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मुश्किल घड़ी में भी तो जरा मुस्कुरा के देख
हर रंजो गम को ठोकरों में तू उड़ा के देख /1/
जद्दोजहद के दौर से आगे निकल जरा
आएगा कुछ अलग सा मजा आजमा के देख/2/
खुशियों की वज्ह मंहगी बहुत है तलाश मत
बे वज्ह भी कभी तो तू खुशियाँ मना के देख/3/
मतलब बगैर भीख भी देता नही कोई
कुछ फर्ज़ स्वार्थ के बिना भी तो निभा के देख/4/
चल बैठते हैं साथ कभी बिछड़े यार सब
गुजरे समय के साथ भी कुछ पल बिता के देख/5/
फिर लौटने को कोई बहाना तो चाहिए
कुछ काम कल के वास्ते भी तो बचा के देख/6/
दैरो हरम पे हीरे जवाहर सजाना खूब
मकतब के छप्परों को तो पहले सजा के देख/7/
जितना बड़ा है आदमी उतना बड़ा ही झूठ
पहलू से वक़्त के कोई लम्हा उठा के देख/8/
डर ने किया है हौसला कमजोर हर समय
डर से निकल कभी तो जरा आगे आ के देख/9/
-मुकेश सिंघानिया
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