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मजा बोलिए क्या है इन नफरतों में
धरा क्या है कुछ भी दिली फासलों में/1/
जहाँ में मुहब्बत लुटाते चलो बस
अजी गौर मत किजिए बातिलों में/2/
उसे ही मिले है सदा रंजो गम ये
सहेजा है रिश्तों को जिसने दिलों में/3/
दिया रब ने फुर्सत से फुर्सत के लम्हे
हर इक आदमी फिर भी है उलझनों में/4/
सरेआम ही लूट सी अब मची है
नही फर्क कुछ शाह और रहजनों में/5/
है गिनती के बेशक मेरे यार लेकिन
पर है खूब जिंदादिली दोस्तों में/6/
वफाओं में मैने कमी कुछ नही की
मुरव्वत उन्होंने न की आंसूओं में/7/
न सह पाओगे दर्द कह कर सितमगर
किया नाम शामिल मेरा बुजदिलों में/8/
जरूरी है दौलत भी जीने के खातिर
नही पेट भरता है बस वायदों में/9/
जहाँ कोई उम्मीद होती नही है
वहाँ भी मुझे रब मिला पत्थरो में/10/
बही जा रही आंखें अम्मा की अविरल
है हलचल बहुत इन दिनों सरहदों में/11/
वही वहशियाना नया क्या हुआ है
बस इक नाम और जुड़ गया है दुखों में/12/
हमी पे बरसने लगे अब वो पत्थर
अता की जिन्हें धड़कनें वलवलों में/13/
है शामिल मेरा भी लहू इस जमीं पर
न गिनती करो तुम मेरी दुश्मनों में/14/
हर इक जिंदगी में बहुत सी है उलझन
रहा कौन बाकी है इन मुश्किलों में/15/
मियां आपकी हुक्मरानी है बेजा
गिना सकते उपलब्धियां उंगलियों में/16/