Thursday, 10 April 2025

खुरच खुरच के मुकम्मल कमी तराशी गयी

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खुरच खुरच  के मुकम्मल  कमी तराशी गयी
मेरे वजूद से      हर    खानगी    तराशी गयी/1/

शिकायतों  में    कमी   उम्र भर   नही आयी
हर एक   तौर   से ही     जिंदगी तराशी गयी/2/

अँधेरी  बस्तियों  में    दिन  उगाने  से  पहले
बहुत  सलीके  से  हर   रोशनी  तराशी गयी/3/

बस उनके  झूठ का ही मान  रख रहा था मैं
समझ के  ऐब  मेरी   बेहिसी    तराशी गयी/4/

दिया  जवाब  सभी को  ही  मौन रह करके
फिर  उसके बाद  मेरी खामुशी तराशी गयी/5/

बड़े  सुकून से  था  मैं तो  अपनी दुनिया में
सुहाने ख्वाब  दिखा कर खुशी तराशी गयी/6/

खुद अपने आप से मैं लड़ रहा हूँ हर लम्हा
यूँ  इत्मिनान  से   जिंदादिली  तराशी गयी/7/

मैं उनको छोड़ दिया उनके मन की मर्ज़ी में
फिर उसके बाद  ही मर्ज़ी मेरी तराशी गयी/8/

तराशने को  न  जब रह गया जरा कुछ भी
तो  आंसूओं में  छिपी  बेबसी तराशी गयी/9/

हमारे  कर्म से    अस्तित्व   है   हमारा पर
नजरियों  से  ही  हमारी कमी तराशी गयी/10/

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