Thursday, 10 April 2025

बस याद बन के रह गयी अब रात आखिरी

221 2121 1221 212 
बस  याद   बन के   रह गईं   अब  रात आखिरी
आया  वो  हमसे  कहने  को  जब बात आखिरी/1/

कहने  को   कह  रहा था  कि   मिलते रहेंगे हम
लहज़ा  था   कह रहा,    है   मुलाकात आखिरी/2/

कुछ  बेहतरी  के साथ   भी  तो  पेश  आ  जरा
ऐ  जिंदगी     है   तुझसे    शिकायात  आखिरी/3/

हमसे  ही   बेरूखी  रही   तेरी   क्यूँ     उम्र भर
तुझसे है  आज    बस  ये    सवालात  आखिरी/4/

मुझमें  तू   रफ़्ता रफ़्ता  यूँ  घटने  लगा है  अब 
बस  रह गये हैं  कुछ  ही     निशानात आखिरी/5/

किस किस को देते फिरते रहें  हम सफाई अब 
हैं  गर बुरे   जो हम   तो हैं   बस बात आखिरी/6/

औरत  का  एहतराम  अभी  जिनके दिल में है
बस  रह  गये हैं  कुछ ही    मरदजात आखिरी/7/

No comments:

Post a Comment