Saturday, 23 July 2022

हालात खौफ़ तर है यूँ मुश्किल निबाह है

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हालात  खौफ़ तर  है  यूँ  मुश्किल निबाह है
फेहरिस्त  हादसों  की  भी  लम्बी  अथाह है/1/

दैरो हरम  के  नाम  पे   झगड़े  यूँ  देख कर
इंसानियत   भी  मांग  रही   अब   पनाह है/2/

फैली हुई है  नफरतों की आग  किस कदर
सहमा  हुआ  ये  दौर  ही  इसका  गवाह है/3/

मजहब  के  ठेकेदार   सिखाते  हैं  दुश्मनी
इनके  खिलाफ  बोलना  कुछ भी गुनाह है/4/

जीना  अगर   सुकून  से  तुम  चाहते  यहाँ
आंखें  लो  मूंद   मौन  रहो   बस सलाह है/5/

खाली  गया है लौट मेरे घर से कल फकीर
तब से  खुदा के  दर  मेरी  नीची  निगाह है/6/

अच्छा  लगे  जो  गौर से उसको न देखना
गर दिख गया जो दोष तो जीवन तबाह है/7/

हर कदम गिर के खुद ही संभलती रही

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हर कदम  गिर के खुद ही संभलती रही
झाड़ के    गर्द     फिर    मुस्कुराती रही/1/

सिलसिला  अनवरत  हाय   चलता रहा
जिंदगी   हर समय    ख्वाब  बुनती रही /2/

इक सिरा  वक़्त की गांठ का  जो खुला
हाथ से    रफ़्ता रफ़्ता    फिसलती रही/3/

कागजों में तो   हम भी   अमीर हैं मगर
जीस्त  फाको में  ही बस   गुजरती रही/4/

सारे    बर्तन       रसोई में       भूखे रहे
जिंदगी    बस   कहानी     पकाती रही/5/

ख्वाहिशें  रोज़    करती हैं     दंगे यहाँ
रोज़ रिश्तों से  अनबन सी  चलती रही/6/

चांद   कहता रहा     चांद हूँ    चांद मैं
भूखी थी  रात व्याकुल  निगलती रही/7/

कैसे  गुजरी   न  पूछो    तुम्हारे  बिना
मशवरों की  दवा  रोज़   मिलती  रही/8/

शोख  रस्मों रिवाजों की  बस्ती में माँ
दरमियाँ   भाई भाई  के   पिसती रही/9/

नौ महीने  जिसे   कोख में  दी जगह
नौ घड़ी  साथ  खातिर   तरसती रही/10/

गैर  कांधो पे   अर्थी    उठी  माई की
भाईयों बीच  अनबन थी  चलती रही/11/

चीखती  कागजों पर   तरक्की  यहाँ
चुप लगा के हकीकत सिसकती रही/12/

बस हिंदू रह गए और मुसलमान रह गए

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बस  हिंदू  रह गये  और  मुसलमान   रह गए 
इंसाँ  की   जुस्तजू में     गुलिस्तान    रह गए /1/

जिन बस्तियों में कल थी  हंँसी  खूब जिंदगी 
अब  जात  और  जमात  के पहचान रह गए /2/

रिश्तों के  दरमियाँ  भी  यूँ  छाई  है  बेरूखी 
बस  बोल चाल   बंद  के   फरमान  रह गए/3/

चौराहे   देख  हादसा    कुछ  भीड़   तो  हुई 
फिर  जात सुन के  खाली से  मैदान रह गए/4/

है खुदखुशी  की  अर्जियाँ  मुर्दों के  शहर में 
जिसने  सुना   अवाक  से    हैरान   रह गए/5/

मौका परस्ती   झूठ   कपट  और  फरेब के 
रस्ते  निठल्लों  के  लिए   आसान  रह गए /6/

दैरो हरम के फेर में  उलझे  हम इस कदर 
अम्नो जुबान  भूल  के   हलकान  रह गए /7/

मुश्किल के लमहात न पूछो अच्छा है

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मुश्किल  के   लमहात   न  पूछो अच्छा है
रहने दो   कुछ  बात     न   पूछो अच्छा है/1/

किसको    फुर्सत   है   कोई   देखे  इतना 
बस्ती  के    हालात    न   पूछो   अच्छा है/2/

हम  अपनी   औकात   छिपाए  फिरते हैं
खामोशी   की   बात    न  पूछो अच्छा है/3/

जब  मैं    रोता  हूँ   तो    आँसू   हँसते हैं
दिल के  यूँ  जज्बात    न  पूछो अच्छा है/4/

मंदिर   मस्जिद   राम   नही लिक्खुंगा मैं 
श्रद्धा की  तुम   जात   न पूछो  अच्छा है/5/

रात के  आगे    है   इक रात  बड़ी लम्बी
किस्मत  के  आफ़ात   न पूछो अच्छा है/6/

फिरकी   फोटू   कंचे   चूरन   बूड्ढी बाल
बचपन  की  सौगात  न   पूछो अच्छा है/7/

चौका चूल्हा  बिस्तर  तकिया  सर सर है
छप्पर की  बरसात  न     पूछो अच्छा है/8/

ख्वाबों में बस कुछ कुछ बेहतर लगती है
जिंदगी के   हैहात    न  पूछो   अच्छा है/9/

जिन पर महफ़िल  लूट  लिया है  बंदे ने
कैसे थे  नग्मात     न  पूछो     अच्छा है/10/

चर्चा चली है बरसों गहन जानते हो तुम

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चर्चा   चली है     बरसों   गहन    जानते हो तुम
आयी   न   रोशनी की   किरन    जानते हो तुम/1/

जिस हाल  जिस जगह पे  गये तुम थे छोड़ कर
ठहरा   हुआ है    आज भी   मन जानते हो तुम/2/

तस्वीर   अब नही   है     कोई      गैलरी में भी 
हर आंख  ढूंढती   है  रिज़न     जानते हो  तुम/3/

ता जिंदगी   कुछ हादसे   चलते हैं  साथ-साथ
हर बार   नया   ओढ़    बदन    जानते हो तुम/4/

मरने  की  इस लिए   भी  है जल्दी   गरीब को
बढ़ते हैं  रोज़    दामे  कफ़न     जानते हो तुम/5/

नफरत  जो कर रहे हैं    उन्हें   करने दो मियांँ
अपना तो  बस है इश्क  मिशन जानते हो तुम/6/

कश्ती  बदलने  की  ही    जरूरत  नही  कोई
साहिल बदलने का भी तो फन जानते हो तुम/7/

भूखा  जरुर है    प   बिकाऊ   नही  है     वो 
रखते हैं हम  जो दिल में वतन जानते हो तुम/8/

अश्कों को पी के करना रुदन जानते हो तुम

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अश्कों  को  पी  के  करना रुदन जानते हो तुम
आंखे  खुली  हो   और   शयन  जानते  हो तुम/1/

सिखला  रहे  हो   मुल्क परस्ती  ये  तुम  किसे
भूखे   न  पेट   होवे   भजन    जानते  हो  तुम/2

नफरत  बड़ी  सरलता से  बिक  जाती है मगर
कम है  मुहब्बतों  का  चलन    जानते  हो तुम/3/

खुद  से  ही  पोंछ लेते हैं अब आंसू अपने हम
उम्मीदें   बस  हैं  देती  चुभन   जानते  हो तुम/4/

हाकिम  है  फिक्रमंद  बहुत  फिक्र  मत  करो
मसलों  पे  चल रहे  हैं  मनन  जानते  हो तुम/5/

हिंदू   मुसलमांँ   सिक्ख   इसाई  हुए हैं  लोग
इंसाँ  का  हो  गया  है   निधन जानते हो तुम/6/

रोटी  तलाशता  है   कोई        कोई भूख को
मालिक का ये अजब है चलन जानते हो तुम/7/

नफरत  उगल  रही हैं   जबानें  यूँ   बेहिसाब
आजादियों  का  करके  हनन जानते हो तुम/8/

सय्यास  अपनी   कार गुजारी  से    कर  रहे
जमहूरियत  का  रोज़  दमन  जानते हो तुम/9/

टुकड़ो में तुमने बेचा था  अपना जमीर कल
कैसे  हुई है    लंका दहन    जानते  हो  तुम/10/

दरकार मेरे मुल्क को  इसकी   अभी है खूब
अम्नो अमाँ के  शीरी कहन   जानते हो तुम/11/

तुमसे लगी है कैसी लगन जानते हो तुम

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तुमसे   लगी है    कैसी   लगन     जानते हो तुम
करने   लगे हैं      शेरो सुख़न     जानते   हो तुम/1/

वादे   जो    बेहिसाब     किये  थे    हमारे  साथ 
क्या  अहमियत  हैं  रखते  वचन  जानते हो तुम/2/

ठाना है   तेरे   ख्वाब    न     देखेंगे  अब  कभी 
पर  चाहता है  क्या  भला  मन    जानते हो तुम/3/

रद्दोबदल  जो   कर   रहे  हो      अपने  आप में
कुछ  तौरे  जिंदगी  का  चलन     जानते हो तुम/4/

कितनी ही    साफ़गोई   से   लिखता है  झूठ तू 
हँसते है  याद  कर    तेरा फ़न    जानते हो तुम/5/

मजबूरियाँ    तो    जागती   रहती हैं    रात भर
नींदें     निगल  गई है     नयन    जानते हो तुम/6/

दिल से  जिगर में  जाने का रस्ता खुला भी रख
शिकवों को करना दिल में दफन जानते हो तुम/7/

मत  पूछिये     हवाएँ   क्यूँ     मेरे   खिलाफ़ है
ख़ामोशियों  से    होती   घुटन    जानते हो तुम/8/

बदलाव   का   है   दौर   जिधर  देखिये  हुजूर
हर  आदमी है  खुद में   मगन  जानते  हो तुम/9/

कस्तूरी   रख  के    पेट  में     बेचैन  है   बहुत
दर दर   उसे  है   ढूंढे   हिरन   जानते  हो तुम/10/

आया था जो बदलने को सिस्टम  यहाँ पे कल
उसका  बदल  गया है  विज़न  जानते  हो तुम/11/

क्या  जिंदगी  के  बारे में कुछ भी करें  बखान
हर पल  बदलती  रहती चलन जानते  हो तुम/12/

कहाँ पे मौसम हँसी नजारे हैं तितलियाँ हैं

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कहाँ पे   मौसम  हँसी     नज़ारे हैं    तितलियाँ हैं
कहाँ  जमी  कहकहों की महफ़िल  है मस्तियाँ हैं/1/

जरूरतें     जिम्मेदारियाँ     हसरतों  का  मजमा 
यही है  सौगात      उम्र भर  की     तरक्कियाँ हैं/2/

सफर में  पेंसिल से   पेन तक   कोई ना  बताता 
इक उम्र के बाद  फिर  सुधरती  न   गलतियाँ हैं/3/

मिली खुशी  देख कर  कि  बेटा    हुआ सयाना 
पर रह गई   आंख में  उम्मीदों की   किर्चियाँ हैं/4/

उदासियाँ  कर रहें  रफू   जिंदगी की   फिर भी 
कहाँ कहाँ से    न जाने  गम    रिस रहे  यहाँ हैं/5/

थी रात व्याकुल  बहुत जियादा  ही भूख से तो
समझ के   रोटी   निगल गई  चांद   सुर्खियाँ हैं/6/

जरूरतें    रोज़    पूछ   लेतीं है     तारीखों को
पगार  की  राह    तकती   माथे पे  त्योरियाँ हैं/7/

न  जिस्म ढंकने को  पाई  देता  कोई  यहाँ पर
उतारने  को  क़बा     हजारों  की   बोलियाँ हैं/8/

तसल्लियाँ  मिल रही थी  कल जो चवन्नियों में
हजारों पा के भी अब न मिलती वो मस्तियाँ हैं/9/

बड़ी   दरारें    दिखी  है   माथे  पे    मेरे मौला 
जरा  मरम्मत    नसीब  की   कर   दुहाईयाँ हैं/10/

मिलती नही कहीं भी हैं मस्तियाँ ग़ज़ल में

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मिलती  नही  कहीं  भी  हैं   मस्तियाँ ग़ज़ल में
देती  सुनाई  हैं  बस  अब सिसकियाँ ग़ज़ल में/1/

महरूमियाँ    मशक्कत    बेचारगी     जरूरत
अब  रह  गईं  यही  बस  हैं  सुर्खियाँ ग़ज़ल में/2/

जद्दोजहद  बहुत है  यारों      कदम कदम पर 
कुछ  ढूंढते हैं  अब भी  सरगोशियाँ  ग़ज़ल में/3/

सबको ही एक दिन जब जाना खुदा के घर है
फिर क्यूँ भरें  बताओ  हम तल्ख़ियाँ ग़ज़ल में/4/

मुँह  में  जुबाँ  नही  है   ना  नब्ज़  है  बदन में
मुर्दा   कहाती   ऐसी   हर   हस्तियाँ  ग़ज़ल में/5/

गुलशन  से  ही  नदारद   जब  हो  गईं  बहारें
लाऊँ  कहाँ से  बोलो तो  तितलियाँ  ग़ज़ल में/6/

होता  अगर  असर  जो आहों में मुफलिसों के
बेहतर  जरा  सी   होतीं   दुश्वारियांँ  ग़ज़ल में/7/

किस्मत से  रोज़  अपनी  इक जंग लड़ रहे हैं 
इस वज्ह भी दिखी है कुछ सख्तियाँ ग़ज़ल में/8/

नफरत  भरे   जहाँ  को   दरकार  है मुहब्बत 
मत  दिल दुखाने वाली दो अर्जियाँ ग़ज़ल में/9/

प्यासा  बहुत है दिखता इस दौर का हर इंसा
बारिश करो मुहब्बत की अब मियांँ ग़ज़ल में/10/

सुलगती देखकर धरती को अंबर रोने लगता है

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सुलगती  देख कर  धरती  को   अंबर  रोने  लगता है 
मिटाने  प्यास   धरती की   हो  कातर  रोने  लगता है /1/

घुमड़ते है    मचलते है    मिलन  के    वास्ते   बादल
घटा   जब   मुस्कुराती  है  तो  छप्पर  रोने  लगता है/2/

खिली  बाँछें   किसी  की  है  कहीं  अरमाँ मचलते हैं
दरकती   देख     दीवारें    कहीं   घर   रोने लगता है/3/

कहीं कपड़े     कहीं गहने    कहीं  पर  कार आती है 
दवाई  को   तरसता   बाप   अक्सर   रोने  लगता है/4/

गया जिस हाल में  जिस मोड़ पर  वो छोड़ कर जैसे
वहीं है   जिंदगी   ठहरी     सुखनवर   रोने लगता है/5/

मुझे  ऐ माँ    तेरे  आंचल   के साये की   जरूरत है 
मेरा  नन्हा जिगर  तुझको  न पाकर  रोने  लगता है/6/

जियादा  खास  होना  भी  बहुत  अच्छा  नही होता
तराशा  जाता है  इतना   कि  पत्थर  रोने लगता है/7/

कभी  हालात  जब  करता  सरे बाजार  है मजबूर 
बहुत   शर्मिंदगी   होती है   पैकर   रोने   लगता है /8/

सफर में साथ रख लो याद कुछ अच्छे दिनों की भी
जरा सी  देख   खामोशी ये    मंजर  रोने  लगता है/9/

खुद अपने में ही खुद को तलाशेंगे किसी रोज़

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खुद अपने में ही खुद को तलाशेंगे किसी रोज
दुनिया ये  भुलाकर  के भी  देखेंगे किसी रोज/1/

अल्फाज़ ने  कर  रक्खी  बगावत  है जहन में 
लम्हे  चुरा के वक़्त से   लिक्खेंगे  किसी रोज/2/

नाराज़ ये दिल क्यू्ँ न हो हर बात पे अब तेरी
फुर्सत में  कभी  बैठ के   सोचेंगे  किसी रोज/3/

उम्मीदें    तमन्नाएँ     ये सपने     ये मरासिम 
अब जान ही लेकर के ये  मानेंगे  किसी रोज/4/

जो गुजरी है हमपे  कहीं शायद ही हो गुजरी 
सब  हमको  कहानी में  सुनाएंगे किसी रोज/5/

अब  हो गये  बच्चे भी  गरीबी से हैं वाकिफ़ 
भूख अपनी तसल्ली से मिटाएंगे किसी रोज/6/

है जानती ये मुफलिसी कुछ कम है बिछौना 
पलकों पे ही मेहमां को बिठाएंगे किसी रोज/7/

मुगालता बाप को था कुनबा संभाल लेगा

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मुगालता    बाप  को  था      कुनबा  संभाल  लेगा
जो   पढ़  लिया    बेटा   सारा  कर्जा  संभाल लेगा/1/

मिली  जो  डिग्री   निकल  लिया   गांव  छोड़ बेटा
उधार   बाकी    तो  बाप  है  ना        संभाल लेगा/2/

दरकने  दीवारो  दर     न  रिश्तों  की  यूँ  ही  देगा
समझता  है    हर  मिज़ाज  लहज़ा   संभाल लेगा/3/

वो  जानता है    तमाम      घर  की   जरूरतों को
है  घर  की  बुनियाद  सारा  मसला  संभाल लेगा/4/

रखा   उमीदों  की   धूप में       ख्वाहिशें  सुखाने
ये  सोच कर  की  समय  का पहिया संभाल लेगा/5/

खबर  नही  थी      जरूरतें    यूँ     बरस  पड़ेंगी
मुगालता   था      नसीब  अपना     संभाल लेगा/6/

गर  हौसला   हो   जुनून हो  कर गुजरने का कुछ 
मुसीबतों  का   जखीरा      बंदा      संभाल लेगा/7/

उठे  सवेरे   जो  नींद से     आंखें  थोड़ी  नम थी
था  आसरा   ख्वाब से     समस्या   संभाल लेगा/8/

रखी थी  उम्मीद  बूढ़ी  आंखों में  कुछ जमा कर
कमाएगा   बेटा    घर  का  खर्चा    संभाल लेगा/9/

रफू  कराने  लगा है     अब  पेंट     अपनी  बेटा
यकीं है  अब  खुद को वो  जरा सा संभाल लेगा/10/

करूँ मैं क्यूँ व्यर्थ में ही चिंता कि होगा क्या कल
बुरा  भला  जो  भी  होगा "कान्हा" संभाल लेगा/11/

घोर अंधेरों में फंसा अपना है जीवन आज भी

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घोर  अंधेरों  में   फंसा  अपना  है   जीवन    आज भी
बस  जरा  खुशियों  की  खातिर ही हैं निर्धन आज भी /1/

जाने    कब     बस्ती    हमारे    आएंगे    सूरज  मियांँ 
चल  रही   अपनी   उजालों  से है   अनबन  आज भी/2/

आंधियों  को  भी     पसीना  आ  गया     ये  देख कर 
दरमियाँ  तूफाँ  के  इक  दीपक  है  रोशन    आज भी/3/

ख्वाहिशें  हैं  मोम सी   वो    सह  न  पाती     धूप को 
रफ़्ता रफ़्ता   बस  पिघलती   रहती    बैरन  आज भी/4/

कहकहों  में  दब  के सारी  सिसकियाँ  फिर   रह गईं 
चल रहा  है    जिंदगी  के   नाम     प्रहसन   आज भी/5/

हर  कोई    परेशान  सा    हैरान  सा    लगता   यहाँ 
हर किसी के  दिल में ही है  कुछ तो उलझन आज भी/6/

राह  तकतीं   दर दिवारें   और   छाजन    हर समय 
ढूंढता    बेसुध   तुम्हें   सारा  ये   चिलमन    आज भी/7/

सो गये  थक  कर  धुआंँ  ही  ओढ़ कर  सारे  चराग
स्वप्न  धर  आंखों  में    बैठी  रात    बिरहन  आज भी/8/

बांट  लेती   बेटियाँ  हैं      दर्द  गम     सब  बाप के
बांटते  देखा  है      बेटों  को  केवल   धन    आज भी/9/

जाने  किसको  फूंक कर   आए हैं    सब मैदान में
अच्छे खासे   फिर  रहे     बस्ती में   रावन  आज भी/10/

मुश्किलों  से  जूझने  का  था  हुनर  पापा  में खूब
पर  न  आ  पाया   मेरे    हाथों  में  वो  फन आज भी/11/

किन मुश्किलों से पापा हमें पालते रहे

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किन मुश्किलों  से    पापा   हमें    पालते  रहे 
रह रह  के    ये  खयाल     जिगर  भेदते  रहे /1/

बच्चों  के   पेट  भरने  की   जद्दोजहद  में ही
ता जिंदगी   वो     अपनी   खुशी   टालते रहे/2/

घर में  कोई  लिबास  बिना  रह न जाए सोच
बनयान   खुद    फटी  ही   पहन   झूमते रहे /3/

हर इक की जरूरतो का सदा ही खयाल रख
रिश्ते    बखूबी   तौर      वो     संभालते  रहे/4/

आएंगे   काम    मेरे    बुढ़ापे    के   वक़्त में 
बच्चों  से   उम्र  भर   ही उन्हें    आस ये  रहे/5/

अहसास  तक  न  होने  गरीबी  का वो दिया 
हँस हँस के  सारी  मुश्किलें  खुद  झेलते रहे/6/

देखा  न  धूप छांव   न  ठहरा   कभी भी वो 
मुश्किल  से  रास्तो  में   भी  वो   भागते रहे/7/

खुशियों  में  रंज  में   ही  गुजारी  है जिंदगी 
आदत  वो   हार जीत  की   यूँ   डालते रहे/8/

घर के लिए  किये है निछावर वो जान दिल 
बेरुखियों  के   दौर  भी     बस   झेलते रहे/9/

छोड़ अब जिंदगी आजमाना यहाँ

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छोड़ अब  जिंदगी   आजमाना यहाँ
चाहते   हम  भी  हैं  मुस्कुराना यहाँ/1/

दो कदम साथ चल ही न पाया कोई
क्या जरूरी था  रिश्ते   बनाना यहाँ/2/

पारसाई  गये  छोड़  कर   शह्र अब
गैर वाजिब है अब सर खपाना यहाँ/3/

राएगाँ  तेरी    की   चाकरी  जिंदगी
आंसूओं का  मिला मेहनताना यहाँ/4/

मुश्किलों में  घिरी  आज इंसानियत
मस्त है  मस्तियों में    जमाना  यहाँ/5/

चंद  लम्हें  सुकूं  के   मयस्सर नही
बैर   तकदीर   से  है   पुराना  यहाँ/6/

मर्द  बिकने  पे    दूल्हे  बनाए  गये
बिक तवायफ बनी है जनाना यहाँ/7/

जिंदगी में यूँ  मातम है पसरा हुआ
हर खुशी लगती झूठा बहाना यहाँ/8/

आपसी रंजिशें गुमान कई

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आपसी   रंजिशें      गुमान   कई
लूट  लेती      सुकूं    अमान कई/1/

एक  चूल्हा    उमीद  से  है   फिर
होंगे इक घर के फिर  मकान कई/2/

दरमियाँ   फासलों  ने   कर डाले
खास  रिश्ते     लहु लुहान   कई/3/

भागे खिडकी से ही निकल रिश्ते 
देख  हालात  के     ढलान   कई/4/

बस तेरा जिक्र अब  नही मिलता
यूँ  है  मुझमें   तेरे    निशान कई/5/

अपनी औकात का   पता है  हमें 
हमने   देखे  हैं     आसमान कई/6/

आग  को    आग  से   बुझाते है
शह्र  में   ऐसे हैं        नदान कई/7/

दुनिया दारी हमें   सिखाओ मत
देखे हैं  हमने   भी   जहान कई/8/

घर जले हैं कई दुकान कई

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घर  जले हैं     कई       दुकान  कई
फिरका  वहशत ने ली है  जान कई/1/

दिल में   होती है  इक  चुभन गहरी
बोलता   जब  है  वो     जबान कई/2/

बरगलाना  है     खूब आसान  उन्हें
मिलते हैं    अब तलक नादान  कई/3/

कुछ कहो गर बहुत संभल के कहो
अब  दिवारों के  भी  हैं   कान कई/4/

है  जरूरी           जरा सा   हंगामा
चलती  बलवों से  ही    दुकान कई/5/

हादसा     बरपा है      शह्र में फिर 
आने  वाले हैं   फिर     बयान कई/6/

रब भी  सुनता नही है   आह कोई 
देखे    देकर    उसे     अजान कई/7/

मुश्किलें     हौसलों       से हारीं हैं
वक़्त  ने   देखें हैं        उड़ान कई/8/

रंजो गम  से  खुशी से    जो है परे
मिल  ही  जाते हैं  यूँ    महान कई/9/

हम ढूंढने को निकले थे कुछ आदमी यहाँ

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हम  ढूंढने को  निकले  थे  कुछ  आदमी  यहाँ
पर  जात  में  ही   उलझी  मिली  जिंदगी यहाँ/1/

अंधे  बने   गवाह  है        बहरे   सुने   दलील
झूठों में   दबदबे  की     लगी   होड़  सी  यहाँ/2/

थोड़ा    संभाल  कर के     करें   गुफ्तगू कोई
मचते  बवाल    बात से   अब  अनकही यहाँ/3/

तन्हाईयों में  बैठ       बड़ी  फुरसतों  के साथ
हम  ढूंढते  हैं  खुद की  वजह   होने की यहाँ/4/

तेरी  सुनी  गयी     तो  ये         तेरा नसीब है 
वरना  खुदा  तो   मेरा भी   है  पास  ही  यहाँ/5/

खुद  ही है  इक सवाल औ खुद ही जवाब है 
ये  जिंदगी  भी   खूब   अजब  सी लगी यहाँ/6/

सूरज  की  राह  ताकते   इक  उम्र  खप  गई
आयी  न   कोई  सुब्ह   कोई   रोशनी   यहाँ/7/

दीवानगी  की  हद  से   परे     और  लोग थे
जद्दोजहद  में   आज है    हर  जिंदगी  यहाँ/8/

रब से  दुआएँ  मांग  लो    अम्नो अमान की 
देखे  गये हैं  भेड़िये       कुछ  नफरती यहाँ/9/

कदम कदम पर यहाँ पे बस अजनबी मिलेंगे

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कदम कदम  पर  यहाँ पे  बस   अजनबी मिलेंगे 
कहीं पे  लेकिन    पुराने  कुछ   यार  भी  मिलेंगे/1/

बिछड़ के फिर से करो कभी तो मिलन का वादा
खयाल  में  ख्वाब  में   तो  यूँ   रोज़ ही   मिलेंगे/2/

लिखी हुई  हैं   नसीब में      ठोकरें  ही    गर तो
किसी  जतन  से   सुकून के  पल    नही मिलेंगे/3/

चली  गई है  यहाँ से     इंसानियत     कभी की
न  पाल  भ्रम  अब  कहीं  तुझे  आदमी  मिलेंगे/4/

कही  गयी  चीख कर  जो  बातें  सुनेंगे कम ही 
सही से  कहने  पे     सुनने  वाले  सही  मिलेंगे/5/

समय  गवाँ  मत  तु  आदमी  ढूंढने  में ऐ दिल
यहाँ तो  जो भी  मिलेंगे  बस   मजहबी मिलेगे/6/

भरी  हुई  है   तमाम  दुनिया  ही   अहमकों से
हमारे  जैसे   अभी   यहाँ   और  भी    मिलेंगे/7/

छिड़कना बाकी है शक्ल पर थोड़ी मुस्कुराहट
उदास  चेहरे   यहाँ पे  अब    आखिरी मिलेंगे/8/

मुझको मेरी मजूरी मेरा दाम चाहिए

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मुझको   मेरी    मजूरी     मेरा   दाम   चाहिए 
अच्छा  बुरा   जो  चाहे  हो  मुझे काम चाहिए/1/

उकता  गया  है  मन ये  मेरा  फुरसतों से अब
मुझको भी  अपनी जीस्त में  कोहराम चाहिए/2/

सूरज  की  राह  ताकते     इक  उम्र खप गई
अब  अपने   हक  के  वास्ते   संग्राम  चाहिए/3/

रक्खा  सहेज  कर  है  बहुत  शोखियांँ  हुजूर
मेहनत का  अपने अब  मुझे परिणाम चाहिए/4/

फिर  उसके बाद   रात   बहुत  देर  तक  रही
सूरज ने   जब  कहा     मुझे  आराम  चाहिए/5/

मंजिल को क्या खबर है सफर के थकान की
अक्सर  बुलंदियों  को  तो  बस  नाम चाहिए/6/

तकते  हैं  झूले  गांव के    राहों को  हर घड़ी
उनको   गये के   आने  का   पैगाम   चाहिए/7/

जो  टूटकर  भी        रहते  जुड़े हैं  दरारों से
ऐसे ही  रिश्तों  के  हमे       इनआम चाहिए/8/

वक़्त बे वक़्त यूँ ही प्यार जता जाती है

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वक़्त  बे  वक़्त   यूँ  ही  प्यार  जता जाती है 
चूम  कर    माथा  मेरा   लाड़ लड़ा  जाती है/1/

जाग   जाती  है  अचानक  जो कभी रातों में
सर   मेरा   धीरे  से  सहला के सुला जाती है /2/

माँ ने  रिश्तो को  अकेला कभी  होने न दिया
ख्वाब में   आ  के  भी  बस  नेह लुटा जाती है/3/

क्यूँ करूँ सजदे इबादत क्यूँ जियारत मैं करूँ
गर्दिशे  वक़्त     मेरे  साथ    दुआ   जाती है/4/

माँ किसी एक दिवस की नही मोहताज कोई
माँ ही जीने का सबक पहला सिखा जाती है/5/

माँ ने  रिश्तों को  निभाया है  बड़ी  शिद्दत से
सारे   तकरार   सरलता  से   भुला   जाती है/6/

माँ को  बाहर  न  कभी जाते हुए देखा मगर 
दुनिया दारी  की   सभी  बातें  बता  जाती है/7/

माँ के हाथों का वो जादू कहीं मिलता ही नही
बासी  रोटी  जो  सुब्ह  सेंक  खिला  जाती है /8/

डांट  गलती  पे  लगा  जाती है  गुस्सा होकर
तो  कभी  प्रेम  से   लोरी  भी  सुना  जाती है /9/

खींच कर पांच लकीरें गढ़ा इक लफ्ज़ है माँ
उसके  कदमों  तले  जन्नत की सदा जाती है /10/

मुहब्बत थी रवायत सा नही था

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मुहब्बत थी      रवायत सा    नही था
कठीन   हालात थे   झगड़ा   नही था/1/

जुड़े थे   लोग   आपस में   जिगर से
रही   तकलीफ़  मन  मैला   नही था/2/

हमें भी  शौक था   मसरूफ़ियत का
हमारे  पास     बस    खर्चा  नही था/3/

बहुत थी  भीड़    यूँ तो  हर तरफ ही
कहीं   कोई    मगर   जिंदा  नही था/4/

न  था   चाहे  कोई   तैयार  फिर भी 
हुआ  जो  हादसा   सहसा  नही था/5/

सिखा दी  वक़्त ने  सब दुनियादारी
वो बच्चा था  मगर   बच्चा नही था/6/

सयाना पन   नही  आया  हमें बस
हमारा   बचपना   अच्छा  नही था/7/

बदलते ही  समय  वो  भी  मिले हैं
जिन्हें  पहले  कभी  देखा नही था/8/

ग़ज़ल  पूरी  भला  कैसे मैं करता
जहन में आखिरी मिसरा नही था/9/

पुरानी खिड़कियाँ परदे नये हों

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पुरानी   खिड़कियाँ     परदे  नये हों
कदाचित अबकि कुछ मसले नये हों/1/

बिना  ही  बात   हो  खर्चा  जहाँ पर 
नही  खलता   अगर     पैसे  नये हों/2/

जरूरी है       जगाने     बेहिसों को
यहाँ  हर  रोज़  अब   किस्से नये हों/3/

बदल  देंगे    हम अपने   हौसलों से
अगर   तेवर     मुकद्दर के   नये हों/4/

मनाते हैं   सभी   त्योहार    दिल से
जरूरी   तो    नही  कपड़े   नये हों/5/

चलाने  को   सियासत  की  दुकानें
कदाचित   अब    कहीं  दंगे नये हों/6/

नही पहचानता    मुझको   मेरा घर
फकत दरकार  अब  उसके नये हों/7/

समझते ही  न जो   हालात  घर के
बहुत मुमकिन है वो  बच्चे  नये हों/8/

किसी से  बोलता  कोई   न जब है
भला  कैसे    वहाँ  झगड़े   नये हों/9/

बहुत  रोया  वो  अपनी  बेबसी पर
मिले  शायद  अभी  सदमें  नये हों/10/

सभी अटके हुए है कल पे  दिल से
कहाँ हैं  लोग जो   मन से   नये हों/11/

श्रद्धा है सबूरी है विश्वास भी है रोटी

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श्रद्धा है     सबूरी है     विश्वास  भी  है  रोटी 
जिंदा  रहने  खातिर  कुछ  खास भी है रोटी /1/

बातों के  ही दम  पर    तो नही भरता है पेट
जी तोड़ जहाँ मेहनत  वहीं आस भी है रोटी/2/

हर मसले  का  हल है     हर ताले की चाबी
कितनों के  जीवन  का    संत्रास भी है रोटी/3/

यूँ ही  तो  नही  बंदा  झुकता  है  यहाँ कोई 
लाचारी  का  पुख्ता  आभास  भी  है   रोटी/4/

भूखे को  दिखती  है  वो  चांद के  ही जैसी 
जब पेट हो खाली तो  आकाश भी है  रोटी/5/

टूटे हुए  ख्वाबों  को      करती  है  ये  पूरा 
कितनों की हसरत का मधुमास भी है रोटी/6/

उम्मीद  नयी  पैदा   करती  है  ये  हर दिन 
उम्मीदें  मरने  पर      उपवास  भी है रोटी/7/

हर एक  कहानी  का  बुनियाद  इसी से है 
ये  सजदा  इबादत है अरदास भी है  रोटी/8/

है  कद्र नही  जिनको    बर्बाद  वहाँ पर है 
कुछ बिगड़े नवाबों में बकवास भी है रोटी/9/

पूछे न  कोई  मजहब ना जात धरम जाने
है  लाडली  ये  सबकी बिंदास भी है रोटी/10/

फाकाकशी के दौर भी खुद्दारियों में था

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फाकाकशी  के  दौर  भी      खुद्दारियों में था
रोज़े  का  कर  बहाना    बड़ी मस्तियों में था/1/

इक जंग  चल  रही है  बड़ी  जिंदगी के साथ 
ये  हौसला  गरीब  का    अब  सुर्खियों में था/2/

आया  था  वक़्त     मेरी  गली    ढूंढता मुझे
खोया  हुआ  मैं  अपनी     परेशानियों में था/3/

लहज़ा  मिज़ाज   देख  कोई   राय मत बना
जद्दोजहद  थी  खूब     मैं  मजबूरियों में था/4/

आयी थी सुब्ह  फिर से नया  मोज़िजा लिए
ख्वाबों में  मुब्तिला  था  मैं  नादानियों में था/5/

बर्बादियों  का  अपने  मैं  खुद  जिम्मेदार हूँ 
मेरा  नसीब        मेरी  इन्हीं   मुट्ठियों में था/6/

होती  बड़ी  अजीब है  यादों  की भी छुअन 
उसके लिए   जो  प्यार था  गहराईयों में था/7/

खुलते  ही  आलमारी  महकने  लगा है  घर
क्या मोज़िजा न जाने  फटी  चिट्ठियों में था/8/

वो था  शरिक  जिस्म में  हर  सांस सांस में
हर पल  वो  मेरे साथ  ही  परछाईयों में था/9/

होने लगा  बुढ़ापे का  बंटवारा  जिस समय
चेहरे पे  फिक्र के  निशाँ  बस बेटियों में था/10/

मिटती  भी  कैसे   मुल्क से  कोई  बुराईयाँ
हर एक शख्स अपनी ही खुदगर्जियों में था/11/

संबंध ताक पर रख किरदार मत बनाओ

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संबंध     ताक पर  रख    किरदार     मत बनाओ 
रिश्तों को     अहमियत दो   व्यापार   मत बनाओ/1/

मत कीजिए        किसी का     भी इस्तेमाल बेजा
जज्बात को    कभी भी      बाजार    मत बनाओ /2/

बर्तन    जहाँ     रहेंगे         आवाज    भी   करेंगे
दिल पर    इसे लगा कर      दीवार   मत  बनाओ/3/

जीना है    जिंदगी तो         आगे की  ओर  देखो
माज़ी को  अपना साथी      दिलदार  मत बनाओ/4/

इंसानियत  गिरा कर          दावा   तरक्कियों का
ऐसी  बुलंदियों  को            आधार   मत बनाओ/5/

मत जिक्र भी करो तुम खुल कर यूँ कुछ कमी की
मजबूरियों  को   अपने     अखबार  मत  बनाओ/6/

रक्खो   सँभाल कर के      मुस्कान      जिंदगी में
किरदार     गम जदा सा    बीमार     मत बनाओ/7/

पत्थर भी   तैर जाते   हैं     जब    कृपा  बरसती
नीयत   सही रखो  मन      दो  चार  मत  बनाओ/8/

देखा है   हर   कदम पर     ही  हादसा   नया सा
अब  और  हादसों के        आसार   मत  बनाओ/9/

अच्छी  तरह  परख  लो  शिद्दत से  जांच कर लो
कुछ  लोभ में  निकम्मी      सरकार  मत बनाओ/10/

हर कदम पर इक नया अहसास है

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हर कदम पर    इक नया   अहसास है
थोड़े   रंजो गम      जरा    परिहास है /1/

कब हुई   किसकी  मुकम्मल  जिंदगी 
सबके   जीवन में   अगर है   काश है/2/

है   मजे में  इन दिनों     सय्यास सब
मसअलों का   चल रहा  अधिमास है/3/

फिर   उठा  दैरो हरम  का  ज्वार सा 
चैनलों  में     चल रही     बकवास है/4/

जिंदगी ! धप्पा   तुझे    थम तो जरा
भाग मत  ज्यादा     मेरा  उपवास है/5/

साथ  बचपन  मैं जरा  रख लेता पर
बोझ   जिम्मेदारियों  का      पास है/6/

मुल्क  के   बिगड़े  हुए     हालात हैं
हुक्मराँ     बेफिक्र  है       बिंदास है/7/

सो गये   फिर   बांध   कपड़ा पेट में
बच्चों को   हालात का   अहसास है/8/

मुल्क में    अम्नो अमां    कायम रहे
बस यही   रब से   मेरी   अरदास है/9/

हल्के  फुल्के  तौर    गहरी  बात भी 
कह गया जो कुछ यकीनन खास है/10/

तन्हाईयों का खौफ़ रहा इस कदर मुझे

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तन्हाईयों  का   खौफ़ रहा      इस कदर  मुझे
लगने लगा है  अपने ही घर  अब तो डर मुझे/1/

परछाईयों  से   रोज़  ही  लड़ता  झगड़ता हूँ 
होने  लगी है   खीज़     जरा   बात पर  मुझे/2/

दीवारें    चीखतीं हैं          दरो बाम  चीखते
खाने  को   दौड़ता  है   ये  सूना सा घर मुझे/3/

वो  जाने  वाला   ऐसा  मेरे  घर  से  है  गया 
सबकुछ वो साथ ले गया बस छोड़ कर मुझे/4/

लहज़ा  मिज़ाज  नाज़ नज़रिया बदल गया
आने  लगा है  याद  वो   हर बात  पर  मुझे/5/

आदत  में है शुमार  वो  कुछ इस कदर मेरे
उसके  बग़ैर  इक  दो कदम  है   दुभर मुझे/6/

है तमन्ना दिली दिवाने की

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है  तमन्ना             दिली दिवाने की
खुल के    इक बार     मुस्कुराने की/1/

दर्द  चेहरे  पे     छिप     नही  पाये
हमने  कोशिश  तो की  छिपाने की/2/

आग  चूल्हे में       अच्छी लगती है
कर न  कोशिश   तू घर जलाने की/3/

वो  जो   रूठा है   मानता  ही नही
कर ली  कोशिश  बहुत  मनाने की/4/

मसअले  यूँ    बहुत हैं    दुनिया में
कुछ  पे   ही  है  नजर  जमाने की/5/

आदमी     आदमी   से   चिढ़ता है
होड़   इक  दूजे  को     गिराने की/6/

मुट्ठियों  में  है    जिंदगी    हर पल
खट्टी-मीठी     लज़ीज़     दाने की/7/

करके  औजार    पत्थरों  को बढ़ो
क्या  जरूरत     उन्हें   हटाने  की/8/

तौर  तहज़ीब     ना     सलीका है
बात  करते हैं    जो      घराने की/9/

हौसला  दे  रहा        जवाब मगर 
मन की कोशिश है जीत जाने की/10/

उम्र  गुजरी  है     राह  तकते  हुए
चाह है  कुछ    सुकून     पाने की/11/

मौन   कैसे      भला      रहे कोई
बात की  उसने   दिल दुखाने की/12/

ख्वाब दिखलाती नये अक्सर रिझाने के लिए

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ख्वाब  दिखलाती  नये अक्सर रिझाने के लिए 
आरज़ू   उम्मीद   हसरत  में   फंसाने  के लिए/1/

कशमकश जद्दोजहद में  उलझा है हर आदमी 
जिंदगी  तैयार  है    हर पल    सताने  के लिए/2/

बेबसी      बेचारगी      दुश्वारियांँ      भरपूर है
हादसा  अब चाहिए इक  दिन बिताने के लिए/3/

जिंदगी  का  नाम है  लाचारियाँ     मजबूरियाँ
कुछ वजह भी तो मिले अब मुस्कुराने के लिए/4/

क्या  जरूरी  हर समय   मायूस  बन  बैठे रहे
कौन  कहता  दर्द  में   आंसू  बहाने  के  लिए/5/

क्यूँ चले आते हो  ख्वाबों में सताने  हर समय 
बख्श  दो  लम्हा   कोई  तो चैन पाने के लिए/6/

आजमाने  को    सदा    तैयार  है  ये जिन्दगी 
चाहिए  खूब  हौसला  हमको रूलाने के लिए/7/

पी गये  रिश्ते  निभाने  वास्ते   सब  तल्ख़ियाँ 
अश्क  रंजो गम  छिपाए    मुस्कुराने के लिए /8/

आरज़ू  उम्मीद  हसरत  और   तमन्नाएं सभी 
बेच दीं   हमने खुशी सब  घर चलाने के लिए/9/

जिंदगी हमको मिली  कुछ कर गुजरने वास्ते 
हम  किये  बर्बाद  बस टुकड़े कमाने के लिए/10/

आलमारी  कब्र  में  है    ना कफ़न में जेब है
क्यूँ  परेशाँ हर कोई फिर है  खज़ाने के लिए/11/

अब तरीका कुछ नया भी आजमाना चाहिए

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अब  तरीका    कुछ  नया  भी      आजमाना सीखिए
दर्द   गर      बढ़ने लगे    तो        मुस्कुराना  सीखिए/1/

छोड़िए   अब  फिक्र    सारा      एहतियातन मशविरे
जिंदगी    जिंदादिली  से           ही  बिताना सीखिए/2/

उम्र  गुजरी  आपकी   बस   याद  कर  कर के  उन्हे
आप  आओ   याद  उनको     वह   बहाना सीखिए/3/

सिलसिला  हो खत्म   लेकिन     गुफ्तगू कायम रहे
इस तरह   कुछ  पैंतरे  भी   अब   दिखाना सीखिए/4/

एक तरफा  ही     मुहब्बत       यों  न  होनी चाहिए
आप   ख्वाबों  में   हमारे   रोज       आना  सीखिए/5/

जानते  बच्चे   शहर के    कौन    मिट्टी    का  मजा
आप  अपने    गांव के    किस्से    सुनाना   सीखिए/6/

जिद  नही  करते कि  बच्चे   जान कर  हालात सब
हसरतों  को   आप    ऐसे    मत  दबाना    सीखिए/7/

ख्वाब  ढोकर   आंख भी   बोझिल  हमारी  हो गई
आज  ख्वाबों को  मुकम्मल कर  दिखाना सीखिए /8/

खत्म हो  किस्सा  मगर     चलनी   कहानी चाहिए
इस तरह  का  कुछ  हुनर सबको सिखाना सीखिए/9/

याद  रखना है  सभी  तारीख     को    तारीख पर
आप  बस   तारीख  को  ही  मत भुलाना सीखिए/10/

उदासियों से लिपट कर मैं गुनगुनाता क्या

1212 1122 1212 22
उदासियों  से   लिपट कर   मैं  गुनगुनाता क्या 
यूँ  रंजो गम  से  घिरा   रह के  मुस्कुराता क्या/1/

बहुत  करीब से  गुजरी है  अजनबी  की तरह
मैं   जिंदगी को   भला  और  आजमाता क्या/2/

मुझे  तो  वक़्त  भी  मजबूर  सा  मिला  बेहद
भला मैं  रूठता क्या नाज़ कुछ दिखाता क्या/3/

गुमाँ  न  पाने  पे  खोने पे  कुछ  मलाल  नही
कोई  भी  दर्द  कहो  दिल  मेरा  दुखाता क्या/4/

मैं अपने आप से अब तक मिला नही खुद ही
तुम्हे  बताओ  भला  खुद से  मैं मिलाता क्या/5/

है  अक्लमंद  यहाँ  पर  सब एक  से बढ़ कर 
मेरी बिसात  किसी को मैं कुछ सिखाता क्या/6/

है  जुगनुओं  को  भरम  रात  उनसे है रोशन
न  जलते  दीप  भरम  उनका टूट पाता क्या/7/

वही न मिलने का ग़म और वही गिला होगा

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वही न मिलने का ग़म  और वही गिला होगा,
मै जानता हूँ कि वो खत में क्या लिखा होगा/1/

चुभन ये पीठ पे कैसी है मुड़ के  देख भी  ले  
कहीं   वो  दूर    तुझे   जाते   देखता   होगा/2/

वजह  कुछ और  रही होगी  रूठने की वहाँ
जरा सी  बात  पे  यूँ  वो  नही   खफ़ा होगा/3/

खयाल  ख्वाब  में  तन्हाईयों  की   संगत में 
यकीं है  बैठे  वो  मुझको  ही  सोचता होगा/4/

मेरी  वफाएं  निगाहों  में   जब  चली  होंगी
जफाओं  पर  वो  पशेमान फिर हुआ होगा/5/

तिमारदारी की अच्छी मिसाल देता है

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तीमारदारी  की   अच्छी    मिसाल  देता है
मैं   रो  पड़ूँ   तो  मुझे  वो  रूमाल  देता है/1/

बेफिक्र  रहता है    यूँ तो  मेरी तरफ से वो
यूँ जाग कर भी  कई शब  निकाल देता है/2

गुजार देता है  फाकाकशी  में ही  हर दिन
वो  तंगहाली  को  रोज़े  की  ढाल  देता है/3/

हर एक  सुब्ह  जरूरत की कौल आती है 
हर एक  शाम   उसे  कल पे  टाल देता है/4/

चले है रोज  मुसलसल नया तमाशा यहाँ
ये घर  गरीब का  अचरज में डाल देता है/5/

मत रवायत निभा मुहब्बत में

2122 1212 22 
मत     रवायत     निभा     मुहब्बत में
इश्क  है    तो   दिखा         जरुरत में/1/

रोज़   खबरें    जो   लाया   करता था
खुद   खबर    बन  गया    मुसीबत में/2/

है   ये   आदत  में  ही    शुमार उनकी 
भूल   जाते हैं      खुद को    चाहत में/3/

इक   तेरा  ही        खयाल है    वरना
कौन    हँसता है    ऐसे     खिल्वत में/4/

घेरे    रहते हैं             मतलबी   सारे
ये   खराबी  है    खूब        शोहरत में/5/

देखती   कम हैं        सोचती   ज्यादा
आंखें  रहतीं  हैं    मौन      उल्फत में /6/

किसने  कब जाना  खैरियत किसका
सब हैं बस अपने गम की खिदमत में/7/

लौटे हैं खुद में ही सफर करके

2122 1212 22 
लौटे हैं खुद में ही  सफर करके
दर्द  बैठा है  दिल में  घर करके/1/

दिन  महीने   गुजरते  हैं  यूँ  ही
यादें   ठहरी हैं आंख भर करके/2/

अब मैं  बाजार से    गुजरता हूँ
आंख को बंद  मुंह उधर करके/3/

ख्वाहिशें दफ्न कर ली सीने में
जब  जरूरत मिली जी भर के/4/

वो  दबे पांव  आती है  अक्सर
मौत आती है कब खबर करके/5/

जिंदगी अजनबी सरीखी लगी 
हर  कोई  तंग हैं  बसर  करके/6/

खौफ़ से नजरें मिलाओ तो सही

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खौफ़ से   नजरें  मिलाओ  तो  सही
दो घड़ी  हँस कर  दिखाओ तो सही/1/

भाग  जायेंगी   लजा कर   मुश्किलें
मुश्किलों में     मुस्कुराओ   तो सही/2/

तूने   जो  दुनिया   बता  भेजा खुदा 
है  कहाँ   दुनिया   बताओ  तो सही/3/

झूठ  और  मौका परस्ती  हर कदम
इस   जहन्नुम से   बचाओ  तो सही/4/

जिंदगी    अच्छी   लगेगी    देखना
भूल कर  गम  मुस्कुराओ  तो सही/5/

खुशनुमा  गुजरेगा  हर लम्हा  हुजूर 
कामनाओं  को    हटाओ  तो  सही/6/

हर समय  मत कोसिये हालात को
युक्ति के  दीपक  जलाओ तो सही/7/

तानों को  हथियार बना आगे बढ़ो
खुद को यूँ भी आजमाओ तो सही/8/

हर शख्स ही यहाँ पे सियासत से तंग है

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हर शख्स  ही  यहाँ पे    सियासत  से  तंग है 
फिरका परस्ती   झूठ से    नफरत  से  तंग है /1/

गठजोड़ जब से  जुल्म का  खादी से हो गया
अखबार   सुर्खियों  की     इबारत  से  तंग है /2/

महंगे  हुए हैं  आजकल    बाजार  इस कदर
पब्लिक  बदलते   दाम से   कीमत  से तंग है /3/

इंसानियत  की    कौम  नही है     ये  शुक्र है
वरना  तो  मुल्क   सिजदे इबादत   से तंग है/4/

फिल्में भी अब तो  हिन्दू मुसलमान  हो गयी
आम आदमी ये  मजहबी  फितरत से तंग है/5/

जिनके  लिए है   जंग     उन्ही को पता नही
दैरो हरम  भी  आपसी     हुज्जत  से तंग है/6/

खेमों में बंट चुकी है हर इक सोच आज की
हर  जिंदगी  नजरिये  से   नीयत  से  तंग है/7/

नादान  दिल  फरेब में  आ  जाता है  सहल 
हर शख्स दिल की चाह से हसरत से तंग है/8/

हर दिन दुखी हृदय से आल्हाद क्या करें हम

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हर दिन  दुखी हृदय से  आल्हाद  क्या  करें हम
कमजोरियों  पर  अपनी  अवसाद क्या करें हम/1/

मगरूर  जिंदगी  है        मजबूर    हर  खुशी है
लाचारगी  पे  हर दिन    बकवाद  क्या करें हम/2/

गुजरे हुए  समय को   क्या  करना   याद करके 
कल पर  ये आज अपना  बर्बाद  क्या  करें हम/3/

मजबूर  कर  रहा है       हमको   समय  हमारा
बदकिस्मती   पर  अपनी   रूदाद क्या करें हम/4/

खामोशियाँ  भी  मेरी     अब  चीखती  बहुत हैं
क्यूँ  शोर  फिर  मचाएँ  और नाद क्या करें हम/5/

माँ  के  बगैर  घर  भी  घर सा  नही  है  लगता
इन  ईंट गारों  से  अब  फरियाद  क्या करें हम/6/

उम्मीद  हद से ज्यादा  है  वज्ह  हर  व्यथा की
समझाएं  कैसे  दिल  को  संवाद  क्या करें हम/7/

मुझमें  जो है  अब उससे  बनती नही है अपनी
इस वज्ह  हर समय दिल नाशाद क्या करें हम/8/

शिव तो नही हैं फिर भी  हर रोज विष पिया है
दिल है  भरा भरा सा  दिल शाद  क्या करें हम/9/

हम  मुफ्त  दे रहें  पर    लेता  नही  कोई  दिल
दाम और  अभी है  गिरने उस्ताद क्या करें हम/10/

मिलिए कभी तो यूँ के मत ख्वाब सा लगे कुछ 
अहसास  करने  तेरा    औराद  क्या  करें  हम/11/

औराद - जपतप

लम्हें खुद के लिए दो चार गुजारा होता

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लम्हें   खुद  के  लिए   दो  चार   गुजारा  होता
खुद का  चेहरा  ही  कभी  शीशे में  देखा होता/1/

कोई  शिकवा  न  गिला   जिंदगी से होता फिर
गर जो  फुर्सत में  कभी खुद को  पुकारा होता/2/

फिर  तेरी  बातें   भिगोने    लगी हैं  आंखें मेरी
काश तुम  अजनबी  ही  रहते तो बढ़िया होता/3/

देख  माँ  बाबा   को    मजबूर   ये  सोचें  बेटी
गर  मैं  पैदा  ही  नही  होती  तो  अच्छा  होता/4/

मैं  अदाकार  हूँ   किरदार     बदलता  है  मेरा
काश  शिद्दत  से   मुझे   तूने     निहारा  होता/5/

साथ मुफ़लिस के शरारत हो गई

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साथ   मुफ़लिस   के     शरारत  हो गई
फिर    खड़ी      देखो   मुसीबत हो गई/1/

ख्वाहिशों  को   कुछ मिली यूँ भी सजा
रूबरू      उनसे       जरूरत    हो गई/2/

जी  जी     करने वाले    तू  तू  करते हैं
वक़्त  की     क्या  खूब   नेमत  हो गई/3/

दाग  है  वो     आसमाँ  के   जिस्म पर 
चांद  कह कर  जिसकी इज्जत हो गई/4/

रिश्तेदारी  में       इजाफा       हो गया
पास   थोड़ी  सी   जो   दौलत  हो गई/5/

हर  समय   बस  जिंदगी  को  कोसना
हर  किसी  की   आज  आदत  हो गई/6/

मुश्किलें       दुश्वारियांँ      मजबूरियाँ 
जिंदगी  से     अब     मुहब्बत  हो गई/7/

राह  तकते  थक  गईं   आंखें भी अब
पर  खुशी  आयी  न      मुद्दत हो गई/8/

सांस तो  लेने  दो  पल भर    के लिए 
सुब्ह से  ही   यादें      आफत हो गई/9/

काश  तुमको भी  मिले  तुमसा  कोई
दिल की ये ख्वाहिश ये चाहत हो गई/10/

कहें कैसे तुमसे मुहब्बत नही थी

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कहें  कैसे   तुमसे   मुहब्बत     नही थी
पर इतना ही कहने की हिम्मत नही थी/1/

पशेमां  हुए     बेकसूरी      में  भी  हम
लगन  ये  कहो  क्या  मुहब्बत नही थी/2/

बढ़े  इस कदर    फासले    दरमियाँ हैं
बिछड़ने  की  हमको  जरूरत नही थी/3/

दिया कुछ तो  तुमने दिया चाहे धोखा
वगरना  तुम्हारी    ये  आदत  नही थी/4/

मिला  हर कदम पर  नया सीखने को
कभी भी  हमें इससे दिक्कत नही थी/5/

हुए  खर्च  खुद  ही      कमाते कमाते
कमाया  वो जिसकी जरूरत नही थी/6/

जला कर   स्वयं को  निभाता रहा मैं
फरामोश  की  मेरी   नीयत  नही थी/7/

हुई  आजकल   नातेदारी   सलेक्टेड
कहीं भी  गरीबी की इज्जत नही थी/8/

मैं उलझा नही  मज़हबी तज़क़िरों में
मेरे पास  इतनी  तो  फुर्सत  नही थी/9/

ख्वाब अधूरे हैं सारे खुशियाँ सब अधूरी हैं

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ख्वाब अधूरे हैं  सारे  खुशियाँ सब अधूरी हैं
जिंदगी में  रंजो गम   की  व्यवस्था   पूरी है/1/

माहिरी तो हासिल है दिल दुखाने में सबको
पर  तसल्ली  के मरहम  भी कभी जरूरी है/2/

यार  आते हैं मिलने   साथ  रुतबे  रखते हैं
हाथ तो  मिलाते हैं  दिल से दिल की दूरी है/3/

वक़्त ही  सिकंदर है  वक़्त ही  खिलाडी है
खेल  वक़्त का है सब  वक़्त की  कसूरी है/4/

हैं  करीब  तो  लेकिन   दूर  हैं  बहुत हमसे
अपने कुछ अजीजों की  यूँ भी बे शऊरी है/5/

बात कोई अगर नही होती

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बात    कोई    अगर    नही    होती
हर  खुशी     मुख्तसर    नही होती/1/

दरमियाँ      फासले        नही होते
जिंदगी       बे खबर      नही होती/2/

ज़िक्र मुश्किल का सुन के रिश्तों में
भाग दौड़   इस कदर     नही होती/3/

गर   सितारे    न   होते    गर्दिश में
कोई   आफत  ही  सर   नही होती/4/

लोग   जिंदा दिली    से   मिलते हैं
मुस्कुराहट  ही    भर   नही   होती/5/

जिंदगी   की   भी    सांझ  होती है
खूबसूरत    मगर         नही  होती/6/

और   सब   जिंदगी  में     होता है
जिंदगी  खास कर       नही  होती/7/

रवायत ही सलीके से निभा लेती तो अच्छा था

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रवायत  ही   सलीके से   निभा   लेती   तो   अच्छा था
घड़ी भर  ही  सही   गर   मुस्कुरा  लेती  तो  अच्छा था/1/

नही  होता  कोई  अफसोस   मिल कर  जिंदगी  तुझसे
अदाकारी   जरा  अपनी     छिपा  लेती  तो  अच्छा था/2/

सफर  में  धूप  भी  होगी     पड़ेंगे     आबले  भी  पांव
इसे ही  पासबाँ    अपना    बना   लेती    तो अच्छा था/3/

समंदर  की  मुहब्बत में      मिटा  अस्तित्व  नदियों का
नदी  कोई   वज़ूद  अपना   बचा  लेतीं   तो  अच्छा था/4/

मशक्कत करके भी दम भर तसल्ली कुछ नही मिलती
तमाशे   जिंदगी   अपने   हटा   लेती   तो    अच्छा था/5/
 
खयालों  में   व्यथा   कैसे   भला  लिक्खे  कलम कोई
जरा  मुश्किल भरे  कुछ  दिन बिता लेती तो अच्छा था/6/

उलझते  हम  रहें     ऐ जिंदगी     कब तक   अंधेरों से
नया  सूरज  ही  खुद  खातिर  उगा लेती तो अच्छा था/7/

शिकायत  तो  रही  लेकिन  नही  जाहिर किया तुझसे
हमें  भूले  से  ही    तू  ही    मना  लेती  तो  अच्छा था/8/

कब तक पेट की आग में पानी डाला जाएगा

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कब तक  पेट की  आग  में  पानी  डाला जायेगा 
जाने कब    भूखों  के  मुंह में   निवाला   जायेगा/1/

छिपकर  महलों  के पीछे  झांका  करता है सुरज
जाने  कब  मुफलिस  बस्ती में  उजाला  जायेगा/2/

जिंदा हैं कुछ लोग अभी अपने ज़मीरों से शायद 
कब तक  यूँ ही  ये झूठा   भरम   पाला  जायेगा /3/

भूखों ने  कब  पूछा है  रोटी का  मजहब  क्या है 
वो  मस्जिद  हो आया है  अब   शिवाला जायेगा/4/

कांपते  गुजरी  सर्द भरी  रातें जिसकी झोपड़ में 
उसके  पड़ोसी घर से   दरगाह  दुशाला  जायेगा/5/

देख  सुहाने  मंजर   बच्चे    गुमसुम  से  रहते हैं 
उलझे हैं   हम   कैसे   उनको  संभाला  जायेगा /6/

सांझ ढले घर जाएं कैसे खाली खाली जेब लिए 
उम्मीदों को  फिर  से    झांसे में   डाला जाएगा/7/

आश्वासन  के  झांसे  ये  कब तक  राहत  देते हैं 
जिंदा  रहने  फिर  ढंग  नया   निकाला  जाएगा/8/

हैं सवाबों के तलबगार दुआ से पहले

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हैं  सवाबों  के   तलबगार     दुआ  से  पहले
हो  गये  कितने  खुदा  देखो  खुदा  से पहले /1/

खुद ही मकतुल  बना खुद ही बना हैं मुंसिफ
फैसला खुद ही किया  उसने  ज़फा से पहले /2/

कितने  सहमे  हुए  हैं   लोग  यहाँ  देखो  तो 
मौत  दिखने  लगी  सबको ही सजा से पहले /3/

नीम अक्ली  की बिना पर है  फसादी मौसम
सब  हैं  बेचैन   परेशान          बला से पहले /4/

शक्लों सुरत से तो किरदार  पता चलता नहीं
कौन  कितना था  बुरा  शख्स भला से पहले /5/

ये भी जमहूरियत की अच्छी मिसाल है यारों
उंगलियां  उठती हैं  हर बार     रज़ा से पहले /6/

कितने  नादान हैं   ये  जहनी   तबीयत वाले
फूंक  डाला है  शहर  बाद ए सबा   से पहले /7/

मरने जीने का ही बस एक ये किस्सा न बने

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मरने  जीने  का  ही  बस  एक  ये  किस्सा न बने
कोई   मकसद  तो  बने     जिंदगी  बेजा  न  बने/1/

क्या  भला    फायदा  है     ऐसे     बड़ा   होने से
जो कि  कमजोर का    बेबस का   सहारा  न बने/2/

कल  तेरे साथ       बहुत  वक़्त     गुजारा  हमने
अब  यही  बात     कहीं  शह्र में     चर्चा   न बने/3/

सबको ही है ये गिला मुझको बहुत कम है मिला
ये  शिकायत  ही  कहीं  रंज  का  जरिया  न बने/4/

गर  तसल्ली  से    पढ़े होते     समझते  दुनिया
अब तो  मतलब  बिना  कोई कहीं रिश्ता न बने/5/

न ले तू हल्के में यूँ कर न दर किनार मुझे

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न   ले   तू   हल्के में  यूँ कर न  दर किनार मुझे 
समझ  तू   लोहे  की  मजबूत  सी   दीवार मुझे/1/

मै   सरहदों   में   हूँ    मुस्तैद  रात दिन हर दम 
अदब  के  साथ    तू    हिंन्दुस्ताँ     पुकार मुझे/2/

ये    अम्नो चैन     वतन  में     मेरी  बदौलत है
मगर   नसीब   हुई    कब   भला   बहार   मुझे/3/

निसार मुल्क की खिदमत में जिस्मों जाँ है मेरी
यूँ  कहते   सब हैं   निगहबान     पहरेदार मुझे/4/

इसी दहर ही मिले  दिल अजीज मुझको सभी
कभी  खुशी   तो  कभी  गम  मिले हजार मुझे/5/

यहीं  पे    हमने      सभी     धूप छांव  देखे हैं 
पता   लगा है   यहीं   सहरा  और  बहार मुझे/6/

मुश्किल घड़ी में भी तो जरा मुस्कुरा के देख

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मुश्किल  घड़ी  में  भी  तो  जरा  मुस्कुरा के देख
हर   रंजो गम  को   ठोकरों में   तू   उड़ा के देख /1/

जद्दोजहद   के   दौर   से    आगे   निकल   जरा
आएगा  कुछ  अलग सा  मजा  आजमा के देख/2/

खुशियों  की  वज्ह  मंहगी  बहुत है  तलाश मत
बे वज्ह  भी  कभी तो  तू  खुशियाँ मना के देख/3/

मतलब   बगैर    भीख  भी    देता   नही   कोई
कुछ फर्ज़  स्वार्थ के बिना  भी तो निभा के देख/4/

चल  बैठते  हैं  साथ   कभी   बिछड़े  यार  सब
गुजरे समय के साथ भी कुछ पल बिता के देख/5/

फिर   लौटने  को   कोई   बहाना   तो   चाहिए
कुछ  काम  कल के वास्ते  भी तो बचा के देख/6/

दैरो हरम  पे    हीरे  जवाहर       सजाना  खूब
मकतब  के  छप्परों को तो पहले सजा के देख/7/

जितना  बड़ा  है  आदमी  उतना  बड़ा ही झूठ
पहलू  से  वक़्त के  कोई  लम्हा  उठा  के देख/8/

डर ने  किया है  हौसला    कमजोर  हर समय
डर से  निकल कभी तो जरा आगे आ के देख/9/

-मुकेश सिंघानिया