Monday, 6 September 2021

उनके किस्से कभी अखबार में नही आते

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उन के   किस्से   कभी  अखबार   में   नही आते 
भूखे   रह कर    भी  जो    बाजार में   नही आते/1/

डबडबा   जाती  हैं   आंखे  भी   राह  तकते हुए 
दूर   रह कर   भी   जो    त्योहार  में  नही  आते/2/

चीख हमारी जो निकल आयी जुल्म सा हो गया
कत्ल   करके    वो    गुनहगार   में   नही  आते/3/

रह  गयी    मौकापरस्तों  के       इर्द गिर्द  सदा
जो   भले   लोग  हैं    सरकार   में    नही आते/4/

कागजों  पर    ही  चली    राहतों की  बंदरबांट 
झोपड़ों  पर    जो  हैं    लाचार   में   नही आते/5/

है   हमारे  भी   यहां   बेशुमार     ख्वाहिश मंद
पर   हुनर   सबके    इश्तेहार   में    नही  आते/6/

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