2122 1212 22
खुद में भी मिल नही रहा खुद को
रख न जाने कहाँ दिया खुद को/1/
आंख भर कर के मुस्कुराएँ हैं
यूँ भी दी हमने है सजा खुद को/2/
दी गई दिल को यूँ तसल्ली भी
फिर बताया गया बुरा ख़ुद को/3/
कुछ अंधेरा बता रहे हैं उसे
जो उजाले किया जला खुद को /4/
आएंगे अच्छे दिन कभी न कभी
दे रहे सब यहाँ दगा खुद को/5/
दरमियाँ भीड़ के रहे तन्हा
हिज्र में ऐसे दी सजा खुद को/6/
आजमाती है हर कदम पर हमें
जिंदगी है समझती क्या खुद को/7/
शेर सुनता यहाँ है कौन भला
हर कोई है तलाशता खुद को/8/
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