212 212 212 212
देख कर आदमी जी में डर आए तो
क्या कहें ऐसे हालात गर आए तो
किस तरह दिन गुजारें बताओ भला
खौफ़ में नींद ना रात भर आए तो
किस पे कर ले भरोसा कि है राम वो
सब में रावण की सूरत नजर आए तो
क्यूँ न सोती मेरी बदनसीबी की रात
मेरे हिस्से भी कोई सहर आए तो
फायदा कुछ न मरहम से होता है अब
फिर लगाओ नमक जख्म भर आए तो
बोल कर क्यूँ वो रिश्ते बिगाड़े मियां
मौन रह कर जो उनमें निखर आए तो
खूब भटके तेरी याद में रात भर
पूरी खाली मिली राहगुज़र आए तो
चलना उल्फत की राहों में बेहद संभल
हाथ मलते गये जो इधर आए तो
अब नजरिए ही छपते हैं अखबार में
कैसे पहचाने कोई खबर आए तो
मंदिरों मस्जिदों में तो रब ना मिला
ढूंढ लो मैकदे अब नजर आए तो
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