2122 1212 22
लौटे हैं खुद में ही सफर करके
दर्द बैठा है दिल में घर करके/1/
दिन महीने गुजरते हैं यूँ ही
यादें ठहरी हैं आंख भर करके/2/
अब मैं बाजार से गुजरता हूँ
आंख को बंद मुंह उधर करके/3/
ख्वाहिशें दफ्न कर ली सीने में
जब जरूरत मिली जी भर के/4/
वो दबे पांव आती है अक्सर
मौत आती है कब खबर करके/5/
जिंदगी अजनबी सरीखी लगी
हर कोई तंग हैं बसर करके/6/
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