Saturday, 12 April 2025

कमी कुछ है यकीनन ही लगन में

1222 1222 122 
कमी  कुछ है   यकीनन  ही लगन में
असर  जो   डाल  ना  पाए भजन में /1/

भटकता है     न जाने मन    कहाँ ये
लगाना  चाहा था     हमने किशन में/2/

छलक  उट्ठा है     सुनकर जिक्र तेरा
समंदर     रोक  रक्खा था   नयन में/3/

खबर  कोई  कभी    अच्छी सुना दो
महक  उट्ठे      जरा  खुश्बू  चमन में /4/

इक अरसा   हो गया    देखे उजाला 
कोई  सूरज  उगा दो   अब  गगन में/5/

न  सोचा था   बदल जाएगा   वो भी
नही  लगता था      है वो आवरण में/6/

कहाँ है  मुतमईन    अब जिंदगी भी
मुसलसल  हादसे हैं     हर चरण में/7/

गुजरती   जाती है    ये उम्र  हर पल
पर अटका है  वो  लम्हा बांकपन में /8/

वो नफरत भी नही करता है अब तो
मुहब्बत  तो  कभी  थी ही न मन में/9/

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