गुमराह नही है/7/

जंजीर से  अपने जिसे  हो जाए मुहब्बत
उससे  बड़ा  नादां कोई  वल्लाह  नही है/8/

हर  दास्ताँ  में  मेरे  वो किरदार  मिला है
दो चार  कदम  साथ  था हमराह नही है/9/

जिंदगी यूँ ही गुजर जाएगी बस रोते हुए

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जिंदगी  यूँ  ही  गुजर  जाएगी  बस  रोते हुए
थक ही   जाएंगी निगाहें ख्वाब बस ढोते हुए/1/

उलझनों से कब उबर पाया कोई भी आदमी
आरज़ू   उम्मीद  हसरत   से  घिरा  होते हुए/2/

दूरियाँ   मजबूरियाँ    महरूमियाँ   तन्हाईयाँ
ये  मिली  सौगात खुद को इश्क में खोते हुए/3/

कशमकश  जद्दोजहद  में उम्र गुजरी है सदा
मौज  किस्मत ने किया है रात दिन सोते हुए/4/

चैन खोया  नींद खोयी  चंद  ख्वाबों के लिए
अब  लगी  सांसे  उखड़ने  हौसला  बोते हुए/5/

कभी हमारा खयाल उन्हे भी तो आता होगा

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कभी  हमारा  खयाल  उन्हे  भी  तो  आता होगा
कभी कभी  दिल तो  उनका भी गुनगुनाता होगा/1/

कभी   यकायक  तो   उठ ही जाते वो होंगे रातों
हमें  भी  ख्वाबों  में  देख   जी   मुस्कुराता होगा/2/

तड़प  तो उठते  ही  होंगे  मिलने कभी तो हमसे
कभी  लबों पर  भी  नाम  हमारा तो भाता होगा/3/

निगाहें  भी  झुक  ही  जाती होगी  कभी हया से
हमारी  खातिर   कभी  तो  वो   छटपटाता होगा/4/

कभी तो  गुस्सा  बहुत जियादा कभी बहुत प्यार
कभी  हमारा  भी  जिक्र  उनको    लुभाता होगा/5/

कि  बैठे बैठे  यूँ  खिलवतों  में  ही  सोच  हमको
कभी जफाओ पर अपनी  दिल से लजाता होगा/6/

कभी   सताने  लगे   हमारी   जो   याद   उनको
तो अश्क आंखों में उनके भी भर ही जाता होगा/7/

कि मुश्किल वक़्त को मुश्किल बताना भूल जाते हैं

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कि  मुश्किल  वक़्त  को  मुश्किल बताना भूल जाते हैं
जो  खुद  से   मिलते  हैं  हम  तो जमाना भूल जाते हैं/1/

उन्ही  से   पूछते   हैं   वज्ह    उनके    रूठने  की हम
सितमगर   जब  कभी    हमको  सताना भूल जाते हैं/2/

है  उलझी   इस कदर   जद्दोजहद  में   जिंदगी अपनी
कि  रोते हैं   तो     आंसू   ही    बहाना  भूल  जाते हैं/3/

कुछ  उधड़े उधड़े  दिखते  हैं  हमे रिश्तों के  धागे सब 
कभी    पैबंद    इनमें    जब    लगाना   भूल  जाते हैं/4/

कि जिनके वास्ते ख्वाहिश सब अपनी दफ्न की हमने 
वो  बच्चे   फर्ज  अब अपने    निभाना  भूल  जाते हैं/5/

नये  मिल  जाते हैं  हर मोड़ पर  अब  दर्द भी अक्सर
 नये  से  मिल के  हम  भी  गम  पुराना  भूल  जाते हैं/6/

रिश्ता था दिल का दिल से निभाया नही गया

221 2121 1221 212
रिश्ता था दिल का दिल से निभाया नही गया
अहसास  हमसे  खुल के  जताया  नही गया/1/

आते  रहे   खयाल  में    अक्सर  ही मेहरबाँ 
पर  असलियत  में उनसे ही आया नही गया/2/

दिल में है उनके क्या ये तो जाने वो ही मगर 
हमसे  कभी  वो  शख्स  भुलाया  नही  गया/3/

ता जिंदगी ही  जिन पे  किये जां निसार हम
हालत  पे  उनसे   आंसू   बहाया  नही गया/4/

हम  रूबरू  न  हों  कभी  उनकी  रजा रही 
इक दिन भी हमसे चेहरा छिपाया नही गया/5/

करता है  चर्चे  ले  के  मजे  वहशतों  के वो 
हमसे  तो  राज  उनका  सुनाया  नही  गया/6/

नाराजगी     न   दूर   हुई   मौत   बाद  भी 
दो फूल  कब्र  पर  भी   चढ़ाया  नही  गया/7/

मुश्किल खड़ी हो जाएगी ऐ यार किसी दिन

221 1221 1221 122
मुश्किल  खड़ी  हो  जाएगी  ऐ यार किसी दिन
जीना  कभी  हो   जाए  न   दुश्वार  किसी दिन/1/

हर दिन  की   परेशानियों  से  तंग  ही  आकर
कह दे  न  कभी अलविदा किरदार किसी दिन/2/

मुश्किल  नही  है  ख्वाब कोई करना मुकम्मल
दिखलाएंगे  दुनिया  को  चमत्कार किसी दिन/3/

चेहरे  पे  हँसी   छाएगी   इक  रोज   यकीनन 
खुशियों के मियां होंगे हम हकदार किसी दिन/4/

कल  वक़्त  तुम्हारा  था  मगर  आज  है मेरा
करना  ही  पड़ेगा  तुम्हे  स्वीकार  किसी दिन/5/

फिर कुछ न सुनाया गया  उस हादसे के बाद
जब  रोने  सी  बातों  पे  हँसे यार किसी दिन/6/

अरसा  हुआ है  खुल के  नही  मुस्कुराए हम
हो  जाएगी   यूँ  जिंदगी   बेकार  किसी दिन/7/

हालात  नही  देते   यूँ  हमको   तो  इजाजत
बच्चे   ही  मना  लेते   ये त्योहार किसी दिन/8/

लौटी  है  तमाशा  लिए इक भीड़ लिए जीत
आएगी  बड़ा   बोझ  लिए  हार  किसी दिन/9/

ये  वक़्त  सिखा   देता सभी को है सलीका
जीने  का  हमें  देगा  ये आधार किसी दिन/10/

कोई उपलब्धि नही है याद करने के लिए

2122 2122 2122 212 
कोई   उपलब्धि   नही  है   याद   करने   के  लिए
क्या  सुनाऊँ   मैं  कहानी    शाद   करने  के  लिए/1/

जब  लगे  जैसा  बने     सहयोग    करना  चाहिए
वक़्त  क्या   देखे  कोई   इमदाद  करने  के  लिए /2/

धूप  ले  आना   जरा  सा   गांव  से   आते  समय
है  बहुत   सीलन   यहाँ   नाशाद   करने  के लिए/3/

देख  रख्खा  है    बहुत  नजदीक  से  हमने जहाँ
रह  गया  अब  कुछ  नही  उस्ताद  करने के लिए/4/

क्या   जरूरत  है  बहानों  की  अगर  है  छोड़ना
मौन  ही    पर्याप्त  है    आजाद   करने  के लिए/5/

जी रहे हो  तो करो  कुछ  मसअलों  पर  बात भी
गलतियों  पर  हर समय  प्रतिवाद  करने के लिए/6/

जिम्मेदारी  ने   रखा   जिंदा  अभी  तक  वरगना
कौन  जीता  है    समय   बर्बाद   करने  के लिए/7/

हैं चकित  अपने  दुखों पर   बे असर है सान्त्वना
जाएं अब किस दर भला फरियाद करने के लिए/8/

दूरियाँ   बेशक  रहे   उम्मीद   बस  मत  छोड़िए
कुछ  रहे  जरिया  सदा   संवाद  करने  के  लिए/9/

वक़्त के साथ शरारत भी चली जाएगी

2122 1122 1122 22 
वक़्त  के  साथ    शरारत   भी    चली  जाएगी
दिन  ढलेगा  तो  ये   रंगत  भी    चली  जाएगी/1/

एक   जैसा    न    हमेशा    ही   रहेगा   मौसम
इक न इक दिन तो ये बरकत भी  चली जाएगी/2/

फ़र्क  पड़ने  जो   लगेगा    कभी  आहों  से तो
देख  लेना  कि  ये   जिल्लत भी  चली जाएगी/3/

रूठ कर  जाने  लगी  आस  कोई जो दिल की
साथ  ही  उसके   मुहब्बत  भी   चली  जाएगी/4/

अपनी  कीमत का सही जिसको न अंदाजा हो
उसकी  बेमोल  ही   इज्जत  भी  चली जाएगी/5/

जात मजहब ने  बड़ी   मुश्किलें  कर रक्खी हैं
बाद   मरने  के    अदावत  भी   चली  जाएगी/6/

रह  गया  है  वो   अभी  और   जरा सा मुझमें
धीरे धीरे  ही   ये   निस्बत   भी  चली  जाएगी/7/

जाने  क्यूँ    बात  बिना  बात    खफ़ा  होते हैं
हम  न  होंगे  तो  शिकायत  भी  चली जाएगी/8/

जिंदगी   मौन  यूँ  रह कर  नही आसान मियां
दौर   बदलेगा   ये  आदत  भी   चली जाएगी/9/

घर  के  हालात  इजाजत  तो  नही  देते मगर
जीयो जी भर के ये  गुरबत  भी चली जाएगी/10/

मेरे  हिस्से  में  तो  कुछ  भी  नही  चाहा  मैने
साथ  ही  मेरे   मुसीबत   भी   चली   जाएगी/11/

सुब्ह  होती  है  तो  अखबार से  डर लगता है
वक़्त  गुजरेगा  ये  वहशत  भी  चली जाएगी/12/

अब रोज़ रोज़ खुद से मुलाकात क्या करूँ

221 2121 1221 212 
अब  रोज़ रोज़  खुद से  मुलाकात क्या करूँ
इक बार   हो  चुकी   जो वही बात क्या करूँ/1/

गूंगा  नही  है   वक़्त   मेरा    मौन  है  अभी 
अच्छे नही है  आजकल  हालात  क्या करूँ/2/

मरना तो  रोज़ ही है  कभी  जी भी लीजिए
मिलते  हैं  ऐसे  मशवरे   सौगात  क्या करूँ/3/

आयी किसी की याद और आंखें बरस पड़ी
बे वज्ह  बे सबब  की ये  बरसात क्या करूँ/4/

जब जब  भी  जिंदगी को है देखा करीब से
अपने   लगे  हैं  दूर   सवालात   क्या  करूँ/5/

उलझे     मेरे  खयाल  हैं     तेरे  खयाल से
सुलझाते उनको बैठा हूँ दिन रात क्या करूँ/6/

आंखों के दर्द  पढ़ ले जो  उसकी तलाश है
काफ़ी  है  एक  यार  ही इफरात क्या करूँ/7/

खोने  के  बाद  ही  सदा  आता  खयाल है
थे कीमती वो रिश्ते  वो लमहात क्या करूँ/8/

मिट्टी  के  गुल्लकों  की  नही होती है उमर
इतनी सी बात पर  भला हैहात  क्या करूँ/9/

क्यूँ भला या बुरा यूँ किसी को कहो

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क्यूँ  भला   या  बुरा   यूँ  किसी  को कहो
दिल की बातें  न खुल कर  सभी को कहो/1/

मुश्किलें    आएंगी  और   चली   जाएंगी
ये   मुनासिब  नही   कुछ  बदी  को कहो/2/

मुस्कुरा कर  मिलेंगे     हर इक  मोड़ पर
दिल्लगी   ना   करे    जिंदगी   को  कहो/3/

क्या  भला   नफरतों  से   हुआ  फायदा
अलविदा   अब  जरा   दुश्मनी को कहो/4/

फूल   खुशबू    धनक   चांदनी  रागिनी
जुल्फ  अंगड़ाईयाँ   कमसिनी  को कहो/5/

चांद तारों   से  अब  लौट   आओ जरा
मसअलों  पर  कभी   दो घड़ी को कहो/6/

ताक  पर   ही   तकाजे  कभी  से खड़े 
छोड़  दो  अब   तमन्नाएँ   जी को कहो/7/

मन  के  हारे  हुए     जीत  सकते  नही
वज्ह  चाहे  कोई  भी  कमी  को  कहो/8/

थोड़ी   दुश्वारियांँ    बेबसी    हैं  तो  हैं 
जिम्मेदार इसका मत जिंदगी को कहो/9/

हर तरफ़ बस रंजो गम है पीर है

2122 2122 212 
हर  तरफ़    बस   रंजो गम है पीर है
हो   गयी  कैसी    अजब    तस्वीर है/1/

कशमकश   जद्दोजहद   है   कू ब कू
इस  कदर    हालात   अब   गंभीर है/2/

उलझनों  की   भीड़  में  है   लापता
हर  खुशी  अपनी    यही  तकदीर है/3/

ताक  पर  है  हर  तमन्ना  आजकल
ख्वाहिशों  के    पांव  में    जंजीर है/4/

ख्वाब में भी ख्वाब सा कुछ भी नही
बस   छलावा है      बरसता  नीर है/5/

जूते  पापा के  पहन   आया  समझ
जिंदगी  इक   नकचढ़ी     तहरीर है/6/

तुलसी की चौपाई    मीरा के भजन
दिलबरी  की  खुशनुमा    तकरीर है/7/

जद्दोजहद से हासिल जो जिंदगी मिलेगी

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जद्दोजहद   से   हासिल   जो   जिंदगी   मिलेगी
दुर्भावना     विसर्जित     सुलझी   हुई    मिलेगी/1/

उम्मीद   का   दिया   इक   मन में जलाए रखिये
तुमको    कदम कदम  पर    ही  रोशनी  मिलेगी/2/

लहज़ा    मिज़ाज    में  है    रद्दोबदल     जरूरी
उस पार  जिंदगी  फिर    अच्छी  भली   मिलेगी/3/

मजबूरियाँ     तसल्ली     महरूमियाँ     उदासी
मंडप में  कहकहों  के    सिसकी   दबी  मिलेगी/4/

मत जिक्र भी करो तुम खुलकर के रंजो गम का
यूँ  कुछ न कुछ  यहाँ पर   सबमें  कमी  मिलेगी/5/

मन  बोलता है     इससे  है   बे खबर  सितमगर
बस  काट कर  जुबानें    क्या   खामुशी  मिलेगी/6/

फिर  लौट कर  न  आता  है  वक़्त  जाने वाला
क्या   सोचिए   उसे   जो   वापस  नही मिलेगी/7/

है   हौसला   जरूरी   और   जिद भी है जरूरी
जज्बा  हो   जीतने  का   मंजिल  तभी  मिलेगी/8/

मत  आंकिए   इसे  कम        ये आन है हमारी
जब  भी  पड़े  जरूरत         बेटी खड़ी मिलेगी/9/

सूरज   निकलने   वाला है   सब्र रख   जरा सा
जारी   सफर   रखेगा     तो   रोशनी    मिलेगी/10/

बात निकली तो कई दर्द पुराने निकले

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बात  निकली  तो   कई  दर्द   पुराने  निकले
अश्क  आंखों  से  तसल्ली के बहाने निकले /1/

एक  कांधे को  तरसता  जो रहा  उम्र तलक
आज   कांधे   हैं  उसे   चार  उठाने  निकले/2/

अब कोई आते नही दिल की सदाएं सुनकर
जो भी निकले हैं रवायत ही निभाने निकले/3/

जाने  क्यूँ  बात  बिना  बात  खफ़ा  होते हैं
रोज़  ही रोज़  गिले शिकवे  बहाने  निकले/4/

हर मुसीबत से  दुआओं ने  संभाला  है हमें
नेमतें  ओढ़ के  हम  रिज़्क  कमाने निकले/5/

सोचते थे  कि वहाँ  मिलते हैं सब अपने से
अब तो चौपाल भी शेखों के ठिकाने निकले/6/

क्या  करें  दर पे  तेरे जा के बता ऐ मालिक
जब न सिजदे के इबादत के मआने निकले/7/

झुर्रियां  बाप  के  चेहरे  पे   पसर  आयी है
मुँह से बच्चों के  मगर रोज़ ही ताने निकले/8/

तंग गलियों से गुजरती बड़ी खामोश हयात
हर कदम  पर  नये  उस्ताद  पढ़ाने  निकले/9/

कुछ खयालात बदलने से बदलती है फिजा
पर  यहाँ लोग  फकत  शम्स  उगाने निकले/10/

कैसे तकसीम किया रब ने जहां में खुशियां
है कहीं  मौज़  कहीं गम  के फसाने निकले/11/

घाव गिनने को जो बैठोगे तो थक जाओगे
आबले किस्से  सफर के  हैं  सुनाने निकले/12/

जल्द ही आवाम को ये इत्तिला दी जाएगी



2122 2122 2122 212
जल्द ही  आवाम  को  ये  इत्तिला  दी जाएगी
मुस्कुराते    पाए  जाने  पर  सजा  दी जाएगी/1/

आंसूओं पर  भी   लगेगी  बंदिशें  तुम  देखना
शर्त  खामोशी  है  जीने  की  बता  दी जाएगी/2/

सांस  लेने पर  नया  इक टेक्स  थोपा जाएगा
पहरेदारी  अब  हवाओं  पर  लगा दी जाएगी/3/

इल्तिजाओं पर  गुजारिश पर  लगा पाबंदियांँ
उठने वाली हर खिलाफ़त ही दबा दी जाएगी/4/

हर निवाले  पर  तुम्हारे  होगी इक पैनी नजर
बेबसी तक भी  सियासत में  भुना दी जाएगी/5/

कागजों  पर  फिर  बटेंगीं  बेहिसाबी  रोटियाँ
नाम पर मुर्दों के फिर  राहत लुटा दी जाएगी/6/

जल्द ही ऐलान होगा ख्वाहिशें अब जुल्म है
आरज़ू  उम्मीद पर  नोटिस  थमा दी जाएगी/7/

रास  आये  या न  आये  ये गुलामी आपको
ये मुनादी हर गली नुक्कड़  करा दी जाएगी /8/

मेरे सरकार लखदातार मेरी नफरत बदल देना

1222 1222 1222 1222 
मेरे  सरकार   लखदातार  मेरी  नफरत बदल देना
मुझे   औकात  में रखना  मेरी फितरत बदल देना/1/

जमीं  पर   पांव  हो  मेरे   भले सर आसमाँ  छू ले 
कदम  बस डगमगाए मत बुरी हर लत बदल देना/2/

जुबाँ पर तल्खियांँ आए  न लहजा ही कभी बदले
दिखे  नौबत  कभी  ऐसी  तेरी  रहमत  बदल देना/3/

हजारों   दुख  भले  देना   परीक्षा  हर  घड़ी  लेना
करम  इतना ही करना  मत मेरी चाहत बदल देना/4/

लगी  ऐसी  लगन तुझसे भजूंँ दिन रात मैं तुझको
प्रभू  इतना  करम  करना लगन ये मत बदल देना/5/

बुरा  हो   या  भला  कोई  करूँ कर्तव्य  मैं अपना
चलूँ मैं  राह  बस  अपनी  न ये आदत बदल देना/6/

दिखाती है ये दुनिया नाज़ नखरे अपने दौलत की
मेरी दौलत  हो तुम  दातार  रिश्ता मत बदल देना/7/

तेरे चरणों में  नतमस्तक  रहूँ  दिन रात  बस यूँ ही
न मतलब दुनिया दारी से मुझे तुम मत बदल देना/8/

चढ़ाऊँ   पुष्प  चरणों में   तेरे  मैं  भाव  के  अपने
मेरे श्रद्धा सुमन  स्वीकार कर  किस्मत बदल देना/9/

         🙏🌹।। जय श्री श्याम ।।🌹🙏

फुर्सत मिले तो श्याम जी निर्धन के घर भी आईये

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फुर्सत मिले तो  श्याम जी निर्धन के घर भी आईये
अर्पित  करें  हैं  भाव  हम  हमको  हृदय  लगाईये/1/

कुछ भी न भाव के सिवा अब क्या चढ़ाएं आपको 
स्वीकार   कीजिए   प्रभू    अहसास   मान  जाईये/2/

सब कुछ बनाया आपने  सब कुछ दिया है आपने
कैसे  मैं  आपका  ही  दूँ    अब  आपको  बताईये/3/

मेरा है  कुछ  यहाँ  अगर   बस  मुश्किलें हैं  दर्द है
चरणों में आपके  समर्पित  हम  हैं   श्याम आईये/4/

छोटी है  झोपड़ी   मगर   मन  में  है  सेवा भावना
हमको कृतार्थ    कीजिए    इक  बार  तो पधारिये/5/

अश्कों  के  पुष्प   आपको    भरपूर  मैं  चढ़ाऊँगा
बाबा  कभी तो  भक्त के  घर पर भी दिन बिताईये/6/

होने  न  देंगे  आपको  मायूस   एक  पल  को भी
भजनों से  हम रिझाएंगे  दिन रात  श्याम  आईये/7/

देख तमाशा रोज नया सा खौफ़ सा भीतर बैठ गया

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देख  तमाशा  रोज नया सा  खौफ़ सा भीतर बैठ गया
सोग  नया  हर दिन  रो रो कर  जी में पत्थर बैठ गया/1/

शोर  सिसकियाँ  कोलाहल  है  रुदन  चारो ओर मचा
भीग के   अश्रू धाराओं  में    सारा   मंजर    बैठ गया/2/

भाग रहे  पहलू  में  धरकर  सांसो  का  सामान  सभी
देख के  लाचारी  लोगों की  मन में  इक डर बैठ गया/3/

वक़्त  सभी का  आता है  अभिमान धरा रह जाता है
धरती की  प्यास बुझाने खातिर  देखो अंबर बैठ गया/4/

दावों  के   प्रतिदावों  के  भी  सांसे  उखड़ते  देखा है
सिस्टम है  वेंटीलेटर पर  दिल  गश  खाकर बैठ गया/5/

चीर  बचाने  कलयुग में  अब  कोई  कृष्ण  न आयेंगे 
शस्त्र उठाया जब नारी ने शत्रु फिर डर कर बैठ गया/6/

नर  पिशाचों  की  बस्ती में  रक्त  पिपासु  है चहूंओर
सहमा सहमा  बेबस  इंसा  ओढ़ के  चादर  बैठ गया/7/

उम्र भर के वास्ते वो इंतजाम कर गया

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उम्र  भर    के   वास्ते     वो    इंतजाम   कर गया
रंजो गम    की    फेहरिस्त    मेरे   नाम  कर गया/1/

हिचकिचा  रहे  थे  जो   अभी तलक  निकलने से
आंसूओ   की   धार  को   वो   बेलगाम  कर गया/2/

जिस्म  की   जरूरतों  ने   दर ब दर   किया बहुत
आज घर की मुफलिसी को  वक़्त आम कर गया/3/

चेप  ली   बनावटी    हंसी    जरा  सी    चेहरे पर
ये   उदासियाँ    छिपाने    खूब    काम  कर गया/4/

ढापने  को  तन   न  जीते  जी   मिली  उसे कबा 
मिल गया कफ़न   जो आखिरी  सलाम कर गया/5/

मर  गयी   उसूलों  के  ही   चौखटों  पे  ख्वाहिशें
जाग  जब  उठा  जमीर  मन को  थाम कर गया/6/

यूँ  तो    दर्द  ने    दिया  है     दर्द   बे हिसाब ही
पर  बदल  दी  जिंदगी  ये  खूब  काम  कर गया/7/

दाने की तलाश में जो  सुब्ह  घर से निकला था
वो  परिंदा  लौटने   में    देख   शाम    कर गया/8/

सूरतें    बदलने  से        न  शीरतें    बदलती हैं
जाते  जाते    इक  मलंग   ये  पयाम  कर गया/9/

थी उम्मीद कुछ सहल की मुल्क को निजाम से
मुश्किलें  ही  मुश्किलें  खड़ी  निजाम कर गया/10/

कराहती कहकहों में दब कर सिसक रही है

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कराहती    कहकहों    में   दब कर    सिसक रही है 
लगे   है   सबको    ही   मुस्कुराती    सुबक   रही है /1/

तसल्लियों  पर  तसल्लियाँ  बस  मिलीं है अब तक
तलाश  में   जिंदगी      खुशी  के    भटक    रही है/2/

मलाल  है   आंधियों  को  इतनी  सी  बात का बस 
हवाओं  के   बीच   लौ   दिये   की   थिरक  रही है/3/

इस  अंजुमन    का    तो    तौरे दस्तूर    ही यही है
ये   कितने   अहसास   रोज़   जाने   गिटक रही है/4/

पकड़  के  परछाईयों   को   झूठी   उन्ही   के पीछे 
न  जाने  कब  से   ही   ये  शराफत  तुनक  रही है/5/

मेरी   है   पहचान   क्या    मेरे   नाम  के  अलावा
ये  हार  है  मेरी   मुझको  तिल तिल  चटक रही है/6/

ये  इश्क  तारी है  जबकि  दोनों पे क्या हुआ फिर 
कि  बात  किस  मसअले पे  आ कर अटक रही है/7/

गुजर   रही  है    बड़ी  ही   जद्दोजहद   में सबकी 
सलीब  हर  एक   सर  पे  ही  अब  लटक  रही है/8/

जो   छू  न  पायी  बुलंदियांँ  कर  तमाम  कोशिश
वो   जिंदगी  अब   उठा  के  ऐड़ी   उचक  रही है/9/

कोई  अगर  है  भला  तो  क्यूँ  है  भला वो इतना
यही  तो   सबकी   उधेड़बुन    आज तक  रही है/10/

बहुत ही कम आजकल मिला करता हूँ मैं खुद में
बता  दो  ये  मौत  को  कभी  से  वो  तक  रही है/11/

अदाओं के दम पे नातेदारी नही चलेगी

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अदाओं  के   दम  पे   नातेदारी    नही  चलेगी
मिलो  तो   दिल  से   ये  इश्तेहारी नही चलेगी/1/

निभा  सको  साथ  जिंदगी भर तभी तो चलना
फिर  आधे   रस्ते  में   होशियारी   नही चलेगी/2/

कभी  सुहाने से  ख्वाब   आंखों में  हम सजाएँ
इन आंसूओ  की   यूँ   पहरेदारी   नही  चलेगी/3/

बुलंदियों  पर  तो  ये   तमाशा  है  रोज़  का ही 
मगर   जियादा    ये   फौजदारी   नही  चलेगी/4/

पहन  के  जूता   नया  बदल  चाल  ही गयी है
बता   उसे     जिंदगी   उधारी    नही   चलेगी/5/

अगर  पड़ोसी  है  सोया भूखा है  तुमपे लानत
ये   सारे    खैरात     रोजेदारी     नही  चलेगी/6/

जो  दूसरों   के  लिए  ही   जीये  वो जिंदगी है
बस अपने खातिर  ये जाँ निसारी  नही चलेगी/7/

यूँ टिमटिमाता रहा वो बिजली के दरमियाँ भी
कि  कह  रहा  हो  दिया  तुम्हारी  नही चलेगी/8/

लगे है  मेहमान  जैसे अब तो  हमें ये खुशियाँ 
दुखों  की   यूँ  घर  में   दावेदारी  नही  चलेगी/9/

दो चार लफ्ज़ो में  दिल की बातें कहें भी कैसे
यूँ  बंदिशों  की   तो   पेशकारी   नही  चलेगी/10/

बाद तेरे कभी मुस्कुराए नही

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बाद    तेरे      कभी       मुस्कुराए   नही
खुशियों  के   फिर   कोई  गीत गाए नही/1/

वादे    करना    उन्हे    खेल   जैसा लगा 
राह    तकते    रहे   हम    वो  आए नही/2/

आस    उम्मीद     सारी     धरी  रह गयी 
रह    गये    रूठे   हम   वो   मनाए नही/3/

यूँ  तो  कुछ  भी  न   बदला  तेरे बाद पर 
एक  तुझको   ही  हम    याद  आए नही/4/

कुछ  तो  होंगीं  यकीनन  ही  मजबूरियाँ
शौक   से    कोई    आंसू    बहाए   नही/5/

लौट आओ   किसी  फिर  बहाने  से तुम
जश्न   मुद्दत  से   हम   भी    मनाए नही/6/

गम  हो    चाहे   खुशी   बेतहाशा   न हो
हद से ज्यादा  कभी  कुछ  भी भाए नही/7/

फिर   पनपने    लगे    बीज   उम्मीद के
खुद   उगी   खरपतें   हम    उगाए  नही/8/

चल रही आजकल खुद से अनबन जरा
जिंदगी   से    कहो      आजमाए   नही/9/

मुश्किलें  हैं  खड़ी  कब से  दहलीज पर
आने  कह  दो   उन्हें   हिचकिचाए नही/10/

कितना आसान था खुद को खोना मगर
मुद्दतें   हो   गयी   खुद   को  पाए  नही/11/

ख्वाब सिरहाने खास बैठे हैं

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ख्वाब    सिरहाने    खास   बैठे हैं
थोड़े     गुमसुम    निराश   बैठे हैं/1/

अब   इन्हें    इंतखाब   कैसे करूँ
घर  में   बच्चे      उदास    बैठे हैं/2/

दे    रही  हैं      जरूरतें    दस्तक
जेब      खाली      हताश  बैठे हैं/3/

चूल्हा     ठंडा      पड़ा   रसोई में
लोटा     थाली     गिलास  बैठे हैं/4/

आपसी   जंग   चल  रही है वहाँ 
हम     वहीं     आस पास बैठे हैं/5/

आएंगे   दिन    जरूर  अच्छे भी
हम      लगाए      कयास बैठे हैं/6/

आस   कैसे   मुहब्बतों   की करें 
सब   यहाँ    दिल खरास  बैठे हैं/7/

अब न पहचानते किसी को कोई 
यूँ   तो   सारे    शनास    बैठे  हैं/8/

कैसे  निकले  उदासियों से  अब 
दूर     बेहद       उजास   बैठे हैं/9/

कैसा ये दौर कैसे यहाँ यार हो गये

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कैसा  ये   दौर    कैसे   यहाँ   यार   हो गये 
अच्छे  भले   भी    देखिए   बीमार  हो गये /1/

बदली हुई  हवाओं  का  लगता  है ये असर 
बच्चो के  बे अदब    सभी  संस्कार  हो गये /2/

अम्नो अमां थे कल जहाँ खुशियाँ बहार थी 
दहशत ही अब  वो मुल्क के  मेयार हो गये /3/

नफरत भरी हुई है  यहाँ  दिल मे आजकल 
कैसे   फिजाएं  मुल्क  के   खूँ बार  हो गये/4/

मजलूम  की यहाँ पे हिफाज़त करेगा कौन
जिम्मे था  जिनके  काम वो  बेकार हो गये/5/

चेहरे जो  खिलखिलाते थे  मायूस से दिखे
जब से  ही  घर के  बीच में  दीवार  हो गये /6/

माँ बाप  एक कोने में  दुबके  मिले  हैं अब 
बेटे के  भी  तो  अब  नये  परिवार  हो गये/7/

होली   दिवाली   ईद  रवायत  लगे है अब 
मंहगे  ही  सारे आजकल  त्योहार  हो गये/8/

आने ही वाली है कोई  शामत यहाँ पे अब
तब  बदले बदले  से  मेरे  सरकार  हो गय/9/

करता रहा  सितम  वो  बड़े  ही  मजे मजे 
शिकवा किया  जो हमने गुनहगार हो गये/10/

तुरपाईयाँ लिबास की उधड़ी कहाँ कहाँ

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तुरपाईयाँ   लिबास   की   उधड़ी   कहांँ कहांँ 
उधड़ी है  कुछ यहाँ से तो उधड़ी है कुछ वहाँ /1/

धागे  पिरो के  अश्कों  के  सी ते  हैं गम सभी 
पैबंद   कहकहों   का    लगा  के   जहांँ तहाँ /2/

अब  तो  जरा सी  आंच में  रिश्ते  झुलस रहे 
बर्दाश्त अब न होती किसी को भी तल्ख़ियाँ /3/

बढ़ से गये हैं  आजकल  यारों के कद बहुत 
उबने  लगे हैं देख के  मुफलिस के वो निशाँ/4/

मेला लगा है खुशियों का बाहर तो जिस्म के 
भीतर  जिगर सुलग रहा  सब है धुआँ धुआँ /5/

सासों को  छू के  गुजरी है कोई महक अभी
पीछे ही  उनके  चल पड़े  अश्कों के कारवाँ /6/

जिस रौ  चली हवाएँ हैं  उस रौ  ही बह गये 
हमको नही है कोई भी शिकवा गिला मियांँ/7/

दिये सलाह बहुत साथ पर दिया न कोई

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दिये   सलाह  बहुत   साथ  पर दिया न कोई
कदम  दो चार  मिला कर कभी चला न कोई/1/

जरूरतों  में   ही   मजबूरियाँ   दिखी सबकी
मुसीबतों  में   हुआ   पास  भी खड़ा न कोई/2/

रवायतों  का   चला   है    नया   चलन ऐसा
निबाहने  को  कभी  आया  आशना  न कोई/3/

बनी   है  खास   वजह   दर्द   की   तमन्नाएँ
जरूरतों  के  मुताबिक  कभी  चला न कोई/4/

कोई  न  रंज  न  अफसोस अब  जरा है हमे 
नसीब  से  तो  जियादा  कभी मिला न कोई/5/

किसी  को  जख्म  दिखाओगे  मारे  जाओगे
यहाँ  रकीब   हैं  सारे   कहीं   सगा   न कोई/6/

झुलस   रहे  हैं    यूँ    कोमल   हरे हरे  पत्ते
चली है  कैसी  हवा  इनसे अब बचा न कोई/7/

शरीफ  सारे  हैं  मौका नही  मिला जब तक
मिला है  मौका  जिसे चूक वो किया न कोई/8/

कभी  क्या  अपना ही नंबर घुमा के देखा है
मिले हैं व्यस्त ही खाली कभी मिला न कोई/9/

मजाक  मस्ती  हंसी  सब  मुखौटे  है साहब
बिना  नकाब  के  बाजार  में  दिखा न को/10/

दिल का है मामला प्रभू दिल से निभाईये

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दिल  का है  मामला  प्रभू दिल से  निभाईये
उल्फत  हुई  है  आपसे  दिल  मत  दुखाईये/1/

तरसे है  कब से  देखने  की  चाह  में  नयन
जलवा निगार  अब  जरा  जलवा दिखाईये/2/

ये  दिल्लगी  नही है  कोई  दिल की है लगी
तुम पर  निसार दिल ये जिगर  जान आईये/3/

पेचीदगी   बहुत  है    सुना  इसकी   राह में
दारोमदार      आप  हैं      रस्ता     बनाईये/4/

लब  पर  तेरा  ही  नाम  रहे  हर  समय मेरे
चाहत  यही है  दिल की  प्रभू  सच बनाईये/5/

सजदे में  सर  झुका  रहे दिन रात  ही मेरा
है  आखिरी  तमन्ना   ये   श्री श्याम  गाईये/6/

प्राणों से  प्यारे   लगने  लगे   श्याम सांवरे
दीवानगी   की   हद  है  प्रभू   मान जाईये/7/

इक बार  तेरे  दर्श की  दिल में उठी तलब
इतना भी मत सताईये प्रभू अब तो आईये/8/

    🙏🌹।।जय श्री श्याम।।🌹🙏

महरूमियाँ उदासी बेचारगी कमी की

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महरूमियाँ     उदासी      बेचारगी     कमी की
हर पल  न कर नुमाइश  खुलकर तू बेबसी की/1/

है  फिक्र मंद  हाकिम  तू  फिक्र  मत  जरा कर
चुपचाप   बस  सहा कर  हर  चोट  जिंदगी की/2/

जिस तौर की है दुनिया उस तौर बस चला कर
मत सोचना  कभी भी  उकता के खुदखुशी की/3/

कितना   हँसी  है   मंजर   पर्दा   हटा के  देखो
दरकार  सख्त है  अब  तुमको  भी  रोशनी की/4/

लहज़ा  मिज़ाज  हर दिन  सबके बदलते रहते
करता  कहाँ  है    कोई  अब  कद्र  सादगी की/5/

करती  अगर  गरीबों की  इल्तिजा असर कुछ
हालत  न  ऐसी  होती  बदतर  यहाँ किसी की/6/

हर  दिन  नया  तमाशा  दहलीज  पर है  तारी
हर  दिन  चुका  रहे बस  कीमत हैं गर्दिशी की/7/

हर  वक़्त  ताक पर ही  खुशियाँ  रही  बिचारी 
जीने   के   वास्ते    है   जद्दोजहद   सभी  की/8/

वक़्त बन जाऊँ मैं बन जाए वो लम्हा मुझमें

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वक़्त बन जाऊँ मैं  बन जाए वो  लम्हा मुझमें
मुझको मुझसे ही घटा दो तो बचा क्या मुझमें/1/

सब में सब कुछ तो न होता है बुरा ही अक्सर 
कुछ तो होगा ही  जरा सा कहीं अच्छा मुझमें/2/

भीग  जाती हैं   यकायक  ही  सुनी सी आंखें 
अब भी ज़िंदा है वो  बरसात का लम्हा मुझमें/3/

और है  बात   सुना   तुझको  गया  शिद्दत से 
वरना  सबको  ही  वहाँ पर था भरोसा मुझमें/4/

ख्वाहिशें  रोज़  जरूरत  से  उलझ  पड़तीं हैं 
रोज़  होता  है    नया  एक     तमाशा मुझमें/5/

चल रही जद्दोजहद खुद के ही भीतर खुद से 
कोई   मुझसे  भी   परेशान  है  रहता  मुझमें/6/

मुझको महसूस करो  खुशबूओं के जैसे करो
मैं  हूँ  खामोश    नही     शोर शराबा  मुझमें/7/

रफ्ता रफ्ता  है   बदलने  लगा  किरदार मेरा
रह  गया  है  वो  अभी  और  जरा सा मुझमें/8/

तेरी पनाह में मेरे ये जिस्मो जान रहे

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तेरी   पनाह  में   मेरे   ये  जिस्मों  जान  रहे
न  हो  जमीन   या   चाहे  न  आसमान  रहे/1/

न  इल्तिजा  न  गुजारिश  है  कोई और मेरी
बस  एक  तू  ही  खयालों में शब बिहान रहे/2/

जुदा  न  होना  कभी   चाहे  जो  सजा देना
सफर  के  वक्त  तू है  बस  ये इत्मीनान रहे/3/

तू   मेरे    पास    रहे    इसलिए    जरूरी है 
तमाम   उम्र  ही    चलता  ये  इम्तिहान  रहे/4/

कुछ और बात भले हो न हो किसी से कोई
मेरी  जुबां  पे   तेरा   हर  घड़ी  बखान  रहे/5/

हर  एक   कतरा   तेरा  नाम ही पुकारे बस 
अगरचे    जिस्म    सरापा    लहूलुहान  रहे/6/

     🙏🌹।।जय श्री श्याम।।🌹🙏

दिन ये नही सफेद कोई रात ही तो है

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दिन  ये  नही    सफेद  कोई   रात  ही  तो है
राहत  सुकून  चैन  की  बस   बात  ही  तो है/1/

हल्का बहुत हुआ है ये बादल बरस के आज
हक  है   बरसने  का   उसे  बरसात ही तो है/2/

क्या क्या  न  खेल  रोज़  दिखाती है जिंदगी
अब  क्या  हो   कोई  रंज   ये  हालात तो है/3/

तूफ़ान  से   जो  बच  गये   मर  भूख से गये
सिस्टम  की  या  नसीब की सौगात ही तो है/4/

क्यूँ  नाम सुन के  भीड़ ने रस्ता बदल लिया
पहले  तो  आदमी है वो फिर जात ही तो है/5/

किरदार  जीते जीते  मैं  खुद से हुआ हूँ दूर
खुद  के   वजूद  वास्ते    आघात   ही तो है/6/

रहता है  कोई   और  भी  मुझमें  मेरे सिवा
दीवानगी  की   ये  भी  शुरूआत  ही तो है/7/

जाने  टपक  पड़े हैं  किधर से  ये खामखां
अब आ गये तो रहने दो  जज्बात ही तो है/8/

राहतों से पहले आयी अर्जियाँ गिन लीजिए

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राहतों   से  पहले   आयी   अर्जियाँ   गिन  लीजिए
बेबसी    लाचारगी  और   सिसकियाँ  गिन लीजिए/1/

कागजों पर   तो  लिखा है   ठीक  है  सब  मुल्क में
आप   श्मशानों  के  बाहर   अर्थियाँ   गिन लीजिए/2/

तल्ख़ियाँ     दुश्वारियांँ     मजबूरियाँ     महरूमियाँ
आप  माथे पर  शिकन और  त्यौरियाँ गिन लीजिए/3/

वक़्त  ने   हर वक़्त   परखा है  बड़ी   शिद्दत से ही
गर  यकीं   होता  न हो तो  पसलियाँ गिन लीजिए/4/

जिंदगी  में    इन  दिनों   फुर्सत  से   हैरांँ  हैं  सभी 
गुजरे कल की हर कमी हर गलतियाँ गिन लीजिए/5/

एक  दो   ही     हादसे  होते  तो   कहते  इत्तेफाक 
आप  अखबारों की  हर दिन सुर्खियाँ गिन लीजिए/6/

बंट  गए   तारीखों में    माँ बाप    बच्चों  के  लिए 
रह गयी  इकतीस  को बस गिनतियाँ गिन लीजिए/7/

लाक डाउन  में  सड़क  पर  तो  नही  आया कोई
चेहरे  पर    शर्मींदगी   मजबूरियाँ   गिन   लीजिए/8/

मिल  गया आखिर  जो चाहा था नयापन बाँटकर
आप हर घर में नयी अब खिड़कियाँ गिन लीजिए/9/

बंदगी  इतनी  न  की  जितनी कि रहमत हो गयी
बरकतों  से  है  लबालब  झोलियाँ  गिन  लीजिए/10/

वो बाप कैसे मुश्किलों से पालता रहा

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वो  बाप   कैसे    मुश्किलों  से    पालता  रहा
ये   दर्द     उम्र भर   ही    हमें     चूभता  रहा/1/

बच्चों  के   पेट  भरने  की   जद्दोजहद  में ही
ता जिंदगी   वो   अपनी   खुशी   टालता रहा/2/

घर में  कोई  लिबास  बिना  रह न जाए सोच
बनयान   खुद   फटी  ही  पहन   झूमता रहा /3/

हर इक की जरूरतो का सदा ही खयाल रख
रिश्ते    बखूबी   तौर     वो    संभालता  रहा/4/

आएंगे   काम    मेरे    बुढ़ापे    के   वक़्त में 
बच्चों  से   उम्र  भर   उसे   ये   आसरा  रहा/5/

अहसास  तक  न  होने  गरीबी  का वो दिया 
हँस हँस के  सारी  मुश्किलें खुद झेलता रहा/6/

देखा  न  धूप छांव   न  ठहरा   कभी भी वो 
मुश्किल  से  रास्तो  में  भी  वो  भागता रहा/7/

खुशियों  में  रंज  में   ही  गुजारी  है जिंदगी 
यूँ   जीतता   रहा   वो    कभी    हारता रहा/8/

घर के लिए  किया है निछावर वो जाने दिल 
बेरुखियों   का   दौर  भी   बस  देखता रहा/9/

कुछ भला या कुछ बुरा हो जाएगा

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कुछ भला  या  कुछ बुरा हो जाएगा 
इससे  बढ़ कर क्या बता हो जाएगा/1/

फासले  पहले  भी  तो  थे  दरमियाँ 
अब नया कहिए तो क्या हो जाएगा/2/

यूँ  भी  है  इफरात  मंजर खौफ़ तर
हादसा  फिर  इक नया  हो  जाएगा/3/

मुख्तसर  चाहे  हो  पर  हो  जिंदगी
वर्ना  जीना   नाम  का  हो  जाएगा/4/

इतनी   शिद्दत  से   तराशोगे  अगर
कोई  भी  पत्थर  खुदा हो  जाएगा/5/

फर्ज़  और  इंसानियत के  दरमियाँ
मर्म  का   रुतबा  बड़ा  हो  जाएगा/6/

उसके हिस्से  बस मुसाफत आएगी
तिफ्ल  जो  पहले  बड़ा हो जाएगा/7/

जिंदगी  से    जंग   जारी  है  अभी
क्या पता  कब  हादसा  हो जाएगा/8/

हमारे गांव में तो खुशबूओं का मौसम है

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हमारे "गाँव" में  तो "खुशबुओं"  का  मौसम है 
खिली खिली  है  सुब्ह तितलियों का मौसम है

कि   लहलहाते   हुए   खेत  झरने  अल्हड़पन 
फुदकती     चहचहाती     चिड़ियों   मौसम है

ये   नन्हे  हाथों  में   कंचे   ये    गिल्लियाँ डंडे 
है खिलखिलाती  डगर  मस्तियों का मौसम है

तुम्हारे    शहर  में    जंगल  है    ईट गारों  का
अभी  भी  गांव  में  कच्चे  घरों  का  मौसम है

जरा  सी   बूंद  पड़ी  और  महक  उठी  मिट्टी
बरस  गरज  रहे  अब  बादलों  का   मौसम है

जरा  सी  धुप की  दरकार  है  इन आंखों को 
बहुत  दिनों  से   यहां   बारिशों  का मौसम है

कहाँ हैं मंजिलें मैं रास्ता हूँ

1222 1222 122 
कहाँ   हैं      मंजिलें       मैं    रास्ता हूँ
मैं  अपनी  धुन में  ही  बस चल रहा हूँ/1/

तमन्ना       आरजू      उम्मीद    धोखा
मैं  इन  सबमें  ही  बस उलझा हुआ हूँ/2/

गुजर  ही   जाएगा    ये   वक़्त  यूँ  भी
इसे   मैं        राएगाँ   ही      सोचता हूँ/3/

समेटो   और  पढ़  लो मुझको  जी भर
मैं  कागज  पर  यूँ  ही  बिखरा पड़ा हूँ/4/

फिजूलखर्ची  की   लत   ऐसी  लगी है
मैं  खुद  को   दर ब दर  करता  रहा हूँ/5/

यूँ  तो  हासिल  हुआ कुछ भी नही पर
बिछड़  तुमसे   मैं  खुद  खोने  लगा हूँ/6/

कहाँ  बदला   तुम्हारे  बाद   भी  कुछ
ये   देखो   अब तलक  मैं  जी  रहा हूँ/7/

रसीदें  हैं    ये     चेहरे    पर    लकीरें 
मैं  किस हद  तक  यहाँ  खर्चा गया हूँ/8/

जरूरत   के  लिए   हूँ    दर ब दर  मैं
तसल्ली      चैन     राहत     ढूंढता हूँ/9/

कहीं  है   डर    कहीं  पर    है भरोसा
कहा  रब  ने  मैं  सब  कुछ  देखता हूँ/10/

बना   पाए  न  जो   अपने  मुताबिक
उन्ही  के   वास्ते    मैं    बस    बुरा हूँ/11/

सभी हैं  मस्त  अपनी-अपनी  धुन में
भरी  महफ़िल में  बस मैं गम जदा हूँ/12/

बिछड़ने  का   कभी   सोचा  नही था
बिछड़ कर  अब तुझे  बस सोचता हूँ/13/

न वो भी हँस सका मुझको रुला कर
यही  मैं   सोच कर अब   हँस रहा हूँ/14/

तल्ख़ी जबान की कोई नश्तर से कम नही

221 2121 1221 212 
तल्ख़ी   जबान  की   कोई   नश्तर  से   कम नही
तानों  की  मार   भी  किसी   पत्थर  से  कम नही/1/

बाहर   से      मुस्कुराते   हैं      भीतर      भरे हुए
हालत तो  अपनी भी  किसी  जोकर से  कम नही/2/

कागज  पे  अपने  माथे की  खुरचन  मैं  लाया हूँ
कुछ   बुदबुदा   दो  तुम  तो वो मंतर से कम नही/3/

सुनकर  के  नाम  फिर  वो  मेरा खिलखिला दिये
दिल  पर  लगी  जो  चोट  वो  खंजर से कम नही/4/

हल्का  लगा  है  बादलों  को  भी   बरस  के  खूब
आखिर ये उनका हक किसी अवसर से कम नही/5/

बस  कुछ  ही  जानते  हैं   वो  कुछ  जानते  नही
ये   जानना   भी    कोई     बवंडर  से  कम  नही/6/

मजबूरियाँ  थीं  कुछ तो इन आंखों की हँसने की
ठहरा  हुआ    मुआब     समंदर   से     कम नही/7/

कुछ  लोग   उम्र भर   ही    दुआओं  में   रह गये
ऐसा  भी    वाकिया  तो     मुकद्दर  से  कम नही/8/

मुआब - भरा हुआ

हर सुदी देख ली हर बदी देख ली

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हर  सुदी    देख  ली   हर  बदी    देख ली
जो   न   देखा   सुना   वो  घड़ी   देख ली/1/

बस  नजरिया  किताबों में  लिक्खा मिला
बात   हमने   मगर    अनकही    देख ली/2/

हर  कदम    पर      परेशां   रही  जिंदगी
हर  कदम   मुश्किलों  से   घिरी  देख ली/3/

छू   न   पाती हैं  अब  आसमाँ को  कभी
जिंदगी    रोटियों   तक     थमी  देख ली/4/

हो  गया   इत्तेफ़ाकन  जो    अच्छा हुआ
असलियत   इस  बहाने   सही   देख ली/5/

हर   तमन्ना    हर  इक    आरज़ू   बेबसी 
कहकहों  में     दबी   जिंदगी     देख ली/6/

देख  डाले    सभी    धूप भी     छांव भी 
आंसूओ   में    नहायी    खुशी   देख ली/7/

फूल  खुशबू  शफ़क़  तारे  जुगनू  धनक
बाद  बारिश  के   रंगत   खिली  देख ली/8/

फिर  बरस  कर  उन्हें  खूब  हल्का लगा
मन   भरे   मेघों  की   बेबसी   देख  ली/9/

एक  सिक्के  में   लाखों   दुआ  दे  गया
इक   कलंदर   की   सौदागरी   देख ली/10/

अनकही    अनसुनी    बात  पे   जोर है
मसअलों   की   यहाँ   बानगी   देख ली/11/

दिल बहुत खुश है अब देखकर फुरसतें
जीस्त   जद्दोजहद   से   भरी   देख ली/12/

बहुत बेचैन सा रहता है कोई

1222 1222 122 
बहुत    बेचैन   सा     रहता  है    कोई
किसी  को  फर्क़  क्या  पड़ता है  कोई/1/

हैं   अपने  आप में   मशरूफ  दुनिया
किसी  की  फिक्र  कब  करता है कोई/2/

पहन   रक्खा है  चेहरे  पर  हँसी  बस
कहाँ  अब  दिल से  ही  हँसता है कोई/3/

है   सब  जीने  की  ही   जद्दोजहद में
तसल्ली   से   कहाँ    रहता  है   कोई/4/

गुजर  ही  जाएगा  मुश्किल  समय ये 
भला  कब  देर तक  टिकता  है  कोई/5/

भरोसा     कांच    के   जैसा    रहा है
पता  चलता है  जब  चुभता  है  कोई/6/

लगी  है    आग   दर दर  में  शहर में
हवा  पर   दोष   ना  लगता है   कोई/7/

कई   अनचाहे   बन  जाते  हैं   रिश्ते
समय  ही   नाम   दे  सकता है  कोई/8/

मुसलसल   हादसा   भी   है   जरूरी
बहुत कुछ इनसे भी  सिखता है कोई/9/

कभी  इसको तो  उसको  कोसता है 
समय के  साथ  कब  चलता है कोई/10/

दुआएँ    बांध    देती  है     गिरह में
सिवा  ये  माँ के कब  करता है कोई/11/

राम के घर गया श्याम के दर गया

212 212 212 212
राम  के   घर  गया  श्याम  के  दर गया
सब    देवालय गया  सारे    मंदर  गया/1/

पूज   डाले    सभी   देवता   धाम  सब
पर  न   संताप   मेरा   कहीं   पर  गया/2/

अंतरात्मा ने फिर  मुझको  आवाज दी
मैकदे  चल   वहाँ  जो  गया  तर  गया/3/

हर  कदम  मौत  का  खेल  है  जिंदगी
क्या जियेगा भला  शख्स जो डर गया/4/

शम्स  के   डूबते  ही  थकी   सी  लगी
रौनकें  सांझ  की  सब  वो लेकर गया/5/

अब वो मिल बैठकर रोना हँसना गया
ऐ  वबा   देख  तू क्या कहर कर गया/6/

रह गयी फिर कसर  कुछ कहन में मेरे
सब सुने  तो मगर  कुछ न भीतर गया/7/

जिंदगी  की  तरह  ही  ग़ज़ल  है  मेरी
कुछ समझ आते आते सुखनवर गया/8/

दस्तूर मौके वक़्त सभी देख भाल कर

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दस्तूर     मौके    वक़्त    सभी    देख भाल कर
अपनी   जबान   खोलिये अब  कुछ संभाल कर/1/

करते   हैं  घाव   गहरे   बिना   धार   के   कटार
सब  ओर   इश्क   घोलिए   फुर्सत  निकाल कर/2/

दुनिया   में    आज    सब   हैं  बराबर   डरे हुए
दरवेश    जश्न   कर   रहे  कासा      उछाल कर/3/

हिम्मत  से   हौसलों  से   बनाया   जो   शह्र को 
दर दर   भटक   रहा   वो   तेरा   पेट  पाल कर/4/

अपनी   गरज   में   सर  पे  बिठाया  गया  उन्हें
मुश्किल  में  आज  छोड़  दिया  क्यूँ बेहाल कर/5/

मिलती   है  खूब  जद्दोजहद  मुश्किलो के बाद 
जी  ले  तू   जिन्दगी  को   जरा  देख भाल कर/6/

कितनों  को  वो  नसीब नही  तुझको जो मिला
कर  रब  का  शुक्रिया अदा अपने इस हाल पर/7/

देखो    लगी   है    दांव  पे   हर  एक   जिंदगी
होते   हैं   सारे   फैसले    सिक्के    उछाल कर/8/

फुर्सत निकाल कर  कभी कुछ पल को सोचना 
हासिल हुआ क्या बोलिए  नफरत यूँ चाल कर /9/

दीवार   दरमियाँ   ही   खड़ी    एक    हो  गयी
बस   फासले   बढ़े  हैं   फकत  यूँ  बवाल कर/10/

कैसे    मै    तेरे    हाथ    धुलाऊँ    बता   मुझे 
दामन में कल गया था तू कीचड़ जो डाल कर/11/

मंहगी  घड़ी दे  सबको  यूँ  मुश्किल  घड़ी न दे
मजबूर   जिंदगी   में   खुदा  कुछ  कमाल कर/12/

क्या क्या न खेल रोज़ दिखायी ये सायकल

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क्या क्या  न खेल रोज़  दिखाती ये सायकल
पर   काम  मेरे   खूब   बनाती   ये  सायकल/1/

कितने   ही    रास्ते    नये    इसने दिखाए हैं 
हमदम  केे  जैसे  पेश  है  आती ये सायकल/2/

तन्हाईयों   के   दौर  का    मेरे    बनी गवाह
मुश्किल  घड़ी में  साथ निभाती ये सायकल/3/

फुर्सत में   दोनो  साथ   गुजारे   बहुत समय
मौके  पे   मेरा   मान   बढ़ाती   ये सायकल/4/

लम्बे  सफर  से   कोई   रहा  न  कभी गुरेज
मंजिल से मेरे   मुझको मिलाती ये सायकल/5/

बदले  समय  के  साथ बदल से गये हैं लोग
मुझको मगर है अब भी सुहाती ये सायकल/6/

फिटनिस  का  मेरे  खूब ही रक्खे खयाल है
कसरत  बिना  करे  ही  कराती ये सायकल/7/

भुलने  न  अपने  आप  को  देती  मुझे है ये 
मुझ तक मुझे ही रोज़ ले जाती है सायकल/8/

खार खार हर तरफ है क्या करें गुलाब का

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खार  खार   हर  तरफ  है   क्या   करें   गुलाब  का 
चल  रहा  है  दौर   नफरतों  का   और   इताब  का/1/

मुश्किलों   के   दौर    चल   रही    सियासतें   यहाँ
वक़्त  ये   नही  है   कोई    गुजरे   अहतिसाब  का/2/

क्या  मिला है  बोलिए तो  किसको  दिल खरास से
मन   खराब   ही   है   हासिली   दिले  खराब   का/3/

मिल  के  करना  होगा  सामना  वबा  की  मार का
तब  ही  मिट  सकेगा  मुल्क  से  वजूद अज़ाब का/4/

क्या  हुआ  बदल  गया  जो  वक़्त के  हिसाब  वो
खुल के आखिर आ गया जो मन में था जनाब का/5/

फिर  रहे  हैं   ओढ़  कर   नकाब  लोग  चेहरे  पर
मोल   बढ़  गया   बहुत  है  आजकल  नकाब का/6/

शहर  में  हैं  अजनबी  से  अपने भी कुछ आशना
क्या   मगर  ही   फायदा  है  उनके  दस्तियाब का/7/

मानते   तो   हैं   मगर    मानते   भी    कुछ   नही
क्या   भला   है   तुक   कहो   ऐसे  इंतिखाब  का/8/

राह    ताकते    गुजर   गयी   उमर   निगाह   की
और   अब   न   होगा    इंतजार    माहताब   का/9/

ख्वाहिशें  सुलग  सुलग  के  खाक  हो  रही  यहाँ 
पर  गुरूर  है  कि   कम  न  होता  है  जनाब  का/10/

है    जहाँ    जरूरतें    वहीं    कभी    उगा   नही
काम  गर  न  आए  करना  क्या है आफताब का/11/

इताब - गुस्सा
अहतिसाब-लेखा जोखा
अज़ाब - दुख कष्ट
आशना - परिचित
दस्तियाब - उपलब्धता
इंतिखाब - स्वीकार
माहताब - चांद
आफताब - सूरज

पहले राशन फिर वो बर्तन फिर वो जेवर पी गया

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पहले राशन फिर वो बर्तन फिर वो जेवर पी गया
प्यास थी  तगड़ी  हुआ  जो  भी मयस्सर पी गया/1/

क्या गजब की है खुमारी क्या गजब का है जुनून 
मयकदा   मदमस्त  हो  बस्ती का हर घर पी गया /2/

भूख से  व्याकुल बिलखते  नौनिहालों  की व्यथा
घोल कर  फिर जाम में इक घूंट  सर सर पी गया/3/

पाल  रक्खा  है  बहुत  ही  खूब  लत  ये  आदमी
अब  तरसता  कतरा कतरा  जो  समंदर  पी गया/4/

कोई  शिकवा  या  गिला  उसको मुकद्दर से नही
वो  नशे  में  घोल कर  हर  एक  नश्तर  पी गया/5/

हाँ   गरीबी  भूख  बेकारी  की  हालत  है  तो  है 
वो  जमाने  के  सभी  दुख  दर्द  महशर पी गया/6/

आबरू  इज्जत  भला क्या चीज़ है सब छोड़िए
मान  और  सम्मान  के  वो सारे चक्कर पी गया /7/

इस  तरक्की  वास्ते  क्या क्या  चुकाया  मोल है
जब  बुझी  न  प्यास  बीवी बच्चे छप्पर पी गया/8/

गांव   छूटा   खेत   छूटा   यार  रिश्ते  नाते  सब
बावरा  मदमस्त  हो कर  अपना  तेवर  पी गया /9/

एक  अर्से  तक  मुझे  जो  खा रही थी बात इक
तंग फिर  आकर मैं आखिर बात भीतर पी गया/10/

उम्मीद हुई रोशन फिर यार अंधेरों में

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उम्मीद   हुई   रोशन   फिर   यार   अंधेरों में
ये  मुल्क  हुआ  फिर  से  उजियार अंधेरों में/1/

मायूस   हताशा  के   घिरते   हुए  आलम में
फिर  आस  जगी दिल में इक बार अंधेरों में/2/

दिखते न उजालों में जो साफ कभी खुलकर
सब  सामने   आए  अब  किरदार  अंधेरों में/3/

इमदाद   जरा    करके   तस्वीर  हजारों ली
मुफलिस  को पशेमां मत कर यार अंधेरों में/4/

फिर  सुबह  नयी  होगी  उम्मीद यकीनन है
हर  शख़्स  है  इस  खातिर तैयार अंधेरों में/5/

कुछ   चुल्हे   पड़े   ठंडे  है   यार  गरीबी में
कोने  में    हैं  लोटे कुछ  बीमार   अंधेरों में/6/

उनको ही उजाले की  भी  सख्त जरूरत है
इक दीप  है  उस घर की  दरकार अंधेरों में/7/

दरकार  नही  कोई  लाखों की  हजारों की
इक दीप  से  होगा सब उजियार अंधेरों में/8/

जरा है जरा की कमी है

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जरा  है     जरा  की     कमी है
जरा   के   लिए    बस  दुखी है/1/

कोई  कम  कोई  कुछ जियादा
परेशाँ      हर  इक   आदमी है/2/

कदम  दर   कदम  ही  समस्या
बनाए   हुए      मुँह     खड़ी है/3/

तसल्ली     भरोसा     दिलासा
बड़ी   बात   बस    खोखली है/4/

लगे   दर्द   अपना   बड़ा  बस
इतर   जानता    कुछ   नही है/5/

बड़ी   फुरसतों  में  हैं  अब  वे 
जो  कहते  थे   फुर्सत  नही है/6/

इशारा     कोई    तो    बड़ा है
कि  गहरी   बहुत   खामुशी है/7/

न   सोचा  कभी  था  किसी ने
किया   सामना   जो   अभी है/8/

जिधर   देखिए  खौफ़   मंजर
जिधर   देखिए   बस   गमी है/9/

अंधेरे  में    रक्खा  है  जिसने
उसे    कहते   सब   रोशनी है/10/

दुआओं   में  है  गर  असर तो
भला    क्यूँ    ये    बेचारगी है/11/

जो  सुनता  है   रब  याचनाएँ
तो क्यूँ इस कदर मुफलिसी है/12/

जिंदगी अब रोज़ की फुर्सत से उकताई बहुत

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जिंदगी  अब रोज़ की  फुर्सत से उकताई बहुत
हर  दफा  रूसवाईयों  से  भी है  कतराई बहुत/1/

हौसला   भी  है  बहुत  जज्बात  भी  बे इंतिहा
जाने क्यूँ पर हर कदम पर ही है लरजाई बहुत/2/

कुछ  दरारें  आ  गई है  दरमियाँ रिश्तों के अब 
खार  अब  खाने  लगे  हैं  भाई  से  भाई  बहुत/3/

घर के  बीचों बीच  इक  दीवार कर दी है खड़ी
रिश्तों के  बंटवारे से  बस  मां ही पछताई बहुत/4/

यूँ  तो  हमको  जिंदगी  ने  रोज  ही भरमाया है 
हर   दफा   तेवर  बदल  करके नये आई बहुत/5/

चांद  अक्सर  दूर  ही   मेरी  पहुंच   से  है  रहा 
छूने  की  ख्वाहिश  मेरी  बेकार  पछताई बहुत/6/

दे  के  न्यौता   है  नदारद  जिंदगी  से  जिंदगी
इस अदा पर जिंदगी फिर मुझसे कतराई बहुत/7/

गर नही कुछ और तो बातें चुभन तक ले चलो

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गर  नही  कुछ  और  तो  बातें  चुभन  तक  ले चलो
भाषणों  को   राशनों  के   ही   सदन  तक  ले चलो/1/

छोड़िए   लफ्फाजियों   का   दौर   अब   जाता रहा
वायदों  को  अब  हकीकत  के  छुअन तक ले चलो/2/

खूब  महकाया  बदन  को   इत्र  के  दम  पर  मियां
मुल्क  के  मिट्टी  की  खुश्बू  भी  बदन तक ले चलो/3/

लाल   सरहद  पर   सलामत  है   बताने  के   लिए
एक  झूठा  खत  कोई  माँ  के  नयन तक  ले चलो/4/

इस  निराशा  को   हताशा  को   पतन  की  राह से 
तंगहाली  की  व्यथा  को  अब रूदन तक ले चलो/5/

कोसना  अब  बंद  भी  कर  दो  मुकद्दर  को  सदा 
हौसलों की  बात  को  अपने  बदन  तक  ले चलो/6/

अम्न का  पैगाम  ये  दर दर से  मन तक  जाये तो 
अब  अंधेरों को  उजालों  के  दहन  तक  ले चलो/7/

सजदे  में   मैं  सर  झुकाऊं   आस्तानों   में  मियां
और  तुम  अपने  वज़ू को  आचमन तक ले चलो/8/

सदन - घर
दहन - छेद सुराख