1222 1222 122
कमी कुछ है यकीनन ही लगन में
असर जो डाल ना पाए भजन में /1/
भटकता है न जाने मन कहाँ ये
लगाना चाहा था हमने किशन में/2/
छलक उट्ठा है सुनकर जिक्र तेरा
समंदर रोक रक्खा था नयन में/3/
खबर कोई कभी अच्छी सुना दो
महक उट्ठे जरा खुश्बू चमन में /4/
इक अरसा हो गया देखे उजाला
कोई सूरज उगा दो अब गगन में/5/
न सोचा था बदल जाएगा वो भी
नही लगता था है वो आवरण में/6/
कहाँ है मुतमईन अब जिंदगी भी
मुसलसल हादसे हैं हर चरण में/7/
गुजरती जाती है ये उम्र हर पल
पर अटका है वो लम्हा बांकपन में /8/
वो नफरत भी नही करता है अब तो
मुहब्बत तो कभी थी ही न मन में/9/
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