1222 1222 1222
दिखावा बंदगी अच्छी नही लगती
ये झूठी जिंदगी अच्छी नही लगती
नही आता फरेबी चाल ये हमको
किसी को सादगी अच्छी नही लगती
हैं डूबी अब तलक बस्ती अंधेरों में
सभी को रोशनी अच्छी नही लगती
बहे है झोपड़ी में तर ब तर आंसू
उन्हे अब खुदखुशी अच्छी नहीँ लगती
बड़ा कद हो गया है दोस्तों का अब
हमारी दोस्ती अच्छी नही लगती
बदल देते हैं रस्ता देखकर हमको
अब उनकी बेरूखी अच्छी नही लगती
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