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किन मुश्किलों से पापा हमें पालते रहे
रह रह के ये खयाल जिगर भेदते रहे /1/
बच्चों के पेट भरने की जद्दोजहद में ही
ता जिंदगी वो अपनी खुशी टालते रहे/2/
घर में कोई लिबास बिना रह न जाए सोच
बनयान खुद फटी ही पहन झूमते रहे /3/
हर इक की जरूरतो का सदा ही खयाल रख
रिश्ते बखूबी तौर वो संभालते रहे/4/
आएंगे काम मेरे बुढ़ापे के वक़्त में
बच्चों से उम्र भर ही उन्हें आस ये रहे/5/
अहसास तक न होने गरीबी का वो दिया
हँस हँस के सारी मुश्किलें खुद झेलते रहे/6/
देखा न धूप छांव न ठहरा कभी भी वो
मुश्किल से रास्तो में भी वो भागते रहे/7/
खुशियों में रंज में ही गुजारी है जिंदगी
आदत वो हार जीत की यूँ डालते रहे/8/
घर के लिए किये है निछावर वो जान दिल
बेरुखियों के दौर भी बस झेलते रहे/9/
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