Thursday, 10 April 2025

फिर से इक बार बहुत याद हैं आए पापा

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फिर से   इक बार   बहुत  याद  हैं  आए  पापा
फिर से  हम  बैठ के  बस  अश्क  बहाए  पापा/1/

मैं हूँ कमजर्फ़   मैं अहमक हूँ     नजर में सबके
मुझको   हर मोड़  पे   मुझसे  ही  मिलाए पापा/2/

कितना बेबस किया  हालात ने  हमको  हर दम
हाथ  से       रेत  के     मानिंद       गवाएं पापा/3/

अपना किरदार  जलाकर  दी  महक  है घर को
आपके  रहते   न  हम  खुद  को  खटाए  पापा/4/

कुछ न कर पाए जतन आपका हम चाह के भी 
दिन  किसी को भी  न  रब  ऐसा  दिखाए पापा/5/

खूब   बर्दाश्त    किये       जिंदगी    नखरे  तेरे
पर  तुझे    फिर  भी   नही  एक   सुहाए  पापा/6/

कोई  हसरत     कोई  चाहत    न  तमन्ना  कोई
घर की  खुशियों  के  लिए   उम्र   खपाए  पापा/7/

आप जब तक रहे  अहसास  सदा छत का रहा
छत के  गिरते  ही  सभी  आंख  दिखाए  पापा/8/

एक  हसरत  रही  दिल  में      मैं तेरी छांव बनूँ
जिंदगी  भर    तुम्ही    हर  बोझ   उठाए  पापा/9/

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