Monday, 28 December 2020

फिरदौस की राहों में शरर देख रहा हूँ

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फिरदौस   की   राहों  में   शरर   देख  रहा हूँ
शैतानी    गुनाहों    का   कहर   देख   रहा हूँ /१/

खैरात भी  अब  मिलने  लगे  देख  के चेहरा
आवाक  मैं   आबिद  का  हुनर  देख  रहा हूँ/२/

रहती  है  जहाँ  खुश्बू  ही  बस  वो हैं लुटाती
मैं   बेटियों   की   ऊंची   डगर   देख  रहा हूँ/३/

परवाह   नही   जान  की  बस  पैसे  कमाने
यूँ  उलझे   हुए    सारे   बशर    देख  रहा हूँ/४/

इक  ओर   लदी   रेशमी   इक ओर से नंगी
दुनिया  के  मै  ये  दोहरे   मिरर  देख रहा हूँ/५/

लंबी है  ये फेहरिस्त बहुत शिकवे गिलों की
मैं  मौन   की   आहों  का असर देख रहा हूँ/६/

पर  लगते  परिंदे  तो  चले  अपने  सफर में
खालिक की छलकती सी  नजर देख रहा हूँ/७/

परछाई   तलक   छोड़    चली  देख अंधेरा
बुनियाद  के  हिलने  का  कहर  देख रहा हूँ/८/

मुंह  मोड़ने  के वास्ते सब  इतना तकल्लुफ़
वाजिब  से  बहाने   की  डगर  देख  रहा हूँ/९/

तस्वीर  से  करने  लगे  हैं  बातें  मियां  अब 
खामोश  हैं  लब  सारे   जिधर  देख रहा हूँ/१०/

बस अपने सिवा सबको समझती है ये मुर्दा
दुनिया  का  मै  ये  जोशे हुनर  देख  रहा हूँ/११/

मुद्दत  से  भरम  पाले   हुए  जी रहा  था मैं
मुझको  नही  था  देखना  पर  देख  रहा हूँ/१२/

फिरदौस - जन्नत
शरर - अंगारे
इबलीस - शैतान
खैरात - भीख
आबिद - इबादत करने वाले
मिरर - आइना
खालिक - निर्माण कर्ता
तकल्लुफ़ - औपचारिकता शिष्टाचार

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