2122 1212 22
है तमन्ना दिली दिवाने की
खुल के इक बार मुस्कुराने की/1/
दर्द चेहरे पे छिप नही पाये
हमने कोशिश तो की छिपाने की/2/
आग चूल्हे में अच्छी लगती है
कर न कोशिश तू घर जलाने की/3/
वो जो रूठा है मानता ही नही
कर ली कोशिश बहुत मनाने की/4/
मसअले यूँ बहुत हैं दुनिया में
कुछ पे ही है नजर जमाने की/5/
आदमी आदमी से चिढ़ता है
होड़ इक दूजे को गिराने की/6/
मुट्ठियों में है जिंदगी हर पल
खट्टी-मीठी लज़ीज़ दाने की/7/
करके औजार पत्थरों को बढ़ो
क्या जरूरत उन्हें हटाने की/8/
तौर तहज़ीब ना सलीका है
बात करते हैं जो घराने की/9/
हौसला दे रहा जवाब मगर
मन की कोशिश है जीत जाने की/10/
उम्र गुजरी है राह तकते हुए
चाह है कुछ सुकून पाने की/11/
मौन कैसे भला रहे कोई
बात की उसने दिल दुखाने की/12/
No comments:
Post a Comment