2122 1212 22
जाने इस शहर को हुआ क्या है
आदमीयत है गुम वजा क्या है
साजिशो का यूं दौर चलता है
भूल ही सब गये दुआ क्या है
खो गयी है ये जिंदगी ऐसे
कुछ खबर ही नही कहा क्या है
जा ब जा देखिए अदावत है
बाहमी रब्त ही रहा क्या है
हर कदम हादसो का मंजर है
खौफ़ दहशत सिवा भला क्या है
मस्त मौला है वो कलंदर है
क्या है परवा कहाँ हुआ क्या है
बेच देते हैं अजमते अपनी
क्या खुमारी है ये नशा क्या है
No comments:
Post a Comment