Wednesday, 12 April 2023

आदमी पहले पहल अच्छा लगा

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आदमी    पहले पहल    अच्छा  लगा
जब समझ  आया  कोई  धोखा लगा/1/

देर  तक    बातें  हुईं   उस   शख्स से 
जो  कहीं   मुझमें  ही  था बैठा  लगा/2/

जिंदगी   मंहगी  लगी    यूँ  तो  बहुत 
साथ  लेकिन  अजनबी   जैसा  लगा/3/

खूब  वाकिफ हैं  तेरी फितरत से हम
जिंदगी  मत  इस  तरह   मस्का लगा/4/

जुल्फ  अंगड़ाई  तबस्सुम   कमसिनी
बस  यही  उन्वान     चर्चा  का  लगा/5/

आईने से      गुफ्तगू  की     देर तक
मिल कर अपने आप से अच्छा लगा/6/

दुश्मनों  से  डर  नही  अब उस तरह
दोस्तों  से     डर  हमे    जैसा  लगा/7/

कुछ भला और बुरा समझते हो

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कुछ  भला  और  बुरा  समझते हो
या  कि  सब  एक सा   समझते हो/1/

उम्र  गुजरी है     रंजो गम    सहते
क्या  हमे   तुम  नया   समझते हो/2/

अपनी दुनिया तुम्हें समझते हैं हम 
तुम  हमे   जाने  क्या  समझते हो/3/

कितना  पानी   संभालें  पलकों में
सब्र  की  हद     जरा  समझते हो/4/

आखिरी  मर्तबा  है  मिलना तुम्हें
आखिरी  मर्तबा        समझते हो/5/

मैकदे में झूमती अल्हड़ कहानी और है

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मैकदे  में     झूमती    अल्हड़    कहानी  और है
इन  पियक्कड़  के घरों की   सच बयानी और हैं/1/

बिक गये  राशन पताही  साज सब  सामान सब
पर  घटी न    शान   इनकी   जिंदगानी  और हैं/2/

मय गया भीतर निकल आया वहीं इक जानवर
आदमी  की  शक्ल  है       चंगेज़ खानी और है/3/

ठोकरों  पे    दुनिया दारी      रिश्ते   नातेदारियाँ
बे गुमाँ  बे ताज  दारों   की     दिखानी   और है/4/

क्या  हुआ  गर  जेब में    पैसे  नही है  आज तो
भाईचारा   है  गज़ब       संगत   पुरानी  और है/5/

चल रहा  हर दिन तमाशा  है नया  दहलीज पर
कुछ  लरजती  और  सिसकती लंतरानी और है/6/

चल रही  जद्दोजहद   हर वक़्त   पीने  के लिए
जह्न में  है   कुछ  खुमारी    बद गुमानी और है/7/

बे गुमाँ - अशिष्ट
लंतरानी - शेखी

जंग छिड़ी छंदों दोहों पर सैफाई के कमरे में

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जंग  छिड़ी    छंदों  दोहों  पर,    सैफाई  के   कमरे में। 
फिर नंगी हुई    देख   सियासत,    गोसाईं के  कमरे में।। /1/

अपने-अपने  राम हुए  अब,  अपनी अपनी  रामायण।
बिलख  रहा  चिंतन  मानस का,    दानाई के  कमरें में।। /2/

फोन के बस  की पैड पर मत,  देश  बदलते रह जाना।
फेसबुक  ट्वीटर   नही  मिलते,  सच्चाई के  कमरें में।। /3/

त्याग तपस्या बलिदान और,   प्रेम सिखाता  है मानस। 
दृष्टि दोष है   दोष देखना ,    चौपाई के        कमरे में।। /4/

कत्ल हुई   मानवता फिर से, मजहब ग्रस्त मुहल्लों में।
दाग   बहुत    गहरे   पसरे हैं,      दंगाई  के   कमरें में।। /5/

भूख की  दरकार  है  रोटी,  चाहे  जिससे  मिल जाए। 
मंदिर मस्जिद  लरज   रहे हैं,   चतुराई  के   कमरें में।। /6/

नोटों के  नीचे  दबा  मिला,  कराहता   घायल  बेबस। 
कुछ  कहने की  चाह लिए सच,  अच्छाई के कमरें में।। /7/

कोई  महीन   कोई  हल्के,     हर  मुद्दे    पीसे  जाते। 
वक़्त के  गोद में   बरसों तक,     पैमाई के  कमरें में।। /8/

देख रहे   उस्ताद  ज़मूरे,  घायल  मन  की पीड़ा को। 
अश्क  बहाते   मिलते   तुलसी,  रघुराई के  कमरें में/9/

दानाई - बुद्धिमता 
शकेबाई - धैर्य, धीरज, सब्र, सहिष्णुता,
पैमाई - मापने का कार्य, पैमाइश

कहने को कहते सब रहे जाने नही गये

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कहने  को   कहते  सब  रहे    जाने  नही  गये
जाना  नही  था   हमको  तो    माने  नही  गये/1/

मंजूर  ही     नही  थी      खुशामद गिरी   हमे
रूठी  जो   हमसे    जीस्त     मनाने  नही गये/2/

लहज़ा  मिज़ाज  नाज़  न  बदला  जरा कभी
मिल कर के   बरसों  बाद भी   ताने  नही गये/3/

महफ़िल जो उनकी छोड़ दिया छोड़ ही दिया
मुड़ के फिर उनसे  दिल को  दुखाने नही गये/4/

अपनी  बला  से   आया था  जैसे  चला गया
हम  तो  किसी  को  घर से   बुलाने  नही गये/5/

बर्बादियों  का    मेरी    रहा     जिम्मेदार  जो
हम दर  पे  उसके  सर  को  झुकाने नही गये/6/

आंसू   बहाने   वास्ते    वजहें    मिली  बहुत
उनका    खयाल    करके   बहाने   नही गये/7/

ऐसा  नही   कि  हमको   मुहब्बत  नही  रही
पर  बात बात  पे   हम  ये  जताने  नही गये/8/

हालात  दिल के  हमसे ही मत कीजिए पता 
बरसों  हम अपने  दिल के  मुहाने  नही गये/9/

कभी वो चांद सितारे की जिद नही करते

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कभी वो  चांद  सितारे  की  जिद  नही करते
खिलौने  मंहगे  व  सस्ते की  जिद नही करते/1/

गुजार  लेते       अंधेरों में      जिंदगी  अपनी
मगर  कभी भी  उजाले  की  जिद नही करते/2/

कटी पतंग  के    पीछे ही    भाग कर  खुश हैं
गरीब  बच्चे    जियादे  की   जिद  नही करते/3/

कभी हैं   रात की बासी में      या हैं  झूठन में
वो  रोज़ रोज़   समोसे  की   जिद  नही करते/4/

खुद अपने दम पे झुका लेते आसमाँ भी मगर
खुदा से  कोई   करिश्मे  की  जिद  नही करते/5/

गुजार  देते  हैं   वो         जाग कर    कई रातें
सुकून   वास्ते     सोने  की    जिद  नही करते/6/

समझ  रहे हैं       परिंदों  का  दर्द     बच्चे भी
पतंग  उड़ाने  को   माँझे की  जिद  नही करते/7/

हर  एक हाल  में   वो  जानते हैं    खुश रहना
कदम कदम पे बस अच्छे की जिद नही करते/8/

तुम समझते क्यूँ नही

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मैं  गुजस्ता  इक   दहर हूँ   तुम   समझते क्यूँ नही
मैं  तुम्हारा  अब  किधर हूँ  तुम  समझते  क्यूँ नही/1/

मैं  मुसाफिर हूँ   तेरे   पिछली  सफर की  राह का
अब  नयी  मैं  इक  डगर हूँ  तुम समझते क्यूँ नही/2/

दरमियाँ  रिश्तों  के  अब  दिखने  लगीं  हैं  दूरियाँ
कुछ  नही है  मैं  जिधर  हूँ  तुम  समझते क्यूँ नही/3/

कुछ  ठहर कर   देखते   तो    साथ  ही  पाते मुझे 
मैं  तुम्हारा   चश्मे तर हूँ   तुम   समझते  क्यूँ नही/4/

मखमली अहसास हो तुम खिलखिलाती सुब्ह का 
मैं  सुलगती   दोपहर हूँ     तुम  समझते  क्यूँ नही/5/

मर गया है  शौक  मरने का  किसी पर अब हुजूर
मैं  पृथक  ही  राह पर  हूँ  तुम  समझते क्यूँ नही/6/

साथ  रहता है  मेरे        किरदार  मेरा  हर समय
मैं  न  तन्हा  दर ब दर  हूँ  तुम  समझते क्यूँ नही/7/

हँस  पड़ा है  मन  स्वयं के देख कर हालात बस
कितना  मैं  बेबस  बशर हूँ तुम समझते क्यूँ नही/8/

रखता हूँ  जिंदा जरूरत  ख्वाहिशों को मार कर
मैं  दुखों की  रह गुजर हूँ  तुम समझते क्यूँ नही /9/

हर दिन नये बवाल से आगे न बढ़ सका

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हर  दिन   नये  बवाल  से    आगे  न  बढ़ सका
चुभते  से   कुछ  सवाल  से  आगे  न  बढ़ सका/1/

जद्दोजहद  में      गुजरी  है     यूँ  जिंदगी  मगर 
दिल  रंजो  गम   मलाल  से  आगे  न बढ़ सका/2/

तन्हाईयों     का      खौफ़    सताता    रहा सदा 
कुछ  फिक्र  कुछ खयाल  से  आगे न बढ़ सका/3/

रस्मन   उन्होंने    पूछ  लिया   हाल चाल  फिर
दिल  उनके  इस  सवाल से  आगे  न बढ़ सका/4/

उनको भी  हमसे  इश्क   हुआ   या   नही जरा
दिल  बस  इसी  खयाल  से  आगे  न  बढ़ सका/5/

छोड़ा  झिझक  न  मैंने  भी  वो भी न खुल सके
रिश्ता  बस  हाल चाल  से   आगे   न  बढ़ सका/6/

कोशिश बहुत की उसने तो पास आने की मगर
मैं ही  किसी  भी  हाल  से  आगे  न  बढ़  सका/7/

मसला  भी  हल किया गया सिक्का उछाल पर
तकदीर   इस  कमाल से    आगे  न  बढ़  सका/8/

कल  तितलियों को  देख  मेरा मन  मचल गया
बचपन  मेरा   ज़िहाल से   आगे   न  बढ़ सका/9/

औकात    मेरी     रोज़   दिखाती   है   जिंदगी
मैं  गम के  देख भाल  से   आगे   न  बढ़ सका/10/

खुशियाँ   दिखीं   करीब  तो आंसू  छलक पड़े
और  मैं   चमकते  गाल  से  आगे न बढ़ सका/11/

मकसद कोई हो ठोस ज़रीआ कोई तो हो

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मकसद  कोई हो  ठोस  ज़रीआ  कोई तो हो
आंखों में  जीने  वास्ते   सपना   कोई  तो हो/1/

रिश्तों की  यूँ तो  भीड़ है  पर  नाम के हैं बस 
परवाह  करने वाला  इक अपना  कोई तो हो/2/

चुटकी  बजाते  हाल  बदल  जाए  दफ्अतन
ऐसा भी    जिंदगी में    करिश्मा   कोई तो हो/3/

जद्दोजहद  में     रोज़      गुजरती है  जिंदगी
कुछ पल ही इत्मिनान का किस्सा कोई तो हो/4/

मजमा   लगाए   बैठी  है   उलझन  कतार में 
हद से   खराब  वक़्त में   अच्छा  कोई तो हो/5/

जी  चाहता है   दुख कोई   अब मुल्तवी न हो
रक्खे  संभाल    पहलू में   ऐसा    कोई तो हो/6/

आंखों ने  अब तो   छोड़  दिया ख्वाब देखना
पहले  जो  देखे  उनमें  ही   पूरा  कोई  तो हो/7/

किरदार  जिसका  सबसे  अहम है  कहानी में
उसका भी कुछ तो जिक्र हो  चर्चा कोई तो हो/8/

तेरा  खयाल     रखने को     मेरा    खयाल है 
मेरा  खयाल   रखने  को    मेरा   कोई  तो हो/9/

उतार लाओ अब ऊँची दुकान का सूरज

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उतार  लाइये     ऊँची   दुकान    का    सूरज
बुझा बुझा है  जरा       आसमान  का  सूरज/1/

गली  मुहल्ले  का  छप्पर  मचान  का  सूरज
कभी  दिखा  दो  हमें  भी  बिहान  का सूरज /2/

लिहाफ़ ओढ़ के  दुबका  पड़ा है  बिस्तर पर
ठिठुरता कांपता डिजिटल  जहान का सूरज/3/

समेट  करके    उजाले     यतीम    बस्ती के
मचल  रहा है    बड़े    खानदान  का  सूरज/4/

कतारें  देख  के   कातर   निगाहों के  बाहर
सहम  गया  है  बहुत    आस्तान  का सूरज/5/

उदासियाँ   जहाँ   पसरी    हुई  है   सीने में
उगेगा  कैसे   वहाँ   इत्मिनान    का  सूरज/6/

दिया  तले का  अंधेरा   मिटा  न   पाया तो
है फालतू ही समझ  स्वाभिमान  का सूरज/7/

कसौटियों के तपन में  झुलस के बूझ गया
लुभावना  था  बहुत   हुक्मरान  का सूरज/8/

महोत्सवों में  जरा   व्यस्त  चल रहा करके
थका थका सा  दिखा  संविधान का सूरज/9/

किसी के प्यार ने दी वर्जिनिटी की कुर्बानी
दिखाया वक़्त ने जब इम्तिहान का सूरज/10/

मुहब्बतों  की  जरूरत है खूब दुनिया को
परे ही रक्खो  अभी खींच तान का सूरज/11/

बरस  रही है  मेरे  सर पे  नेमतें  हर पल
है  मेरे  साथ में  माँ के अमान का सूरज/12/

दिल को उम्मीद थी कल आज से बेहतर होगा

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दिल को उम्मीद थी  कल आज से बेहतर होगा
पर  न   मालूम  था    इतना  बुरा   मंजर  होगा/1/

अब  मेरे  नाम से   कतराने  लगीं  हैं   खुशियाँ
इससे  बद   और  भला  किसका मुकद्दर होगा/2/

हमने  देखें  हैं     तेरे  नाज़  अदा    नखरे  तेरे
जिंदगी  तुझपे   फिदा  अब  न   कलंदर होगा/3/

कुछ  तो   हालात  बुरे हैं  ये  खबर  थी हमको
पर  न  मालूम था   हर  हाथ  में  पत्थर  होगा/4/

सारे  इल्ज़ाम  अपने  सर  पे रख  लिया हमने
अब न तोहमत कोई  तकदीर के सर पर होगा/5/

साल के  आखिरी लम्हें  में  किया फोन उसने
उम्र भर   याद  हमें    अब  ये    दिसंबर होगा/6/

कोई देता है अगर  दिल से  मुहब्बत से अगर
कागजी  फूल  भी   महकेगा   मुअत्तर  होगा/7/

फिक्र को  फक्र हो  कुछ ऐसा करो जीवन में
इससे बढ़िया भला क्या कोई भी जौहर होगा/8/

पेकिंग नयी है माल पुराना है दोस्तों

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पेकिंग  नयी  है       माल  पुराना  है     दोस्तों
लगता   नया    ये   साल    पुराना  है    दोस्तों/1/

है   भूख     बेबसी     वही        बेचारगी  वही
हर  आदमी    का  हाल       पुराना  है  दोस्तों/2/

बदला  कहाँ है  कुछ भी    कलेंडर सिवा यहाँ
हर  मोड़  पर      बवाल     पुराना  है   दोस्तों/3/

रोगन चढ़ा के दिन को नया कर लिया तो क्या
मालिक   तो   दिन दयाल    पुराना  है  दोस्तों/4/

नफरत  संभाल   रक्खा है   सीने में  हर कोई
सुर  ही   नया है       ताल    पुराना है  दोस्तों/5/

टेस्टिंग  करा  के  देख  लो इंसानियत की भी
निग्टिविटी     बहाल     पुराना    है     दोस्तों/6/

कब  तक  करें  यूँ  सब्र  समय के बदलने का
संघर्ष    का      सवाल      पुराना  है   दोस्तों/7

जारी  है  उम्र  का  तो  मुसलसल सफर यहाँ
ख्वाहिश  का  हर  मलाल  पुराना  है  दोस्तों/8/

है  कौन    मुतमईन  यहाँ    अपने  नसीब से
हर  दिल  का  ये  ख़िसाल  पुराना  है दोस्तों/9/

कोशिश  तो  है नया ही कहें कुछ यहाँ मगर
हर  फिक्र   हर  खयाल    पुराना  है  दोस्तों/10/

ख़िसाल - स्वभाव

फिर छपी ताजा खबर है देखिए अखबार में

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फिर छपी   ताजा खबर है     देखिए अखबार में
फिर रहे हैं     बरहना  कितने    बदन  बाजार में/1/

मुल्क में   हावी है बस  उत्सव   मनाने का जुनून 
रंजो गम की   फिक्र करता   कौन है   त्योहार में/2/

दाम  उतने  भी  नही         इंसानियत  के हैं गिरे
जितनी किल्लत पड़ गई है अपनों के व्यवहार में /3/

खुद को अब  मैं भी  समझने  हूँ लगा  इंसान सा
कर लिया   मैने भी  कुछ   रद्दोबदल  किरदार में/4/

गर्म  कमरों  में    हितैषी     लड़  रहे    मेरे लिए
सर्दियाँ   मेरी        गुजरती     कागजी अंगार में/5/

बे जुबानों  के लिए भी   कुछ तो   हमदर्दी रखो
देते हैं    ये भी  दुआएँ     आंखों से   इज़हार में/6/

देख   बच्चे  को   खिलौना   बेचते  ऐसा  लगा
स्वप्न  अपने  बेचता     जैसे  कोई     बाजार में/7/

छल का  साया  ना पड़े  तो  प्रेम सुंदर है बहुत
हो  किसी भी  रूप  चाहे  हो किसी आकार में/8/

जी रहा कोई अभी तक  कोई जी के जा चुका
सब पे  आता है  बुरा कुछ वक़्त इस संसार में/9/

बरहना - नंगा बे लिबास

खुद से खुद का ही बिछड़ना देखना था

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खुद  से  खुद  का  ही  बिछड़ना  देखना था
जिंदगी  में      और  क्या क्या     देखना था/1/

जीने   खातिर       चल रही    जद्दोजहद में
मुझको  बस  इक  शख्स  जिंदा  देखना था/2/

खुद  पे  था  मुझको  यकीं  पूरा  ही लेकिन
बस   मुझे       तेरा    भरोसा     देखना था/3/

जानना  था  गर   किसी का  हाले-दिल तो
पोस्ट   मोबाइल  पर    उसका   देखना था/4/

हम   अचानक    मिल गये   जो  रास्ते  पर
तुमको    उनका    मुस्कुराना   देखना  था/5/

सोचना  था     करने से   पहले     मुहब्बत
जेब   भारी  है   कि  हल्का       देखना था/6/

जिंदगी   वाकिफ  हैं    तेरी    हर  अदा से
हमको  तो   बस  तेरा  लहज़ा  देखना था/7/

मसअले   सारे   सुलझ  सकते थे  लेकिन
जिम्मेदारों   को         तमाशा  देखना  था/8/

ख्वाब  हसरत  इश्क  उम्मीद और वफाई
और  बता   ऐ उम्र   क्या क्या  देखना था/9/

रह गई   दिल में  दबी   दिल  की  तमन्ना
बस  हमें   इक  रोज़   अच्छा  देखना था/10/

आज फिर से खुद को समझाया है हमने
दिल को बस कुछ आदमी सा देखना था/11/

ठीक है  सब  कह रही थी फोन पर जब
तब  किसी को  माँ का चेहरा देखना था/12/

सुख से जीने की चिंता में सब्र गवाएं फिरते हैं

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सुख  से    जीने  की    चिंता  में,     सब्र  गवाएं   फिरते हैं। 
दुख अपना   खुद अपने से   अब,    लोग  छिपाए फिरते हैं।। /1/

क्या अच्छा है क्या अनुचित है,  खूब  सरल है ये कहना। 
मसला   होने तक   पहले  सब,    दोष  दबाए  फिरते हैं।। /2/

मोल  नही   जिनका   होता है,   वो  ही   होते हैं  अनमोल। 
और  उन्हें  हम  नादानी में ,      व्यर्थ    लुटाए  फिरते हैं।। /3/

ठोकर  पे   ठोकर   लगती  है,   हमको  तो    हर बार यहाँ।
क्यूँ   हर दिन   पत्थर   हमसे    पहचान  छिपाए फिरते हैं।। /4/

तारीखें   लौट  आती  हैं  पर,   दिन   वापस  नही  आते हैं। 
कुछ   लम्हों  खातिर    जीवन  भर,   बस  बौराए फिरते हैं।। /5/

हम  पे भरोसा मत करना तुम,     करते हैं खुद से धोखा। 
चेहरे  पर    अक्सर    झूठी,    मुस्कान   सजाए  फिरते।। हैं/6/

ना  कोई   चिंगारी  दिखती ,  कहाँ  धुआँ  सा  उठता है। 
अचरज है  फिर   कैसे  यहाँ  कुछ, आग  लगाए फिरते हैं।। /7/

रक्खा है   थोड़ा सा  बचा कर ,  तुझको  अपने  किस्से में। 
किस्से  के   उस  हिस्से  में ,    खुद को  भरमाए फिरते हैं।। /8/

जंग छिड़े जब  अपनों से तो,    हारना  पड़ता है  खुद को। 
पेचीदगी   ये  रिश्तों की,     दिल  को   समझाए  फिरते हैं।। /9/

किसको सुनाए अब दुखड़ा हम, कौन सुनेगा इस दिल की। 
हमको   समझने   वाले  ही,  हम को   समझाए  फिरते हैं।। /10/

वक़्त नही  अब  पास किसी के, बे मतलब की  बातों का। 
मतलब  से   मतलब  की  बातें,   बस   बतियाए  फिरते हैं।। /11/

जीने के वास्ते जरिया नही मांगा करते

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जीने  के   वास्ते   जरिया   नही   मांगा    करते
रब से  हम अब  कोई  तोहफा नही मांगा करते/1/

करके  बे दख्ल  मुझे  मुझमें  ही वो काबिज है
उसपे  अहसान      किराया  नही  मांगा  करते/2/

बख्श दे  जिंदगी  अब  बंद  सितम  कर अपने
रोज़   हम  तुझसे    तमाशा   नही  मांगा करते/3/

बात  रखने  का  सलीका  भी  जरूरी है  बहुत 
उम्मती   कोई    नजरिया    नही   मांगा  करते/4/

इतने   बेबाक   खयालात     नही  अच्छे  यहाँ
इल्म  तहज़ीब  अदब  क्या  नही  मांगा  करते/5/

अक्स  दिखलाते  हैं     किरदार  छिपा  लेते हैं 
आईने शख्स  का   ब्यौरा    नही  मांगा  करते/6/

चांद और फूल पे ही लिख के जियादा खुश हैं
अब  सुखनवर   कोई  मुद्दा  नही  मांगा  करते/7/

लफ्ज़ बोला गया टूटा यकीं और गुजरा समय 
वापसी  का  कोई   रस्ता   नही    मांगा  करते/8/

उम्मती - किसी धर्म के अनुयायी

थोड़ा दिल को संभाल लूँ पहले

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थोड़ा  दिल को  संभाल लूँ पहले 
खुद के  भीतर   खंगाल लूँ पहले/1/

फिर  मैं    औरों  के   ऐब  ढूँढुंगा
अपनी  कमियाँ निकाल लूँ पहले/2/

जीस्त   अहसास   में  पिरोने को
खूबसूरत     खयाल    लूँ  पहले/3/

वक़्त सबका ही जब मुअय्यन है
क्यूँ  मैं  सर  पे  बवाल लूँ  पहले/4/

जिंदगी    दांव  पर     लगानी है
एक   सिक्का  उछाल  लूँ पहले/5/

रोज़  दम  तोड़ती  उम्मीदें नयी
और  कितने  मलाल  लूँ  पहले/6/

फिर मरम्मत  करेंगे  ख्वाबों की
थोड़े  आंसू    उबाल  लूँ  पहले/7/

जीस्त  तू  भी  सफाई दे अपनी
तेरे  भी  कुछ  सवाल  लूँ पहले/8/

जिस तरह जिंदगी की चाहत है
वैसे  ही खुद को ढाल लूँ पहले/9/

मत सोंचो भीतर से कैसे निकलेंगे

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मत  सोंचो     भीतर  से      कैसे   निकलेंगे
अच्छों  के   सब  यार  भी  अच्छे  निकलेंगे/1/

ऊपर  से  जो     कड़वे  कड़वे      लगते हैं 
भीतर  से  वो     बिल्कुल    मीठे  निकलेंगे/2/

गुमसुम   खोये  खोये   से   जो    दिखते हैं 
उनके  मन   में   झांको    बच्चे    निकलेंगे/3/

तुम मुश्किल लिखते जाओ और मैं मंजिल
ऐसी   ही   कोशिश   से     रस्ते   निकलेंगे/4/

भीड़   बहुत  है   उम्मीदों  की  इस   घर में
रोज़   नये  नये    से          खर्चे  निकलेंगे/5/

बात  बढ़े   इससे  बेहतर  है    थम  जाओ
दूर  तलक   वरना  फिर  किस्से  निकलेंगे/6/

फिर  से   त्योहारों  का   मौसम   आया है
अरमानों  के       पूर्जे़  पूर्जे़        निकलेंगे/7/

राम  लगे   आसान  सभी  को   दुनिया में
राम  पे   ही  बस      सारे  चर्चे   निकलेंगे/8/

मैं  ही  बस  क्यूँ  लक्ष्य सभी का बनता हूँ
कुछ  ना  कुछ  तो  दोष सभी में निकलेंगे/9/

ख्वाहिशें उम्मीद हसरत आरज़ू भरमार है

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ख्वाहिशें    उम्मीद   हसरत    आरज़ू    भरमार है
एक पल  में    प्यार है    तो   एक पल  तकरार है/1/

गुनगुना  कर   देख लो   इक बार  फुर्सत से कभी
जिंदगी     बेहद   सुरीली      सुमधुर     झंकार है/2/

कशमकश   जद्दोजहद से   पार   चल कर देखिये
जिंदगी      उपहार      लेकर    हर घड़ी  तैयार है/3/

आसमाँ से   चांद तारों से         उतर  कर  देखिये
मसअले   कुछ तो   जमीं पर  भी    नये  तैयार हैं/4/

बोझ  जिम्मेदारियों  को    मत  समझिएगा  कभी
रब करे   जिसपे  भरोसा    बस  वही   हकदार है/5/

चल रहा था ठीक ही फिल्हाल सब कुछ जीस्त में
आ गया  फिर  सुब्ह का  देखो  नया  अखबार है/6/

भूख से  उकता के कल जो शहर भागा था मियां
आज  फिर दौड़ा  वो   गांवों की  तरफ लाचार है/7/

बेबसी      चिंताएं      जिम्मेदारियाँ     लाचारगी
आदमी  को    तीन  आभूषण   मिले  उपहार है /8/

ग़ज़्ल  सारी  ढह गयी  बस एक मतला रह गया 
पूर्जे़ पूर्जे़   हो  गये   अब   सारे  ही  अशआर हैं /9/

अब  हुनर  चाहे  न  रखती हो कलमकारी मगर
आज  मिलती  हर  कलमकारी के घर में कार है/10/

हर एक शख्स से पूछा खुशी के बारे में

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हर एक   शख्स से    पूछा   खुशी  के  बारे में
बता   न   पाया    कोई   अजनबी  के  बारे में/1/

कहा   सभी ने    जरा  आगे   बस  जरा  आगे
खबर   किसी  को  न  थी  जिंदगी  के  बारे में/2/

लगा  हुआ  है  व्यवस्था में कल की परसों की
जिसे   पता  ही  नही  आज अभी  के  बारे में/3/

बिका है  रोज़ पिता कतरा कतरा घर के लिए
भनक   न   लगने  दिया   पर कमी के बारे में/4/

घड़ी घड़ी   नया   चेहरा   बदल के फिरता है 
कहें  तो  क्या  कहें  कमबख्त  जी के बारे मे/5/

किया है सबने ही धुन सुन के वाह वाह मगर
किसी  ने   पूछा  नही      बांसुरी  के  बारे में/6/

असल के  राह भटकने की   वज्ह से साहिब
है  आजकल   बड़ा  चर्चा   डमी  के  बारे में/7/

ये  नेट जाल  मोबाइल  की नस्ल  क्या जाने
सहजता    सादगी   के    बंदगी   के  बारे में/8/

बिखेर  देती है   खुश्बू     गुजारे   लम्हों की
कहूँ  मैं क्या  भला  अब   गैलरी  के बारे में/9/

कहाँ दिन गुजारा कहाँ रात गुजरी

122 122 122 122 
कहाँ  दिन  गुजारा   कहाँ  रात गुजरी
किसे है  खबर  कब ये बरसात गुजरी/1/

गई  जिंदगी  भी गुजर  हमको  जी के
लिये  बैठे  हम   रह गए   बात गुजरी/2/

है बेमोल  उस वक़्त का  लम्हा लम्हा
वो थी  जिंदगी   जो तेरे साथ  गुजरी/3/

बहुत  थक  गये     ढोते ढोते  अंधेरा
नजर से  उजालों की  सौगात  गुजरी/4/

तरसती कई  जिंदगी खुशियों खातिर
कहीं  फिर से  देखो है  बारात गुजरी/5/

बहाली  हो  रिश्ता  उसी की  गली से
जिगर चाहता  फिर  वही बात गुजरी/6/

नसीबों  से  हम  चोट  खाए हैं वरना
थी  ऊँचे  घरानों में   औकात  गुजरी/7/

सवेरे की  चौखट पे  फिर से खड़ी है 
अमानत  उजालों  की ले रात गुजरी/8/

तसल्लियों के हवाले यकीं जरा कर दे

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तसल्लियों    के  हवाले    यकीं    जरा  कर दे 
उलाहनों  को   अभी     जह्न से   बिदा  कर दे/1/

बहुत  महीन  है   कच्ची  है     डोर  रिश्तों की
जरा सी   चूक     न   कमजोर   राब्ता  कर दे/2/

संभल संभल के कदम रख मुहब्बतों की गली 
कहीं  न  वक़्त  कोई  फिर  से  हादसा  कर दे/3/

नजर से  हो के  जिगर तक  बना  तू राह नयी
खयाल  ख्वाब  में  आ कर के रतजगा कर दे/4/

मुसीबतें  भी   बहुत  हैं    मुहब्बतों  की डगर
जरा  ये  भेद   नवागत  को    इत्तिला  कर दे/5/

दिये  में   तेल  नही  होगा   बुझ  गया  होगा
हवा पे   दोष   फकत   बंद   थोपना   कर दे/6/

उदासियों  पे  सवाल उठने अब लगे हैं बहुत
मुझे  तू  हँसता  हुआ  इक  नकाब ला कर दे/7/

बदल न सकता हूँ  सबके हिसाब से खुद को
ऐ जीस्त  कैसे  जियें  तुझको मशवरा कर दे/8/

उदासियों की मैं दिल से दुहाई दूँ तुझको

1212 1122 1212 22 
उदासियों   की  मैं  दिल से   दुहाई  दूँ   तुझको
बता अब अश्क   मैं  कैसे  रिहाई   दूँ    तुझको/1/

तमाशे   रोज़   नये  करके   खुश   हुई है बहुत
ऐ  जिंदगी    बता   कैसे    बधाई   दूँ   तुझको/2/

तमन्ना है    कि  लिखे    दर्द  वो    कलम मेरा
कि   हर्फ़ हर्फ़ से    बस  मैं   सुनाई  दूँ तुझको/3/

ये आरज़ू है   कि  इक  दौर  आए  ऐसा कभी
तू   मेरी  जिन्दगी    जी   मैं   दवाई दूँ तुझको/4/

जरा तो   बख्श दे  मुझमें  कोई  हुनर  या रब
कि  भीड़ भाड़ में  कुछ तो  दिखाई दूँ तुझको/5/
 
कुसूर  कुछ  तो  है  हसरत  का  भी तबाही में 
नसीब   इसके  लिए   क्यूँ   बुराई  दूँ  तुझको/6/

तमाम  उम्र    नही    मोह    छूटता  है   कोई
जरा सी  बात पे  क्यूँ  जग हँसाई  दूँ  तुझको/7/

तेरी  गली से    गुजरते  हुए    खयाल आया
कि  दौरे हाल  की  खातिर बधाई  दूँ तुझको/8/

ऐ जिंदगी जरा आसान खुद को कर ले कभी
कभी तो  जिंदगी बन मिल मिठाई दूँ तुझको/9/

सियाह रात ये किसने दिये जलाए हैं

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सियाह रात   ये   किसने    दिये    जलाए है
मुझे   बुलाने को   घर तक   उजाले आए हैं/1/

खमोशियों   के  शहर   कौन   गुनगुनाता है 
है  कौन  जिसने  ये  सहरा में फूल उगाए हैं/2/

उम्मीद  किसने  बंधाई  रंगीनियों  की  यहाँ
ये किसकी वज्ह से गुलशन भी मुस्कुराए हैं/3/

खुशामदीद है उसका  कि  वज्ह से जिसके
बहार  खुश्बू  के   मंजर   यूँ   लौट  आए हैं/4/

अंधेरा  भागा है  खुद को  समेट कर फौरन
गली  मुहल्लों  में   जब  दीप  जगमगाए हैं/5/

रिश्ते बिगड़ते बनते हैं औकात देखकर

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रिश्ते    बिगड़ते    बनते  हैं  औकात देखकर
होती है   नातेदारियाँ    भी     जात  देख कर/1/

आंसू     तमन्ना  ख्वाब तलब    आरजू खुशी 
बाजार  सजते हैं    बड़े     जज्बात देख कर/2/

करते  नही  हैं   अब  कभी   फरमाइशें नयी 
बच्चे    सयाने   हो  गये    हालात  देख कर/3/

मत कर  बखान  यार  तू  अपनी  उड़ान का
अंजाम  दिख रहा  तेरी  शुरूआत  देख कर/4/

गिरहें  तमाम  खुल गईं  खुलते ही इक सिरा
मन फिर दुखी है गुजरे वो लमहात देख कर/5/

जद्दोजहद   हर  एक  कदम  सांस सांस की
मन  हो गया है  खिन्न  ये दिन रात देख कर/6/

धिक्कारते  चढ़ावे हैं  मंदिर के खुद को अब
बाहर  कतारें   भूखी सी  इफ़रात   देख कर/7/

हर पल बदलती रहती है  सुर अपने जिंदगी
मत कर गुरूर खुशियों के नगमात देख कर/8/

जरा सा काम था लेकिन न हो सका मुझसे

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जरा सा  काम  था लेकिन  न  हो सका मुझसे
तुम्हारा  दर्द     संभाला     नही   गया   मुझसे /1/

कि  सेव  करने  के  चक्कर  में  जल्दबाजी में 
तुम्हारे  फोन  का  नंबर  डिलीट  हुआ  मुझसे/2/

तुम्हारे  बाद  यूँ  कोशिश न की कभी फिर भी 
तुम्हारे  बाद   न   रिश्ता   बना   नया   मुझसे/3/

तेरी दुआओं में क्या अब तलक शरिक हैं हम 
गज़ब है  उनका  अभी  तक  ये पूछना मुझसे/4/

तमाम   घर   का  ही   दारोमदार   था  मुझपे 
किसी  ने   शहर  से   आने  नही कहा मुझसे/5/

था  मेरे  सर  पे   बड़ा  बोझ   जिम्मेदारी  का
रहा  है   दूर    बहुत    मेरा   बचपना   मुझसे/6/

बिचारी  रात  को  कस कर  के  भींच मुट्ठी में 
नया  सा  ख्वाब   निचोड़ा  नही  गया मुझसे/7/

कल  इक  दिये को सहारा दिया था हाथों का
कि  अब तलक  हैं हवाएँ खफ़ा खफ़ा मुझसे/8/

अब  आए कौन सी आफत खुदा ही खैर करे 
बेइंतहा   ही  वो  हँस हँस के  है मिला मुझसे/9/

सभी ने कदम दर कदम आजमाया

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सभी  ने    कदम  दर  कदम आजमाया
न   मैंने  वफ़ा  का  सिला फिर भी पाया/1/

सलीके  से     शिद्दत से   परखा सभी ने
तरस  जिंदगी ने   भी   हरगिज़ न खाया/2/

फ़कत  वो  खयालों में आया  है अक्सर 
हकीकत   में  तो  वो  कभी आ न पाया/3/

सितमगर   तेरा  हर   सितम   है  गवारा
मगर   इश्क  तुझको   निभाना न आया/4/

तमाशा   सी  है   जिंदगी    की  कहानी
न  समझा है  अब तक  नही जान पाया/5/

ज़रुरत ने  भटकाया है  मुझको जी भर 
कभी   शाम  लौटा    कभी  रात  आया/6/

न  बेचा    कभी    मैंने     ईमान अपना
उसूलों   के   कारण  सदा  मात  खाया/7/

न   देखे   गये     हमसे    आंसू  बहाते
वो  रिश्ते   जिन्हें  हमने आंखों बिठाया/8/

जनाजे  निकलते हैं  ख्वाबों के अक्सर
तमन्ना  को   अपनी   सदा  ही जलाया/9/

हवादिस   मसाइब   फ़कत  रोज के हैं
नया  क्या हुआ  जो  ये बदलाव आया/10/

शहर  का   शहर  ही   दिवाना हुआ है
सही क्या गलत क्या समझ मै न पाया/11/

अदावत  भी  हमसे मुहब्बत भी हमसे
रवायत   ये  रिश्तों के  हमने  निभाया/12/

नमुना   नया   रोज   दिखता   यहाँ हैं 
सियासत में  ये  मरहला  भी है  आया/13/

लगी जो तलब है अजब खूब शोहरत 
बुझी  प्यास  कब है  कहाँ  चैन  पाया/14/

अपनी मर्ज़ी से भला कौन भटकता है यहाँ

2122 1122 1122 22 
अपनी  मर्ज़ी से  भला  कौन  भटकता है यहाँ 
वक़्त के हाथ  हर इक शख्स खिलौना है यहाँ/1/

कल  जो  हालात  थे हैं आज भी हालात वही
बस कलैंडर के सिवा कुछ नही बदला है यहाँ/2/

हमसे   मत  पूछिये   इस  जिंदगी  के  बारे में
अजनबी  सा  ये  मिला  हमसे हमेशा है यहाँ/3/

उम्र भर  चांद से  इक  शख्स की  बातें की हैं
किस  कदर देखिए  वो चांद भी तन्हा है यहाँ/4/

बे सबब   रोज़   मुलाकात   जरूरी  थी क्या
फासले  दरमियाँ  जितने रखो अच्छा है यहाँ/5/

रह गयी  जिंदगी  इक मिसरे पे ताउम्र उलझ
आदमी  काश अगर में ही तो अटका है यहाँ/6/

सुन के  अब  जिक्र  तेरा  बात  बदल  देते हैं
लोग  हैरत में  है  ये   देख के  चर्चा  है  यहाँ/7/

अपनी  रफ्तार पे  इतरा   न  जियादा  इतना
जिंदगी  सांस के दम पर  तेरा रूतबा है यहाँ/8/

कोई चिथड़ों से ढके जाता है इज्जत अपनी 
होने  मशहूर   कोई   हो  गया   नंगा है यहाँ/9/

कद्र  किरदार  की   होती  है  हमेशा  वरना 
कद  में  इंसान  से  साया बड़ा देखा है यहाँ/10/

बड़ी अजीब सी उलझन है क्या किया जाए

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बड़ी  अजीब  सी   उलझन  है   क्या  किया जाये
दिल अपने  आप का  दुश्मन है  क्या  किया जाए/1/

उदासियाँ   तो       लिपटती   चिपकती   रहतीं हैं 
खुशी के  साथ  में  अनबन  है  क्या  किया  जाए/2/

कुसूर  क्या  है   हमें    कुछ   खबर   नही  हमसे
खफ़ा खफ़ा सा  हर इक मन है  क्या किया जाए/3/

यूँ  कोशिशें  तो   बहुत  की   निभाने  की  सबसे
वो  फिर  भी  हारा है निर्धन है  क्या किया जाए/4/

कहीं  कहीं    दिखी    नाराजगी    सी  रिश्तों में 
उन्हें पसंद  जो  खन खन  है  क्या  किया जाए/5/

पकी  कहानी   नयी  फिर   से   ठंडे  चूल्हे पर
उदास  उदास   सा   बर्तन  है  क्या किया जाए/6/

पराई  कहते  सुना  बेटियों  को  जब  भी कभी
बहुत  दुखी  हुआ  आंगन  है  क्या किया जाए/7/

तुम्हें  तो  देखना है बस  मुझे ही छिप के मगर 
मुझे  तो  देखना   हर  फ़न है क्या किया जाए/8/

खिलौने  देख के  फिर से मचल उठा है जिगर 
अभी भी मुझमें वो बचपन है क्या किया जाए/9/

गिरह में  बांध  वो  देती है  हिचकियाँ  अपनी
मेरी  वो  माँ  मेरी धड़कन है क्या किया जाए/10/

दिखा  न  पाया  है  चेहरे के  पीछे  का चेहरा 
पशेमां  खूब  वो  दर्पन  है   क्या  किया जाए/11/

मैं चांद फूल पे खुश्बू पे शे'र कैसे लिखूँ

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मैं  चांद  फूल पे  खुश्बू पे  शे'र  कैसे लिखूँ
मैं तितलियों पे या जुगनू पे शे'र कैसे लिखूँ/1/

कदम कदम पे  बिलखते  यतीम बच्चों को 
भला मैं  देख के  जादू पे  शे'र  कैसे  लिखूँ/2/

भरा है जब के हर इक मन उदासी पसरी है
मैं मौज मस्ती पे  याहू पे   शे'र   कैसे लिखूँ/3/

नही है  गांव में  मकतब  या  कोई  चारागर
हरम के  दैर के  पहलू  पे  शे'र  कैसे लिखूँ/4/

खफ़ा खफ़ा  सा  लगे है  वजूद  मुझसे मेरा
मैं अपने  किस्से पे आंसू पे शे'र कैसे लिखूँ/5/

है  दर्द फूलों को कांटो से जब बिछड़ने का
मैं खिदमतों के सियह रू पे शे'र कैसे लिखूँ/6/

खयाल  रखने में  नाकाम  हो  रहा  जब मैं
गुलाब  ख्वाब  पे  गेसू  पे  शे'र  कैसे लिखूँ /7/

बदल के भेष   चुराई  गई  हो  सीता  जहाँ
मैं  स्वर्ण हिरनो पे  साधू पे  शे'र कैसे लिखूँ/8/

बस अपने  वास्ते  जीते  जहाँ  हैं लोग वहाँ
भला  मैं  सूर्य पे  शम्भू पे  शे'र  कैसे लिखूँ/9/

कलम  ही  ढूंढती हो  कद्र दान जब अपने 
मैं  कुर्सियों  पे  कृपालु  पे  शे'र कैसे लिखूँ/10/

सुखनवरी    है   मेरी  जात   आईना  हूँ  मैं
किसी  भी  एक ही बिंदू पे  शे'र कैसे लिखूँ/11/

सरल सरस है सहज है भाषा हमारी हिन्दी

12122 12122 12122 
सरल  सरस  है    सहज  है   भाषा   हमारी  हिन्दी
समेटे    अहसास     बेतहाशा      है    प्यारी हिन्दी/1/

है  एक   उपवन   की भांति   मेरा   ये   देश भारत
महक  रही  है    यूँ   बन के   खुश्बू   दुलारी हिन्दी/2/

कदम  कदम   पर   बदल   रही   थोड़ी   वेशभूषा 
तमाम   भाषाओं   की   है   जननी    हमारी हिन्दी/3/

हुई   प्रताड़ित   स्वयं के   घर  में  ही खूब हर दिन
कपूत   अपने   ही   हैं   करे   क्या   दुखारी हिन्दी/4/

विदेशी  भाषा    दिलाती    सम्मान    कार  बंगला
न   दे   सकी   ठीक से   दिहाड़ी   बिचारी   हिन्दी/5/

सिमट  गयी   कागजों  में   बस  बन के राजभाषा
कवियों  की   लेखकों  की   ताकत   करारी हिन्दी/6/

हिमायती   इसका   पिछड़ा   कहलाया   है हमेशा 
बनी है  कितनों  की    आसमाँ  तक सवारी हिन्दी/7/

दिली  खरासों  के    द्वेष  नफरत  के   दौर  में भी
दिलो   को    है   जोड़ने  की  भाषा नियारी हिन्दी/8/

है   खूब    जद्दोजहद      हैं     दुश्वारियांँ   परस्पर 
कहानियों  की    है   गुदगुदाती       पिटारी हिन्दी/9/

किसी  नजरिये से   कम नही   आंकिये  इसे अब
न जाने अब तक है कितनी किस्मत संवारी हिन्दी/10/

जिंदगी इस तर्ह मुस्काए जरूरी तो नही

2122 2122 2122 212 

जिंदगी    इस  तर्ह      मुस्काए    जरूरी तो नही
हंसते  गाते  ही     गुजर  जाए    जरूरी  तो नही/1/

मुश्किलों  के  साथ     इसका     है  पुराना राब्ता
रात  ना  हो  दिन  ही  दिन  आए जरूरी तो नही/2/

उम्र भर का साथ मिल पाना तो मुश्किल है बहुत 
अब  वफा  हर वक़्त  मिल जाए जरूरी तो नही/3/

रात  दिन  में  ही  बदल  जाते हैं रिश्ते आजकल
जिंदगी  भर   को   निभा   जाए  जरूरी तो नही/4/

दर्द  अपना  दर ब दर    गाना  नही  अच्छा जरा
हर  समय  पर  हँस के  दिखलाएजरूरी तो नही/5/

कब से  आंखों में  समंदर सा है  इक ठहरा हुआ
इस  वजह  भीगी    नजर  आए  जरूरी तो नही/6/

कश्मकश   जद्दोजहद   में    कैसे  होती है बसर
चीख  कर     ये  बात    बतलाए  जरुरी तो नही/7/

आदमी  जिंदा है   गर   तो    दर्द भी   होगा उसे
मुर्दा  कुछ   अहसास  कर  पाए  जरूरी तो नही/8/

जिंदगी और जिंदगानी की मगज़मारी मुई

2122 2122 2122 212 
जिंदगी   और    जिंदगानी, की    मगज़मारी मुई।
खो गईं    इनमे  उलझ,   मासूमियत    सारी मुई।। /1/

कब  तलक  नादानियाँ  हों, कब से जिम्मेदारियाँ। 
करते हैं    हालात  तय,    सारी    अदाकारी  मुई।। /2/

जिंदगी के  दाम इतने,   गिर गए  कुछ  गम नही। 
मौत की   बढ़ती  हुई,   कीमत  है    दुश्वारी मुई।। /3/

बढ़  गयी हैं  दरमियाँ,  ये दूरियाँ  कुछ इस कदर।
रह  गयीं हैं  अब तो  बस,  रिश्तों में लाचारी मुई।। /4/

धर्म  मजहब  जातियाँ, उस वक़्त जाती हैं कहाँ।
होती    चारागर  में है  जब,    रक्त  दरकारी मुई।। /5/

मत  भरोसा  कर खुशी का,  मुस्कुराना सीख ले।
अब नही  मिलती   कहीं पर, भी  वफादारी मुई।। /6/

आईना   मुझको  मेरे  कद, के बराबर ना मिला।
ऐब  थे   मेरे  ही    भीतर,  में    कई   भारी मुई।। /7/

मोड़ कर घुटनों को,  सोने की है आदत सी मेरी।
कर न पाती मुझको,  शर्मिंदा ये गम ख्वारी मुई।। /8/

न आए संसार में फिर ईश्वर

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न   आए   संसार में    फिर ईश्वर
दिखे   न   लाचार में   फिर ईश्वर/1/

दुआओं में   कुछ  असर  रहा ना
है   मस्त   दरबार में   फिर ईश्वर/2/

भटक   गये   रास्ता   हैं   शायद
जो   ढूंढते   प्यार  में  फिर ईश्वर/3/

मचल   रही है    तमन्ना    बेबस
है  मौन   अखबार में फिर ईश्वर/4/

न  आस  उम्मीद  रह  गयी अब
मिले  न  सरकार  में  फिर ईश्वर/5/

हैं  ढूंढते    पत्थरों  में    उसको
मिले हैं   स्वीकार में  फिर ईश्वर/6/

गरीब  का   पेट  भरने  खातिर
बिके  हैं  बाजार में   फिर ईश्वर/7/

यकीं का विश्वास का है मसला
है मन के आधार में फिर ईश्वर/8/

यकीं  नही है   अगर  जरा तो
न  ढूंढ  बेकार  में  फिर  ईश्वर/9/

पेट भरे हो तब ही तो ये मजहब सारे दिखते हैं

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पेट भरे हो   तब  ही  तो  ये  मजहब   सारे  दिखते हैं 
भूखे को  कब   मंदिर मस्जिद  और  नज़ारे दिखते हैं /1/

करती है  ये  भूख तमाशे   जीवन में  कितने हर दिन 
करतब   करते   चौराहों  में    कुछ   बेचारे  दिखते हैं/2/

मुफलिसों की  झोंपड़ियों में  खिड़की कोई नही होती 
पैबंदों में   छिपते   बस    तकदीर के   मारे  दिखते हैं/3/

टखने  छाती से    चिपका कर    सो  जाते हैं   बेचारे 
मांस  नही है   अस्थि पंजर  जिस्म के  सारे दिखते हैं/4/

अश्क उबाले  माँ ने   रात भर  खाली से   पतीले पर 
भूख   के  मारे    बेसुध  बच्चे     हारे हारे    दिखते हैं/5/

सरकारों ने  जनता को   बस   वादों से    बहलाया है 
वोटों   खातिर   गली गली  ये   हाथ पसारे  दिखते हैं/6/

बाप के कांधो पर चढ़ कर तो दुनिया अच्छी लगती है
सच्चाई  से   जब  मिलते  हैं   दिन में   तारे  दिखते हैं/7/

दुल्हन सी   सज धज  कर   बैठीं  हैं  जरूरतें  घर में
आरज़ू   हसरत   और  उम्मीदें   चीर कुंवारे दिखते हैं/8/

चेहरे  कई   लगा   रक्खे हैं   सबने   अपने  चेहरे पर
जाहिर है  जोकर  के  बाकी   छिपते  सारे  दिखते हैं/9/

कौन मुकम्मल  है इस जग में  किसमें कोई दोष नही
सब में  ही है  कुछ ना कुछ पर खास हमारे दिखते हैं/10/

चल रही है अजब सी हवा आजकल

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चल रही है अजब सी हवा आजकल
बे असर हो गई सब  दुआ आजकल/1/

घर के आंगन से बूढा शजर जो गया
चूभने  सी   लगी है   सबा आजकल/2/

हसरतें  बस    सुलगती  रहीं उम्र भर
है  जरूरी  जरूरत   जरा आजकल/3/

खत्म  होता  नही  जिंदगी का सफर 
आदमी  बस मुसाफिर बना आजकल/4/

वक़्त के साथ  भर तो  गये जख्म पर
दिख रहा दाग सा क्यूँ भला आजकल/5/

रस्म सी  रह  गई हैं ये  खुशियाँ सभी
अब न  बाहम  रहा  राब्ता आजकल/6/

दरमियाँ घर के  दीवार  की जो खड़ी
अब है भाई  पडोसी  नया आजकल/7/

माँ ने दी सीख   रोटी के  बंटवारे की
बांट बेटों ने  मां को  लिया आजकल/8/

आईना  कल  दिखाया  उसे  वक़्त ने
वो है  उलझा हुआ सा जरा आजकल/9/

आस जिनसे थी कल रहबरी की हमें
बन के बैठे हैं  वो तो खुदा आजकल/10/

भूख   रोटी    पे   चर्चे  चुनावों में है
है यहाँ फिर ये मसला खड़ा आजकल/11/

है  फसादों  की जड़ में  ये  दैरो हरम
आदमीयत   न   मुद्दा  रहा आजकल/12/

उम्र भर खुद को बस अखबार है किया हमने

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उम्र भर खुद को बस अख़बार है  किया हमने 
अपनी  हस्ती  का  इश्तेहार   है  किया  हमने/1/

जिंदगी  खेलती  है   खेल  धूप छांव   के बस 
खुशियाँ  बेचीं  है  ये  व्यापार है  किया हमने/2/

हसरतें ख्वाहिशें  उम्मीद  हैं  सिसकती मिली 
खुद को कुछ ऐसे भी लाचार है  किया  हमने/3/

अश्क  दिन रात  टपकते हैं  छप्परों  से मियांँ 
हारने  से  तो    पर इंकार   है    किया  हमने/4/

छत  को  थामा है    दरकती  हुई   दिवारों ने
दरमियाँ खुद को भी  दीवार है  किया  हमने/5/

बात ये  और  है  हम कुछ  समझ नही  पाये
देर तक  जीस्त का   दीदार   है किया  हमने/6/

जख्म के  टांके  पुराने थे  खुल गये  फिर से 
खुद को दुख सहने को तैयार है किया हमने/7/

बे सबब  बे मजा  बे लुत्फ़  बस  गुजरती है 
जिंदगी  के लिए  किरदार  है  किया   हमने/8/

बस इस हिसाब से ही जिंदगी ये चलती रही

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बस इस  हिसाब से ही  जिंदगी ये चलती रही 
जरुरतों  पे  ही  ख्वाहिश सदा फिसलती रही/1/

कि रफ्ता रफ्ता फकत कारवाँ भी चलता रहा 
यूँ   हौले हौले   दबे  पांव   उम्र    ढलती रही/2/

हकीम   बैद    कोई    काम   ही   नही  आए 
था मर्ज और  दवा और कुछ ही  मिलती रही/3/

करे  हैं   शोर     रसोई में      भूखे   बर्तन भी
फिर इक कहानी नई घर में आज पलती रही /4/

इमारतें    मेरे    हिस्से  की   धूप   लील  गईं
उजाले  देख  के  बस  जिंदगी  मचलती रही /5/

पढ़ी  नही है  मगर  तर्जुबा  है  माँ को  बहुत 
हुनर से अपने  वो दुख  हर्ष में  बदलती रही/6/

वो  गुजरे पल  ने  दिया  बे हिसाब  दर्द हमें 
भुला के कल को जरा जिंदगी संभलती रही /7/

खिलखिलाती मचलती रसीली ग़ज़ल

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खिलखिलाती    मचलती      रसीली ग़ज़ल
खो  गई   अब  कहाँ        गुदगुदाती ग़ज़ल /1/

दरमियाँ   हादसों   के       बसर   कर  रही
आंसूओं   में    नहायी    सिसकती   ग़ज़ल/2/

चल  रही    आजकल        खूब  बाजार में
चूभती    तल्ख़ सी    और     तीखी  ग़ज़ल/3/

हसरतों  और   तकाजो  में   उलझी  दिखी 
रोटियों   से   न   बढ़   आगे   पायी  ग़ज़ल/4/

गांव  भी   तो     बदल   हैं   गये   शहर में
अब   कहाँ     ढूंढने     जायें   देशी ग़ज़ल/5/

फूल   खुशबू  चमन   ख्वाब  जुगनू  गगन
अब  कहाँ  चांद  तारों   पे    बनती  ग़ज़ल/6/

चल   रही  है    उलटफेर   शब्दों   की बस
अब   किसी के   गले  ना   उतरती  ग़ज़ल/7/

बस   रवायत    निभाती   रही    हर समय
दिल से दिल की कभी कह न पायी ग़ज़ल/8/

दायरों  में      नजरियों  में      सिमटी हुई
आ रही  आजकल    हल्की हल्की ग़ज़ल/9/

मन  को  भाये      दे  पैगाम    सौहार्द का
अब  दिखाई   न  देती   वो  अच्छी ग़ज़ल/10/

एक   मिसरे   पे   आकर  अटक   सी गई
होते-होते      मुकम्मल     अधूरी   ग़ज़ल/11/

कह  रहा  जी में  जिसके   जो आया वही
हो गयी    इस कदर   आज  सस्ती ग़ज़ल/12/

दायरों  में      नजरियों  में      सिमटी हुई
आ रही  आजकल   हल्की हल्की  ग़ज़ल/13

रह गई   कैद  होकर      किताबों  में  बस
जिनको कहती हैं दुनिया ये अच्छी ग़ज़ल/14/

कैसा ये दौर कैसे यहाँ यार हो गये

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कैसा  ये   दौर    कैसे   यहाँ   यार   हो गये 
अच्छे  भले   भी    देखिए   बीमार  हो गये /1/

बदली हुई  हवाओं  का  लगता  है ये असर 
बच्चो के  बे अदब    सभी  संस्कार  हो गये /2/

अम्नो अमां थे कल जहाँ खुशियाँ बहार थी 
दहशत ही अब  तो मुल्क के  मेयार हो गये /3/

नफरत भरी हुई है  यहाँ  दिल मे आजकल 
हर बात पर   फसाद के    आसार   हो गये/4/

मजलूम  की यहाँ पे हिफाज़त करेगा कौन
जिम्मे था  जिनके सर पे वो  बेकार हो गये/5/

चेहरे जो  खिलखिलाते थे  मायूस  हैं दिखे 
जब से  ही  घर के  बीच में  दीवार  हो गये /6/

माँ बाप  एक कोने में  दुबके  मिले  हैं अब 
बेटे के  भी  तो  अब  नये  परिवार  हो गये/7/

होली   दिवाली   ईद  रवायत  लगे हैं अब 
मंहगे  ही  सारे आजकल  त्योहार  हो गये/8/

आने ही वाली है कोई  शामत यहाँ पे अब
तब  बदले बदले  से  मेरे  सरकार  हो गय/9/

करता रहा  सितम  वो  बड़े  ही  मजे मजे 
शिकवा किया  जो हमने गुनहगार हो गये/10/

न चैन राहत सुकूं है सुर्खी की शख्सियत में

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न  चैन   राहत  सुकूं है   सुर्खी  की   शख्सियत में
महक   पसीने  की है   जमीनी  की  शख्सियत में/1/

जरा जरा  सी  बचा  के  रक्खी है  हमने अब तक
निशानियाँ   अपने  गांव   मिट्टी की  शख्सियत में/2/

है  कांधो  पर  मुल्क की हिफाज़त की जिम्मेदारी 
यकीं है  मेरे  वतन को      वर्दी की  शख्सियत में/3/

जो  जिंदगी  कर चुकी  मशक्कत है   भूख से वो
न  जायका  ढूंढती है      रोटी  की  शख्सियत में/4/

बस आदतन    पी  रहा  लहू    आम आदमी का
न जाने क्या खासियत है खादी की शख्सियत में/5/

हवाओं  के  रुख पे  चल रही  जिंदगी  है सबकी
नही  कोई  अहमियत  है  मर्ज़ी की शख्सियत में/6/

तनाव से   मुश्किलें  ही   लेतीं  हैं   जन्म फिर से
मिले  समाधान  खुशमिजाजी  की शख्सियत में/7/

स्वतंत्रता   के  तो  अर्थ   बस  आप  उनसे  पूछो
किया हो जिसने बसर  गुलामी की शख्सियत में/8/

उमीद  मत  छोड़ना   कभी  मन  से   जीतने की
सफलता मिलती है हौसलों ही की शख्सियत में/9/

है  उसकी  मौजूदगी  तो निश्छल सरल हृदय में 
तलाश  मत कर  उसे  तू  मुर्ति की शख्सियत में/10/

दिल की बात सभी से कहना ठीक नही

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दिल की बात  सभी से कहना  ठीक नही
ज्यादा   होना    सीधा  सच्चा  ठीक नही/1/

आंखे  चुगली   कर   देतीं हैं   अक्सर ही
बे मतलब  बे वक़्त में  हँसना  ठीक नही/2/

झांक  नही   पाता है   अपने   भीतर जो
शख्स  वही  कहता है  दुनिया ठीक नही/3/

अपनी  गलती  को    छिपाने की खातिर
दूसरों  पर  इल्ज़ाम   लगाना  ठीक नही/4/

खुद से भी   बनती  नही है   जब अपनी
औरों से  करना फिर  शिकवा ठीक नही/5/

यार मिले  बस एक मिले  वफादार मिले 
बे मतलब   ही भीड़  बढ़ाना   ठीक नही/6/

उलझन  तो  सबके  ही  हिस्से  आती है
उलझन में खुद को उलझाना ठीक नही/7/

याद  आएंगे  हम तो  फिर  पछताओगे
जिन्दगी  तेरा  इतना  नखरा  ठीक नही/8/

बेहतर है  खुद  कृष्ण  सरीखे यार बनो
यारों  में  तुम   ढूंढो  कान्हा  ठीक नही/9/

कि चिंदी चिंदी दिलों के जज्बात हो रहे हैं

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कि   चिंदी चिंदी   दिलों के    जज्बात   हो   रहे हैं 
ये    बिखरी  सी    हसरतों पे    जुल्मात  हो रहें हैं /1/

जमाने में    अब  तो    सारे  मंजर    लगे  हैं  झूठे 
पहन    मुखौटे      सभी     मुलाकात    हो  रहें हैं /2/

खयालो  की   रह गयी  हरारत  है  बस   जरा सी 
जो  वक़्त    बे वक़्त   के    करामात     हो रहें हैं /3/

फिसल  गयीं  ख्वाहिशें  सुराखों से  जेब की सब
जरूरतों   के   तो   बस    शिकायात   हो  रहें हैं /4/

डरा  नही  मौत से  जो   बच्चों से   डर   गया वो 
कि  आंखों आंखों से   बस   सवालात  हो रहे हैं /5/

हर  एक  पन्ना  पलटते  सिसकी  निकल  रही है 
यूँ   उधड़े उधड़े   से   सब   खयालात  हो रहे हैं /6/

दरार   रिश्तों के  दरमियाँ   आ गयी   क्यूँ इतनी
जो   एक   घर  चार  अब    मकानात  हो रहें हैं /7/

ये जात मजहब ये  ज़र ये शोहरत है राएगाँ सब
बस  इनकी  ही  वज्ह से   फसादात  हो   रहें हैं /8/

आदमी हो के जो इंसान नही हो सकता

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आदमी  हो के  जो   इंसान    नही   हो  सकता
बदनसीब  उससे  कोई  जान  नही  हो  सकता/1/

ज़र्रे ज़र्रे   की   ख़बर   रहती है    ईश्वर  को मेरे
मेरी   हालत से    वो   अंजान  नही  हो सकता/2/

कुछ न कुछ खामियाँ तो हर ही जगह मिलतीं हैं 
अब  मुकम्मल  तो हर इमकान नही हो सकता/3/

वक़्त के  हादसों  से   डर  जो  गया  जीवन में
वो   किसी  तौर भी   सुल्तान   नही हो सकता/4/

जह्न में  जिनके   बसी   मौका परस्ती  है  यहाँ
वो  कभी  मुल्क पे   कुर्बान   नही  हो  सकता/5/

हमने  घबरा के   वहीं   फेर ली  आंखे अपनी
तुझसे ज्यादा  कोई दिल जान नही हो सकता/6/

वो मेरी  जिन्दगी का  आखिरी  नुकसान  रहा
उससे  बढ़कर  कोई नुकसान नही हो सकता/7/

चंद लफ्जों में सिमट जाए मुहब्बत का सफर 
मुख्तसर  इतना तो  दीवान  नही  हो  सकता/8/

मिज़ाज इस जिंदगी का भी खफ़ा होने नही देता

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मिजाज इस  जिंदगी  का  भी  खफ़ा  होने  नही देता 
कभी  हालात    रिश्तों से     जुदा   होने    नही  देता/1/

छिपा   रहता है    मुझमें    और  भी  मेरे  सिवा कोई  
जो  मुझको  भी  कभी  तुझसे   जुदा  होने नही देता/2/

मैं अक्सर जीत कर भी उस समय फिर हार जाता हूँ
वो खुद जब  हार कर  मुझको  फना  होने नही देता/3/

इशारे  ना    दिलासे  ना    कोई   वादा  नही लेकिन 
यूँ   राहें   ताकना   दिल   को  शिफ़ा होने नही देता/4/

सुकूनो  चैन  राहत  भी   कहाँ  आते  सभी  के हक
नसीब अपना   हमें  इनका   सगा    होने  नही देता/5/

भरी बरसात में भी प्यास  इस दिल की न बुझ पायी
सितमगर  अपनी   रहमत  से  रिहा  होने  नही देता /6/

हुए अल्फाज़ सब खामोश और अशआर सब बेबस
कोई  वो  दर्द    क्यूँ  मेरा   अता   होने   नही   देता/7/

दिल अगर कमजोर है अखबार मत देखा करो

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दिल  अगर  कमजोर है  बीमार  मत देखा करो 
जेब खाली है तो  फिर  बाजार  मत  देखा करो/1/

हक अगर जमहूरियत का कर न पाए तुम अदा
किसकी बनती है कहां  सरकार  मत देखा करो/2/

सिर्फ  ये देखो   पड़ोसी  कोई   भूखा  तो  नही 
जात  मजहब  और घराना  यार मत देखा करो/3/

चाहते  हो   चैन से   जीना  अगर   ये  जिन्दगी
मशविरा  है  न्यूज चैनल  यार  मत  देखा करो/4/

मुल्क में अम्नो अमां कायम मुसलसल बस रहे
कौन  कैसा  है  कहाँ  किरदार  मत देखा करो/5/

भूखे  और  मासूम  बच्चों  की  छपी तस्वीर है 
गर न हो बर्दाश्त तो  अखबार  मत देखा करो/6/

महोत्सवों के इतर कभी देखता नही है

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महोत्सवों    से   इतर     कभी      देखता   नही है
नजर में  हाकिम के   तो समस्या जरा        नही है /1/

बस आकड़ों  के ही  फेर में  उलझी है   सियासत 
गुजरती   कैसे  है    राहों में          जानता नही है/2/

मैं    कैसे  फहराऊँ    अपने  घर  में    कहो तिरंगा
कुछ अपने घर का ही जब कि मुझको पता नही है/3/

चराग   लाखों   जलाए   तुमने    उजालों  खातिर
मगर     चरागों    तले     उजाला    हुआ   नही है/4/

हुनर  भी  कुछ  चाहिए   पिरोने  का  मोतियों को
बस  आंसूओ  का  पलक  पे  होना  बड़ा  नही है/5/

गुजर  रही है   कभी  खुशी में   कभी  ये   गम में 
है   जिंदगी   बेवफा  सी        पर  बेवफा  नही है/6

रफू   किये   जा   रहा   उदासी   मैं   जिंदगी  की
कहाँ से  फिर   जाने  रिस रहा  थम  रहा  नही है/7/

लगे हैं  अब   झांकने     दिवारों   के   पार  रिश्ते 
दरार    गारा  भी     भरने  से  छिप  रहा  नही है/8/

मोबाइलों  में  सिमट के  बस  रह गया है  जीवन
किसी  को  परवाह  अब  किसी की जरा नही है/9/

क्या गजब हालात है भई वाह वा क्या बात है

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क्या गजब  हालात हैं  भई  वाह  वा क्या बात है 
उलझनें  इफ़रात है  भई    वाह वा  क्या  बात है /1/

कट  रही है  जिंदगी   हर दिन    तमाशे  कर नये /2/
सांसे भी   खैरात हैं   भई   वाह वा   क्या बात है
 
कुछ  जरुरत  के लिए  नीलाम   हर दिन   हो रहे 
बस  दिली जज्बात हैं  भई  वाह वा  क्या बात है/3/

ख्वाहिशों की अर्थियाँ हर दिन निकलती है यहाँ 
टुकड़ों में  औकात हैं भई  वाह वा  क्या  बात है/4/

रोज ही  चेहरे  बदल कर  मिलने  आती है  हमें 
कैसे  ये आफ़ात हैं  भई  वाह वा    क्या बात है/5/

खौफ़ तर  मंजर दिखे  हर हाथ ही  खंजर दिखे 
सब लगाए घात हैं     भई  वाह वा  क्या बात है/6/

हर जुबाँ  खामोश है   कुछ  बोलता  कोई  नही 
कैसे  ये दिन रात हैं  भई  वाह वा  क्या  बात है/7/

जागते  रातें  हैं   बीती    खोये खोये  सारा दिन 
उलझे से  लमहात हैं भई  वाह वा  क्या बात है/8/

भीड़ सी  रहती है  यूँ  तो  रिश्ते नातों  की यहाँ 
खिलवतें  सौगात हैं  भई  वाह वा  क्या बात है/9/

अब तो नफरत की दुकानों को हटाओ लोगों

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अब तो  नफरत की, दुकानों को  हटाओ लोगों। 
इक  मुहब्बत  का दिया, फिर से  जलाओ लोगों।। /1/

अब तो   बच्चे  भी,  सिहरते हैं  धमाके सुन कर।
अब  न   बारूद   कहीं,   और    उगाओ  लोगों।। /2/

मान   तहज़ीब अदब,  का भी  जरा सा रख लो।
अपने   मे'आर   को,   इतना  न   गिराओ लोगों।। /3/

अजनबी   चंद  घड़ी  में,   जो   बना  जाए हमें। 
ऐसे    लम्हों  को    जरा,    दूर  भगाओ  लोगों।। /4/

फिर से महका दो चमन, फूल खिला उल्फत के। 
फ़ाख़्ता  अम्न  के,    दो  चार    उड़ाओ  लोगों।। /5/

खामखाँ   झूठे  लिहाज़ो  से,   हो  परहेज़ जरा ।
इतना  ईमान  तो,   किरदार  में   लाओ  लोगों।। /6/

मसअले   खत्म  करो,   दैरो हरम  के   जल्दी।
फिर  हुनर  अपने  नये,  और  दिखाओ लोगों।। /7/

सबको होना है पुराना,  यहाँ इक ना इक दिन।
आज को इतनी नसीहत,  तो सिखाओ लोगों।। /8/

फिक्र हालात की अब, मुझको सताने है लगी।
ऊँचे  लोगों  में  मुझे,  फिर  न बिठाओ लोगों।। /9/

सफर की ठोकरें राहों की धूल पकड़ेगा

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सफर  की  ठोकरें,   राहों की   धूल  पकड़ेगा। 
दिल आज बैठ के, सब  अपनी भूल पकड़ेगा।। /1/

शिकम की आग से, परेशान  हो गया हो जो। 
कहाँ  तलक  वो,   बताओ   उसूल  पकड़ेगा।। /2/

महोत्सवों  का  अभी,   दौर  चल रहा है यहाँ। 
अभी  न  मसअला, कोई  भी  तूल पकड़ेगा।। /3/

बता रहा है  डिजिटल,   जो  मुल्क  को  मेरे। 
वो  कैसे   झोपड़ी, पत्थर,  बबूल,  पकड़ेगा।। /4/

न कुछ बदलना है,  अब  शोर भी  मचाने से। 
मुखालफत  का  तू रस्ता,  फिजूल पकड़ेगा।। /5/

उमीद  पाल के  बैठा,  हुआ  है  जो दिल में। 
शिकायतों  से  गुजर,  मन  मलूल पकड़ेगा ।। /6/

बगैर  सोच समझ , कर ही चल पड़ा है जो। 
वो दर ब दर में भटक, अपने चूल पकड़ेगा।। /7/

पहन के  धूप  बदन, अपने चल रहा है जो। 
वही  तुम्हारे  महोत्सव,  में  फूल  पकड़ेगा।। /8/

मलाल  कैसे  मैं  तेरे,  हवाले  कर दूंँ  बता। 
तू  बात बात पर,  अपने ही  रूल पकड़ेगा।। /9/

न भूख रोटी की बात कर तू अधीर होकर

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न  भूख  रोटी  की  बात  कर  तू  अधीर होकर
तू  देखता  रह   फकत  तमाशा   लकीर होकर/1/

अभी है   अमृत महोत्सवों  का  समय वतन में
न  डाल  तू  विघ्न   जश्न  में   यूँ  हक़ीर होकर/2/

है  व्यर्थ  बेकल  तू  फिक्र  सय्यास  को है तेरी
न  बह  यूँ  जज्बात में अकारण ही वीर होकर/3/

जो  हौसला है  भुजाओं में  ताकना  कहीं क्यूँ
मुकाबला मुश्किलों का अब कर तू धीर होकर/4/

चवन्नियों को   यहाँ   मचे      रोज़  हाय तौबा 
वो  बादशाहत  लिए है  फिरता फकीर होकर/5/

बदल गये  देश प्रेम  के   अब  तो  माने  यारों
चले है  उल्टी दिशा  वो  हर बार   मीर होकर/6/

न  चैन  राहत  सुकूँ के  पल भर  हैं  पास तेरे
भला  कमाया  ही क्या बता तो अमीर होकर/7/

ये  रिश्ते नाते  ये दोस्त यारी   ये दुनिया दारी
तू  सोचना  बैठकर  जरा सा  कबीर   होकर/8/

बात कोई भी हो बे बात नही होती है

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बात   कोई   भी   हो       बे बात    नही होती है
वारदातें   सभी         सौगात     नही     होती है/1/

पांव  रखना  तो  संभल कर के  जमीं पर अपने
हादसों  की  तो  कोई     जात    नही    होती है/2/

मशविरे   देते है    जो  खुद पे अमल करने की
आदमी   जात   की     औकात    नही होती है/3/

अजनबी  बन के  गुजर जाते हैं नजदीक से ही 
उनसे  अब  बरसों      मुलाकात  नही  होती है/4/

दिल बहुत रोता है अब उससे बिछड़ कर यारों 
यूँ  ही  तो आंखों   से   बरसात   नही  होती है /5/

अब  खयालों में  भी  वो  आने  से  कतरातें हैं 
उल्फतें   ऐसी  तो    बदजात     नही  होती है/6/

नजदीकियाँ नही है पर इतना है आज भी

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नजदीकियांँ  नही है     पर इतना  है  आज भी 
दिल का कुछ उनके साथ में रिश्ता है आज भी/1/

होता  नही है    सामना         राहों में   यूँ मगर 
हमको   गुजरते वक़्त   वो तकता है  आज भी/2/

तन्हाइयों  में    बैठ    हमे           सोचता है वो
याने  हमें   वो   दिल से   न भूला है  आज भी/3/

उठ  बैठता  है   रात   यकायक    कभी-कभी 
बेचैन   सोच   हमको  वो    होता है  आज भी/4/

चेहरा    हथेलियों   में    छिपा     मुस्कुराता है 
मतलब वो हमको याद  तो करता है आज भी/5/

हम पर  कभी  गुस्सा तो  कभी  प्यार आता है 
उनको  हमारा  जिक्र  यूँ   भाता है   आज भी/6/

फुर्सत से  जब   कभी भी  हमें  सोचता है  वो 
अपनी  जफाओ  पर  जरा रोता है  आज भी/7/

करतीं हैं  यादें   ज्यादा   परेशान   जब कभी
मिलने की करता दिल में  तमन्ना है आज भी/8/

खौफ़ मंजर है चहुंओर ही दिखता खुश है

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खौफ़  मंजर है   चहुंओर  ही    दिखता   खुश है
जिंदगी   करके     नया    रोज़   तमाशा  खुश है/1/

रोज़    अखबार में      आतीं  हैं      हजारों लाशें
कैसे  कह दूँ    मेरा  ये  मुल्क    जरा सा  खुश है/2/

फिरका वहशत भी  लजाती है खुले तौर पे कुछ
ओढ़ कर     मुल्क परस्ती  का    लबादा खुश है/3/

जानता  है  ये  जहाँ   कितनों  का  संघर्ष  भला
जो  सफल  होता  उसे  देख के  दुनिया  खुश है/4/

क्या  भला  और  भी  बिगड़ेंगा   जियादा इससे
बात  ईमान  की   करके     वो   दिवाना खुश है/5/

जी  बहुत  हल्का हुआ  मैं  से निकल कर बाहर
दिल से  भंगार   हटा कर के   वो  बंदा   खुश है /6/

बच्चा  मुफ़लिस  का नही  दूध के  खातिर रोता
भूख  लगने पे  वो चूस  अपना  अंगूठा  खुश है/7/

मिल गये  अश्क भी  बरसात के  पानी में मियांँ
भीग कर   बारिशों में   खूब   वो  बंदा   खुश है/8/

मसअले  और  न  दिखते हैं सुखनवर को कोई
चांद और फूल पे  वो लिख के जियादा खुश है/9/

खुद को ही  सहना है जब  दर्द शिकायत कैसी  
कह दो दुनिया से नमस्कार सब अच्छा खुश है/10/

बहुत खराब है किस्मत कहूँ तो किससे कहूँ

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बहुत  खराब है  किस्मत  कहूँ  तो  किससे कहूँ
उदास उदास    मुहब्बत    कहूँ  तो किससे कहूँ/1/

सितारों चांद  को   तितली   पतंगों   जुगनू  को 
खिलौना  समझे है गुरबत  कहूँ तो किससे कहूँ/2/

वो  एक   शब्द   नही  है    वो   पूरी   भाषा है
मुझे है  माँ की  जरूरत  कहूँ  तो  किससे कहूँ/3/

फटी  जो  चादरें   आँचल   उढ़ा   दिया उसने
गरीब  माँ  की  इनायत  कहूँ  तो  किससे कहूँ/4/

इन आंसूओ को  तो  रोना  तलक  नही आता
दुखों पे और इक आफत कहूँ तो किससे कहूँ/5/

मिलो  कभी  भी तो  रूतबे  दिखाने  लगते हैं
रईस  यारों  की  आदत  कहूँ  तो किससे कहूँ/6/

है अपने आप में  ही व्यस्त  आजकल दुनिया
है  मेलजोल  रवायत    कहूँ  तो  किससे कहूँ/7/

कफ़न  तो  सबका ही  जबकि सफेद है यारों
दिलों में क्यूँ है ये नफरत कहूँ तो किससे कहूँ/8/

मिले हैं   चोर उचक्के  ही   बस  ये   खादी में
बहुत है ओछी सियासत  कहूँ तो किससे कहूँ/9/

मजाक  मस्ती  हँसी   सब  मुखौटे  हैं  साहब
लगी है गम की मुझे लत कहूँ तो किससे कहूँ/10/

जब पड़ी तुझको जरुरत रक्त की हम आ गये

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जब  पड़ी  तुझको  जरूरत   रक्त की हम आ गये
इक  तेरे   आह्वान  पर   माँ भारती   हम  आ गये/1/

शीश मुंडो  से   कभी   दामन   न  खाली  हो तेरा
एक  की   दरकार  में  दस बीस भी  हम  आ गये/2/

दाग  दामन  पर   न  तेरे   जीते जी  लगने  दिया
बद नजर  तेरी  तरफ  जब भी उठी  हम आ गये/3/

बद गुमानी  के   हर  इक  मंसूबे  को   ही  तोड़ने
और  हलक  से  खीचने  बकवाद ही हम आ गये/4/

फड़फड़ाती  लौ  लगा  कर  हाथ  थामा  है  सदा 
तीरगी  की  राह  पर   थी   रोशनी   हम  आ गये/5/

अब हवा का रूख इधर ही मुड़ गया तो क्या करें
वरना  तूफानों  की  आहट  पाते  ही हम आ गये/6/

मुस्कुरा  कर  तुने  जब  आवाज  दी हम आ गये
इक  बुलावे  पर  तेरे  माँ भारती   हम   आ  गये/7/

ये जिन्दगी की शरारत कहूँ तो किससे कहूँ

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ये  जिन्दगी  की  शरारत    कहूँ  तो  किससे कहूँ
बहुत है   इससे   शिकायत   कहूँ तो किससे कहूँ/1/

जरा सी   बात पे       पानी      बरसने  लगता है
अजब इन आंखों की आदत कहूँ तो किससे कहूँ/2/

तमाम  रिश्ते      मोबाइल  में      कैद     रहते हैं 
किसे है  मिलने की  फुरसत कहूँ तो किससे कहूँ/3/

वो इक  खयाल  न  अब तक   कहा  गया हमसे
जो कहने दिल की है हसरत कहूँ तो किससे कहूँ/4/

करीबियों  में     हम उनके      बताए     जाते हैं
हमी से   उनकी   अदावत   कहूँ तो किससे कहूँ/5/

यूँ  बे सबब   तो  कहीं    तल्ख़ियाँ   नही  आती
दिली  खरासें   मलालत   कहूँ  तो  किससे कहूँ/6/

बदल  दिया है  समय  ने  तो   अच्छे अच्छों को 
तू  मेरी  खास थी  चाहत  कहूँ  तो  किससे कहूँ/7/

बहुत  करीब से       देखा है      दूर   होते  तुम्हे
लगी  जो  चोट  निहायत  कहूँ  तो  किससे कहूँ/8/