Sunday, 13 April 2025

बिखरे हालात पे कहते थे कोई बात नही

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बिखरे हालात  पे कहते  थे  कोई  बात  नही 
हर  ख़ुराफ़ात पे   कहते  थे  कोई  बात नही /1/

अब जरा बात पे  अक्सर  वो बिफर जाते हैं 
कल जो हर बात पे  कहते थे कोई बात नही/2/

उन  खयालों ने ही  अब नींदें  उड़ा  रक्खी हैं
जिन  खयालात पे  कहते थे  कोई बात नही/3/

दो घड़ी खुद के लिए जी नही पाए जो कभी 
उधड़े  जज्बात पे  कहते थे  कोई  बात नही/4/

रह गये  खुद ही अकेले  वो  निभाते  सबसे
जो हर अगलात पे कहते थे  कोई बात नही/5/

हमें  उस वक़्त पे  अफसोस  रहेगा  हरदम 
जिनके लमहात पे  कहते थे कोई बात नही/6/

सुनते हैं वो भी दुखी ही हैं बिछड़ कर हमसे
जो कि शुरुआत में कहते थे कोई बात नही/7/

Saturday, 12 April 2025

जहालत जह्न में सबके भरी है

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जहालत  जह्न  में      सबके  भरी  है
फकत   हैवानियत    सबमें  दिखी है /1/

यूँ कहने   भर को   ही  है आदमी वो 
पर उसकी  हरकतों से   जग दुखी है /2/

पहुँच   बेशक   गया है   चांद पर  वो 
मगर  काबिल   जमीं  के  भी नही है/3/

जरा  रह जाएगा ही  कुछ न कुछ तो
सभी  कुछ  खत्म   तो  होता नही है/4/

बड़ा मन कर रहा  मिलने को खुद से
मुझे  मेरी      बहुत   याद आ रही है/5/

संभल तो जाऊँ मैं किसके लिए पर
समस्या  तो   संभल कर ही खड़ी है /6/

पुराने  ज़ख़्म     ताजा  हो रहे  फिर
वही आहट है  फिर  दस्तक  वही है/7/

समय के साथ बदला है बहुत कुछ
मेरा  नंबर  मगर  अब तक  वही है/8/

कोई दर्द है न सुकून है आज सुर्खियाँ और कुछ नही

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कोई   दर्द है  न  सुकून है       आज  सुर्खियाँ  और  कुछ नही
बड़ी  बे मज़ा  सी  है  जिंदगी  क्या है  दरमियाँ  और कुछ नही/1/

न  ही  दोस्त है  न  रकीब है         न  ही  प्यार है  न  नसीब है
यूँ  ही  बन  गयी है  दिलों में     बाहमी  दूरियाँ  और कुछ नही/2/

वो  लरज  उठे  मेरा  नाम  सुन   खिले फूल सी मुझे सोच कर
यही  चंद  हसीन  खयाल  हैं     मेरी  मर्ज़ियाँ  और  कुछ नही/3/

मेरी  हसरतों  की   किताब  में    तेरा  जिक्र   बार  ही  बार है
मेरी  फिक्र  में  तू  शरीक  है  मेरी  हिचकियाँ  और  कुछ नही/4/

तेरे  बाद  मुझसे  ही  अब  मुझे    नही रह गया है लगाव कुछ
तुझे  जी  रहा  ये  कुसूर है      मेरी  गलतियाँ  और  कुछ नही/5/

करो  सब्र  या  कि  बदल  ही दो    न तो छोड़ दो ये विकल्प हैं
ये है हल  किसी भी समस्या का  नयी  चाबियाँ और कुछ नही/6/

हो  कहीं  सुकून  की  जो  जगह  वहीं  अब चलो चलें जिंदगी
तू  हुई  है  तंग   कदम कदम   पे   कहानियाँ  और  कुछ नही/7/

तू  खयाल  है  मेरा  आखिरी      तू  सवाल  है  मेरा  आखिरी
मेरी  जिन्दगी  की  गुमानियों  में     गवाहियाँ  और  कुछ नही/8/

लगे  हर कदम  हमें  मौत सी     कोई  हादसा था  गुजर गया
ले  गया  वो  सारी ही  रौनकें    दे  उदासियाँ  और  कुछ नही/9/

जो  न  चीखता  न  कराहता  उसे  मत  समझिए  नही है दुख
पी गया है  दर्द वो घोल कर   मिली  किर्चियाँ  और  कुछ नही/10/

मैं संभल तो जाऊँ मगर बता है संभलना अब मुझे किस लिए
उन्हे  चुभती  हैं  खमोशियाँ    मेरी  खामियाँ  और  कुछ  नही/11/

सारे  दोष  खुद पे ही  मढ़ लिए   किसी से मुझे न गिला कोई
सभी हैं भले  मुझे  छोड़ कर   ये हैं झलकियाँ और कुछ नही/12/

मेरा खयाल था उनके खयाल में हूँ मैं

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मेरा  खयाल  था    उनके          खयाल में हूँ मैं
मगर  खयाल  नही  था             सवाल में हूँ मैं /1/

शिकायतों  की     बड़ी  लंबी     फेहरिस्त लिए
मिले हैं  जब  भी  न  पूछा  किस हाल  में  हूँ मैं /2/

भुगतने पड़ते हैं कर्मों के फल तो भीष्म को भी
कुछ  इस तरह  के ही  अब तो मिसाल में हूँ मैं /3/

समय   बिताने   कभी    याद  कर    वो लेते हैं
मेरा  वहम था             बहुत  देखभाल में हूँ मैं /4/

किसी ने  जैसे  पकड़ ली हो उनकी चोरी कोई 
वो  सकपकाए  हैं  बैठे            मलाल में हूँ मैं /5/

कभी  अजीज     कभी  दिल फरेब  लगती है
ये  जिन्दगी  है  कमाल और    कमाल में हूँ मैं /6/

विधर्मियों  के  लिए  धर्म  इक  बवाल  है बस
यही  है  ठीक  अगर  तो         बवाल में हूँ मैं /7/

जो  मुस्कुरा  रहा मतलब नही कि ठीक है वो
तुम्हारी  सोच  मगर          मस्त हाल में हूँ मैं /8/

कोई खुशी तो घड़ी भर कभी मिले दाता

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कोई  खुशी  तो   घड़ी  भर   कभी मिले दाता
कभी  तो  चेहरे  पे     मुस्कान सी  दिखे दाता/1/

तसल्लियों  के  सहारे    गुजर  करें  कब तक 
कोई  तो  वज्ह    हमें  जीने  की   तू  दे  दाता/2/

बहुत  उदास  है  मन  खुद  से हैं निराश बहुत 
समझ  न  पा  रहा है  अब कि क्या करे दाता/3/

मैं  कर्म हीन  हूँ   तो  तू  है  जिम्मेदार इसका
स्वभाव   तूने  ही  तो   बख्शा  है  मुझे  दाता/4/

भरा भरा  जो  हो  मन तो कलम ये चलती है
भरा  था  पेट    तो  अहसास   खो गये दाता/5/

बहुत  है  फर्क   जरूरत  में  और  जरूरी में
रखा  गया  न    हमें  बस   जरूरी  में  दाता/6/

है  खास  लोगों से    पहचान  तो  हमारी भी
ये खास  लोग    किसी  के   नही  सगे दाता/7/

प्रयागराज  भ्रमण  के  लिए  न  जाए   कोई
है  आस्था  के   हमारे    ये   केन्द्र में    दाता/8/

जन आस्था के विषय पर करें न तर्क वितर्क
विशेष  ज्ञानियों  को    थोड़ी  बुद्धि  दे दाता/9/

दीपक जला के शम्स दिखाने के बावजूद

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दीपक  जला  के  शम्स  दिखाने के   बावजूद 
काली  घनेरी  रात           छिपाने के  बावजूद /1/

बीमार   सी    तमन्ना      दवा    माँगती   फिरें 
गाने   तरक्कियों   के   यूँ    गाने के  बावजूद /2/

सबको   गुजारनी    तो   पड़ेगी  ही    जिंदगी
हँसने   हँसाने    रोने   रूलाने     के  बावजूद /3/

खामोश हूँ    जहाँ से      वहाँ से     पढ़ो मुझे
हँसना    मेरा   हुनर है    रूलाने के  बावजूद /4/

इक  उम्र ही    गुजर  गयी    लौटे  नही मगर
वादे   जो   कर गये हैं   न  आने के  बावजूद /5/

संघर्ष  और  शिकायतें  होती  कभी  न खत्म
होती है  खत्म    जिंदगी    छाने के  बावजूद /6/

तू  भी  ऐ जिंदगी       यूँ  बड़ी   लाजवाब है
सबकी समझ में  आने  न आने के  बावजूद /7/

खुद  को  तो  मानता  ही नही वो  गुनाहगार
सारे   गुनाह   सामने     लाने  के    बावजूद /8/

रिश्ता  किसी के  साथ  निभाया  नही  गया
रिश्ता  सभी के  साथ  निभाने  के  बावजूद /9/

मन में जमीं जो मैल है बस वो न धुल सकी
गंगा  में    रोज रोज     नहाने  के  बावजूद /10/

पहुचें  हुए हैं   कुंभ  नहाने         के  वास्ते 
मुर्गे  की  हड्डियाँ  तक  चबाने  के बावजूद /11/

आला तरीन सोच कर सालिड निशान देखकर

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आला तरीन  सोचकर       सालिड  निशान  देखकर
क्या क्या   खरीदते   हैं लोग  ऊँची दुकान   देखकर/1/

ना तो  मिसाल  देखकर      ना  ही  बयान  देखकर
चलने  लगा  है  आदमी     अब आसमान   देखकर /2/

नत मस्त  हर समय  हैं वो  बस  खानदान  देखकर
हैरान  खूब  हो  रहा               हिन्दुस्तान   देखकर/3/

पैसों  का  दौर  चल  रहा     मन  कोई  देखता नही 
मेहमान  भी  अब आते हैं   मिलने  मकान देखकर/4/

किसने  बना  दिया  चलन     रिश्तों में  लेनदेन का
डरता है  मेलजोल  से   मुफलिस  विधान  देखकर/5/

संघर्ष,  कर्म ,  प्रार्थना ,   तकलीफ़,   सहनशीलता
मालिक  नवाजता  है         पूरा  इत्मिनान देखकर/6/

कुछ  जिम्मेदारियों  ने  ही    मजबूर  कर दिया हमें
वरना  ठहर  गये थे  हम     दर  आस्तान  देख कर/7/

पग पग  संभल के  चलने की    चेतावनी है ठोकरें
फिसलो  कहीं  न  लोभ में  तुम  मेहरबान देखकर/8/

क्या  पंडितों से  पूछते  हो  जब       बुरे हैं कर्म ही
पंडित  ही  क्या  बताएगा      पोथी पुराण देखकर/9/

कर्मो  की  अपने  सबको  ही होती है जानकारियाँ
मालूम  चल  रहा है  ये           गंगा नहान देखकर/10/

बदले में   दस के नोट के   लाखों  दुआएँ  मांग ली 
रिश्वत  प्रभू  को  दे रहे हैं  लोग   प्लान    देख कर/11/

तकलीफ़ मेरी सांवरे तुझसे छिपी है क्या

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तकलीफ़   मेरी  सांवरे   तुझसे   छिपी है  क्या
खामोश  फिर  भी  बैठा है  कुछ बेबसी है क्या/1/

या   तो   मेरे   करम   में  ही  कुछ खोट है प्रभू 
या   तेरी   रहमतों  में   हुई   कुछ कमी है क्या/2/

दर से  तेरे   न  कोई  भी   लौटा  कभी  निराश
मुझ पर ही बेरूखी की ये बिजली गिरी है क्या/3/

आशिक    तेरे     हजार    खड़े  हैं    कतार में
हम  जैसे  ना मुरादों  की  तुझको पड़ी है क्या/4/

दुनिया   बुरे  समय  में  पकड़ती  है गलतियाँ
पर  तू  पकड़ता  हाथ है  तुझसा कोई है क्या/5

रिश्तों  को  खत्म कर रहे मतलब परस्त लोग
पर तू निभा  रहा  है   करिश्मा  नही  है  क्या/6/

कोई   बुरा   करे    मेरा    ये   उसका  कर्म है
जाने  है  मेरा  श्याम  गलत और सही है क्या/7/

मुझ पर  बहुत  सवाल  खड़े  वक़्त  ने  किये
शायद  पता  नही उसे प्रभु श्याम जी है क्या /8/

मेरा   भरोसा   है   मेरा   प्रभु  श्याम सांवरा
मुझसे  न पूछिए कोई मुश्किल घड़ी है क्या/9/

      🙏🌹।।जय श्री श्याम ।।🌹 🙏

ये जरूरी तो नहीं सबको ही मुहब्बत हो

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ये   जरूरी  तो  नही   सबको   ही  मुहब्बत हो
जिंदगी  के  लिए  मुमकिन है  कुछ जरूरत हो/1/

वो  किसी  का  भी  कभी  साथ दे नही सकता
जिसकी हर बार बदल जाने की ही फितरत हो/2/

कद  से  ना  पद से, बड़ा आदमी तो वो है बड़ा
जो  भी  देता है  तेरा  साथ,   जब  मुसीबत हो/3/

फूल  खुशियों के उन्ही दिल में खिलते देखा है
ठोकरों से  जिन्हें  कुछ  सीखने  की आदत हो/4/

काम  ऐसा करो   खामोशियाँ  भी  छ्प  जाए
शोर करने से जो इज्जत हो  खाक इज्जत हो/5/

एक दिन तो  कोई ऐसा हो  साल भर में कभी
हादसों  मसअलों  से    जिंदगी में   फुर्सत हो/6/

खत्म  हो जाएगा   ये  साल  फिर  दिसंबर में
अब  नये साल  ही शायद ये दिल मरम्मत हो/7/

किस महीने ने  हमें  दुख लिहाज करके दिया
ऐ दिसंबर  भला  तुझसे ही क्यूँ शिकायत हो/8/

कमी कुछ है यकीनन ही लगन में

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कमी  कुछ है   यकीनन  ही लगन में
असर  जो   डाल  ना  पाए भजन में /1/

भटकता है     न जाने मन    कहाँ ये
लगाना  चाहा था     हमने किशन में/2/

छलक  उट्ठा है     सुनकर जिक्र तेरा
समंदर     रोक  रक्खा था   नयन में/3/

खबर  कोई  कभी    अच्छी सुना दो
महक  उट्ठे      जरा  खुश्बू  चमन में /4/

इक अरसा   हो गया    देखे उजाला 
कोई  सूरज  उगा दो   अब  गगन में/5/

न  सोचा था   बदल जाएगा   वो भी
नही  लगता था      है वो आवरण में/6/

कहाँ है  मुतमईन    अब जिंदगी भी
मुसलसल  हादसे हैं     हर चरण में/7/

गुजरती   जाती है    ये उम्र  हर पल
पर अटका है  वो  लम्हा बांकपन में /8/

वो नफरत भी नही करता है अब तो
मुहब्बत  तो  कभी  थी ही न मन में/9/

सरेआम महफिल में आने से पहले

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सरेआम    महफिल  में        आने से पहले
जमाने  को    अपनी        सुनाने  से  पहले/1/

बहुत  कुछ   किया  दफ्न    सीने में  अपने
वो  रोया  बहुत        खिलखिलाने से पहले/2/

कि  चलना   अभी   सीख  ही  हम   रहे थे
किसी  रेस  में   खुद को       लाने से पहले/3/

हुए   खत्म     सब   रास्ते   ही     सफर के
स्वयं को    जरा           आजमाने से पहले/4/

जो  दिखता  नही है   वो     दुखता बहुत है
जरा  सोचिये     दिल  दुखाने से.      पहले/5/

अभी है  बुरा  और          बाकी    गुजरना
कुछ अच्छा समय मुझ तक आने से पहले/6/

संभाला है   माँ की    दुआओं ने     हर दर
मुझे   गर्त में     डूब   जाने से          पहले/7/

कोई भी घड़ी भर में कैसे लगेंगे

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कोई भी   घड़ी भर में.     कैसे लगेंगे
रहें  चाहे  जैसे             निराले लगेंगे/1/

मिले  जिंदगी की  तरह    जिंदगी गर 
तो  हम भी   जरा      मुस्कुराने लगेंगे/2/

बहुत कुछ है कहने को  दिल में हमारे
मिलो  दिल से दिल की  सुनाने लगेंगे/3/

मिलेंगे   पुराने   जो साथी     कहीं तो
बस अपनी   तरक्की     सुनाने लगेंगे/4/

गुजारी है  जिन शर्तों पे   जीस्त हमने
तुम्हें  वो  गुजरते          जमाने लगेंगे/5/

जकड़  रक्खी हैं.   हसरतें  बेड़ियों से
तुम्हें  देख  वरना         मचलने लगेंगे/6/

तेरी  रहमतों के            भरोसे पड़े हैं
तुझे  छोड़ कर   हम    बिखरने लगेंगे/7/

तुझे  देख  दिल  आहें  भरने   लगा है 
संभलने  में   फिर से     जमाने लगेंगे /8/

ग़ज़ल आपकी आप ही तक ना पहूँचे
तो  चिंतन   मनन   व्यर्थ  ही के लगेंगे/9/

बस गुफ्तगू की हमसे ही फुर्सत नहीं मिली

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बस  गुफ्तगू की  हमसे ही   फुर्सत नहीं मिली 
हर शय थी जद में इक यही दौलत नहीं मिली /1/

हर दिल  अजीज का रहा दिल को मेरे गुमान 
उनकी  नजर में  बस  हमें  इज्जत नहीं मिली/2/

खुशियाँ  कभी  मिली भी तो  खैरात की तरह 
अपने  जो हक में  आए वो  नेमत  नहीं मिली/3/

हमको  रही   खुलूशे  वफ़ा   की  तलाश बस 
रिश्तों के   कारोबार में     चाहत  नहीं  मिली/4/

कितने  किये  जतन  कि  जरा चैन अब मिले 
गुजरी   तमाम   जिंदगी   राहत     नहीं मिली/5/

कुछ बेबसी के हाल ने सोने नही दिया

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कुछ  बेबसी  के  हाल ने             सोने नही दिया
चुभते  से  इक     सवाल   ने       सोने नही दिया /1/

है  प्यार   हमसे   आपको   या  है  ये     दिल्लगी 
कुछ  इस  तरह       खयाल ने     सोने नही दिया /2/

आंसू   उबालती   रही              खाली  पतीले मे 
माँ  को  बस  इस     मलाल ने    सोने नही दिया/3/

जगमग   तमाम   शह्र   है   पर   मन     उदास है 
मुफलिस    को      तंगहाल ने    सोने नही दिया /4/

रस्ता     निहारती    रही      ताउम्र         जिंदगी 
खुशियों  के  इस  अकाल ने      सोने नही दिया/5/

मतलब  परस्त   लोग     भरे हैं           जहान में 
इस  मतलबी       बवाल ने        सोने नही दिया/6/

उम्मीद  जिंदगी  से    लगा ली है          बेशुमार
फिर  बेवफा  की  चाल ने         सोने नही दिया /7/

मिलता है जब भी करता है जी भर के दिल्लगी
बे खौफ़  इस  मजाल  ने         सोने नही दिया/8/

जितनी थी सब होशियारी जा चुकी

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जितनी थी सब होशियारी जा चुकी
सारी रंगत   सब खुमारी   जा चुकी/1/

चल रही है  अब  रवायत  जीने की
जिंदगानी  तो     गुजारी   जा चुकी/2/

हर खुशी     हर दर्द ही   व्यापार है
अब  इमोशन  की बयारी जा चुकी/3/

बिक रहे     हर रंग में    आंसू हँसी
ये खबर अब   इश्तेहारी  जा चुकी/4/

जिंदगी ने  ज्यादती   की है   बहुत
मौत  तक  ये  जानकारी जा चुकी/5/

छोड़ भी दो    बरगलाने की  अदा
अब  हुनरमंदी   तुम्हारी  जा चुकी /6/

हर कोई जिंदा यहाँ है बस तसल्ली के लिए

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हर  कोई   जिंदा   यहाँ है   बस  तसल्ली   के लिए
जी  रहा है  कौन     कहिये    अपनी  मर्ज़ी के लिए/1/

गिरना   उठना   लड़खड़ाना  फिर संभलना रोज़ ही
जंग लड़ना    सबको   पड़ता है     तरक्की के लिए/2/

दूरियाँ  कुछ  मिट गईं   पर       फासले तो बढ़ गये
दौरे  मोबाइल     तरसते        लोग    चिट्ठी के लिए/3/

अब तो खुशियाँ भी कुछ ऐसे ही कभी घर आतीं हैं
जैसे  पीहर   आए    बेटी           पांव फेरी के लिए/4/

भला मैं जख्म तुम्हें खोल कर दिखाऊँ क्यूँ

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भला मैं जख्म तुम्हें  खोल कर दिखाऊँ क्यूँ 
उदास हूँ  तो हूँ  मैं तुमको  अब  बताऊँ क्यूँ /1/

तुम्हें भी चाहिए कुछ तो निभाओ उल्फत में
रवायतें   भला   मैं ही   सदा  निभाऊँ   क्यूँ /2/

बहुत से खेल      अधूरे भी       छूट जाते हैं
अब इसका दोष मैं बचपन पे ही लगाऊँ क्यूँ /3/

तमाम  दौर       बुरे       मैं  गुजार  आया हूँ
ऐ जिंदगी   तेरा   मैं      शुक्रिया मनाऊँ क्यूँ/4/

चुरा के  रख लूँ  हँसी लम्हें  क्यूँ न जीवन से
मैं  जिम्मेदारियाँ में   दब के   छटपटाऊँ क्यूँ/5/

समय के पास   रहम की   नही है  गुंजाइश
समय  है एक प्रलोभन    मैं जी उठाऊँ क्यूँ/6/

तुम्हें तो  जीस्त में  बस  शौक  पूरे   करने हैं
जरूरतें  हैं  बड़ी   मेरी      भूल   जाऊँ क्यूँ/7/

समय बचा है  बहुत कम     बहुत बुरा है ये
अभी समय है  गनीमत है    ये भुलाऊँ क्यूँ/8/

बदल ही जाते हैं  जिनको  बदलना होता है
उन्हें मैं सोच के अब अपना जी जलाऊँ क्यूँ/9/

Friday, 11 April 2025

शिकायत है अदावत है मुहब्बत भी जताते हैं

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शिकायत है   अदावत है      मुहब्बत भी     जताते हैं
रवायत     जिंदगी  की  यूँ    लियाकत से   निभाते हैं /1/

नही है  मुतमईन      पर  जिंदगी   जीना  तो है  यारों 
इसी    कारण तो हम   कितनी    समस्याएं  उठाते हैं/2/

कमर  टूटी नही है       तंगदस्ती है     तो  क्या गम है 
हमारे   हौसले हैं            हम   इरादा    ओढ़े आते हैं/3/

मुसीबत में  नही  कोई      नजर  आता है   दुनिया में
लगे  अब      मुस्कुराने  तो        हमारे   यार आते हैं/4/

हकीकत से   जरा  वाकिफ अब हम    हो गए लोगों
मुखौटे  हैं      चढ़े  सब ओर     सब   झूठे ये नाते हैं/5/

चरागो को   कहां कब    तीरगी का  भय   सताता है
अंधेरों से   निपटने        वो   उजाला   ओढ़े आते हैं/6/

सितमगर हैं   बड़े शातिर       चालाकी भी    बेहद है
सताते हैं        रुलाते हैं           हमेशा   आजमाते हैं/7/

रही  हरदम सवालों में   मगर  फिर भी तो  अपनी है
भला अब   जिंदगी का क्यूँ   तमाशा    हम बनाते हैं/8/

ये जो  तकलीफ हैं सारे  बस है  उम्मीदों के  कारण 
कभी  हमको  रही है तो      कभी  वो भी  लगाते हैं/9/

मेरी  खामोशियों को  मत  समझ  कमजोरियां मेरी
परेशां हूँ  जरा   वरना         मुझे  भी   बात आते हैं/10/

कोई   किरदार कैसा है  नही परखा  ये जा सकता
शहर में  भेड़िये    वहशी   शराफत    ओढ़े आते हैं/11/

गरीबों की  जो  बस्ती है  वहाँ   चूल्हा   बुझा सा है 
जतन  कुछ  ऐसा करते हैं  चलो   चूल्हा जलाते हैं/12/

इबादत  और  जियारत से   परे भी  एक दुनिया है
अंधेरा है   वहां  आओ      चरागां  करके  आते हैं/13/

ये  गूंगे बहरों की बस्ती   यहाँ   खामोशियां है बस
यही  दस्तूर   जीने का   यहाँ है      सब निभाते हैं /14/

रकीबो के   शहर से   लौट कर   आए  हुए हैं हम
जलालत की अदावत की ये बचकानी सी बातें हैं/15/

अदावत - दुश्मनी /रवायत _औपचारिकता/ लियाकत - योग्यता /मुतमईन - सन्तुष्ट /बाइस - कारण /मसाइब - मुसीबत /तंगदस्ती - गरीबी /सुकूत-खामोशी/इबादत - पूजा /जियारत - तीर्थ यात्रा /ज़लालत-अपमान/

Thursday, 10 April 2025

फिर से इक बार बहुत याद हैं आए पापा

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फिर से   इक बार   बहुत  याद  हैं  आए  पापा
फिर से  हम  बैठ के  बस  अश्क  बहाए  पापा/1/

मैं हूँ कमजर्फ़   मैं अहमक हूँ     नजर में सबके
मुझको   हर मोड़  पे   मुझसे  ही  मिलाए पापा/2/

कितना बेबस किया  हालात ने  हमको  हर दम
हाथ  से       रेत  के     मानिंद       गवाएं पापा/3/

अपना किरदार  जलाकर  दी  महक  है घर को
आपके  रहते   न  हम  खुद  को  खटाए  पापा/4/

कुछ न कर पाए जतन आपका हम चाह के भी 
दिन  किसी को भी  न  रब  ऐसा  दिखाए पापा/5/

खूब   बर्दाश्त    किये       जिंदगी    नखरे  तेरे
पर  तुझे    फिर  भी   नही  एक   सुहाए  पापा/6/

कोई  हसरत     कोई  चाहत    न  तमन्ना  कोई
घर की  खुशियों  के  लिए   उम्र   खपाए  पापा/7/

आप जब तक रहे  अहसास  सदा छत का रहा
छत के  गिरते  ही  सभी  आंख  दिखाए  पापा/8/

एक  हसरत  रही  दिल  में      मैं तेरी छांव बनूँ
जिंदगी  भर    तुम्ही    हर  बोझ   उठाए  पापा/9/

खुरच खुरच के मुकम्मल कमी तराशी गयी

1212 1122 1212 22 
खुरच खुरच  के मुकम्मल  कमी तराशी गयी
मेरे वजूद से      हर    खानगी    तराशी गयी/1/

शिकायतों  में    कमी   उम्र भर   नही आयी
हर एक   तौर   से ही     जिंदगी तराशी गयी/2/

अँधेरी  बस्तियों  में    दिन  उगाने  से  पहले
बहुत  सलीके  से  हर   रोशनी  तराशी गयी/3/

बस उनके  झूठ का ही मान  रख रहा था मैं
समझ के  ऐब  मेरी   बेहिसी    तराशी गयी/4/

दिया  जवाब  सभी को  ही  मौन रह करके
फिर  उसके बाद  मेरी खामुशी तराशी गयी/5/

बड़े  सुकून से  था  मैं तो  अपनी दुनिया में
सुहाने ख्वाब  दिखा कर खुशी तराशी गयी/6/

खुद अपने आप से मैं लड़ रहा हूँ हर लम्हा
यूँ  इत्मिनान  से   जिंदादिली  तराशी गयी/7/

मैं उनको छोड़ दिया उनके मन की मर्ज़ी में
फिर उसके बाद  ही मर्ज़ी मेरी तराशी गयी/8/

तराशने को  न  जब रह गया जरा कुछ भी
तो  आंसूओं में  छिपी  बेबसी तराशी गयी/9/

हमारे  कर्म से    अस्तित्व   है   हमारा पर
नजरियों  से  ही  हमारी कमी तराशी गयी/10/

बस याद बन के रह गयी अब रात आखिरी

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बस  याद   बन के   रह गईं   अब  रात आखिरी
आया  वो  हमसे  कहने  को  जब बात आखिरी/1/

कहने  को   कह  रहा था  कि   मिलते रहेंगे हम
लहज़ा  था   कह रहा,    है   मुलाकात आखिरी/2/

कुछ  बेहतरी  के साथ   भी  तो  पेश  आ  जरा
ऐ  जिंदगी     है   तुझसे    शिकायात  आखिरी/3/

हमसे  ही   बेरूखी  रही   तेरी   क्यूँ     उम्र भर
तुझसे है  आज    बस  ये    सवालात  आखिरी/4/

मुझमें  तू   रफ़्ता रफ़्ता  यूँ  घटने  लगा है  अब 
बस  रह गये हैं  कुछ  ही     निशानात आखिरी/5/

किस किस को देते फिरते रहें  हम सफाई अब 
हैं  गर बुरे   जो हम   तो हैं   बस बात आखिरी/6/

औरत  का  एहतराम  अभी  जिनके दिल में है
बस  रह  गये हैं  कुछ ही    मरदजात आखिरी/7/

तूझे देख कर मन मगन हो रहा है

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तुझे   देख कर     मन    मगन हो रहा है
नयन   ही   नयन में      भजन हो रहा है /1/

बड़ी   खुशनसीबी        हमारी है   बाबा
सुबह  शाम    तुझसे    मिलन हो रहा है/2/

तेरी  ही  पनाहों   में  है       मेरा जीवन
मुताबिक   तेरे      आचरण    हो रहा है/3/

तेरा  ध्यान  सुमिरन    तेरी कीर्ति गाथा
तेरी  रहमतों  का        सृजन हो रहा है/4/

हृदय  में   प्रभू  आप   यूँ   रम   गये हैं
कि  नित    स्वप्न में  आगमन हो रहा है/5/

तेरी  अर्चना      वंदना       तेरी  पूजा
तेरा  नाम  अविरल   श्रवण  हो रहा है/6/

तुझे  कर  रहा  हूँ मैं  अहसास अर्पण
सजल  चक्षु  से    आचमन  हो रहा है/7/

है  उपकार  तेरा    मेरी   जिन्दगी पर
बिना  कुछ  किये ही  जतन हो रहा है/8/

असर  ये  हुआ तेरी नजदीकियों का 
प्रफुल्लित  बड़ा  मेरा  मन  हो रहा है/9/

🙏🌹।।जय श्री श्याम ।।🌹 🙏

कोई इक रोज़ का किस्सा नही था

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कोई   इक रोज़ का   किस्सा नही था
समय  अपना  कभी  अच्छा  नही था /1/

तसल्ली   कब तलक   देते  स्वयं को 
भला  क्या  खुद से  ये धोखा नही था /2/

शगल  उसका  यही  गड़बड़ रहा बस
वो कुछ भी सोच कर कहता नही था /3/

बिछड़ना   तय रहा     उनका  हमारा
कभी  इसका   मगर   चर्चा  नही था/4/

गलत  हम  ही  रहे    हर बार साहब
कुसूर  उनका  कभी    होता नही था/5/

जिधर  मैं  हूँ   उधर     कोई  नही है
यहाँ  सच  बोलना    अच्छा नही था /6/

लगे हैं  मुस्कुराने  अब  तो   हम भी 
ये  दिल   पहले दुखी इतना नही था/7/