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अश्कों को पी के करना रुदन जानते हो तुम
आंखे खुली हो और शयन जानते हो तुम/1/
सिखला रहे हो मुल्क परस्ती ये तुम किसे
भूखे न पेट होवे भजन जानते हो तुम/2
नफरत बड़ी सरलता से बिक जाती है मगर
कम है मुहब्बतों का चलन जानते हो तुम/3/
खुद से ही पोंछ लेते हैं अब आंसू अपने हम
उम्मीदें बस हैं देती चुभन जानते हो तुम/4/
हाकिम है फिक्रमंद बहुत फिक्र मत करो
मसलों पे चल रहे हैं मनन जानते हो तुम/5/
हिंदू मुसलमांँ सिक्ख इसाई हुए हैं लोग
इंसाँ का हो गया है निधन जानते हो तुम/6/
रोटी तलाशता है कोई कोई भूख को
मालिक का ये अजब है चलन जानते हो तुम/7/
नफरत उगल रही हैं जबानें यूँ बेहिसाब
आजादियों का करके हनन जानते हो तुम/8/
सय्यास अपनी कार गुजारी से कर रहे
जमहूरियत का रोज़ दमन जानते हो तुम/9/
टुकड़ो में तुमने बेचा था अपना जमीर कल
कैसे हुई है लंका दहन जानते हो तुम/10/
दरकार मेरे मुल्क को इसकी अभी है खूब
अम्नो अमाँ के शीरी कहन जानते हो तुम/11/
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