Monday, 6 September 2021

कहीं बे हताशा बरसना खुशी का

122 122 122 122 
कहीं   बे हताशा    बरसना    खुशी  का
कहीं  हर  घड़ी  बस  है  रोना  कमी का/1/

कही   अर्श  पर  है  कही   फर्श   पर है
न  आया  समझ  फलसफा जिंदगी का/2/

तमन्ना     तसल्ली    दिलासा    भरोसा
हर इक  रोज  है  बस  तमाशा इसी का/3/

बड़ी   सेल  अरमानों  की  चल  रही है
सजा    खूब    बाजार   है   बेबसी का/4/

तरीके  बहुत   गम   छिपाने  के  है पर
है  मुश्किल  बहुत  मुस्कुराना नमी का/5/

गिले  शिकवे   तन्हाई   आंसू   उदासी
मजा  हमने  पाया है  ये  आशिकी का/6/

बदलने  का   तेरे   कोई   गम  नही है
हमें तो है अफसोस दिल की लगी का/7/

लहू  पीने  की  एक  लत है  जरा बस
भला  चाहती  यूँ  सियासत  सभी का/8/

खड़ी दर पे  उम्मीद के खत लिए धूप
खुले  जाने  दर  कब मेरी बेहतरी का/9/

नजर  का  नही  दोष  है जाविए का 
रहा है  नजरिया  जुदा हर किसी का/10/

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