2122 1122 1212 22
उन के किस्से कभी अखबार में नही आते
भूखे रह कर भी जो बाजार में नही आते/1/
डबडबा जाती हैं आंखे भी राह तकते हुए
दूर रह कर भी जो त्योहार में नही आते/2/
चीख हमारी जो निकल आयी जुल्म सा हो गया
कत्ल करके वो गुनहगार में नही आते/3/
रह गयी मौकापरस्तों के इर्द गिर्द सदा
जो भले लोग हैं सरकार में नही आते/4/
कागजों पर ही चली राहतों की बंदरबांट
झोपड़ों पर जो हैं लाचार में नही आते/5/
है हमारे भी यहां बेशुमार ख्वाहिश मंद
पर हुनर सबके इश्तेहार में नही आते/6/
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