212 212 212 2
बे वजह यूँ निकलिए न घर से
कुछ डरा किजिए इस कहर से/1/
इक वबा ने मचाया है कोहराम
दुनिया दहशत में है इस खबर से/2/
जा ब जा है गिरी सोच वाले
बचना हमको है ऐसे जहर से/3/
रह गये फिर टंगे खूंटियों पर
कुछ उसूल आजमाईश के डर से/4/
हो गयी है हमे भी मुहब्बत
अब बचाओ हमे बद नजर से/5/
इक दफ़ा हंस के देखा जो उसने
काम से हम गये उस पहर से/6/
रूठने की तमन्ना है खुद से
अब सितमगर हुए बे असर से/7/
अब के बिछड़े लहू ही बहेगा
बह गये अश्क सारे इधर से/8/
इक दरिंदा सभी के है भीतर
कुछ भी कम वो नही जानवर से/9/
है अभी तो बहुत दूर मंजिल
थक गये क्या तुम अपने सफर से/10/
चुक गये हम लकीरों से वरना
हम भी करते वफा मोतबर से/11/
वबा - महामारी/जा ब जा - हर जगह /मोतबर - विश्वास
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