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फाकाकशी के दौर भी खुद्दारियों में था
रोज़े का कर बहाना बड़ी मस्तियों में था/1/
इक जंग चल रही है बड़ी जिंदगी के साथ
ये हौसला गरीब का अब सुर्खियों में था/2/
आया था वक़्त मेरी गली ढूंढता मुझे
खोया हुआ मैं अपनी परेशानियों में था/3/
लहज़ा मिज़ाज देख कोई राय मत बना
जद्दोजहद थी खूब मैं मजबूरियों में था/4/
आयी थी सुब्ह फिर से नया मोज़िजा लिए
ख्वाबों में मुब्तिला था मैं नादानियों में था/5/
बर्बादियों का अपने मैं खुद जिम्मेदार हूँ
मेरा नसीब मेरी इन्हीं मुट्ठियों में था/6/
होती बड़ी अजीब है यादों की भी छुअन
उसके लिए जो प्यार था गहराईयों में था/7/
खुलते ही आलमारी महकने लगा है घर
क्या मोज़िजा न जाने फटी चिट्ठियों में था/8/
वो था शरिक जिस्म में हर सांस सांस में
हर पल वो मेरे साथ ही परछाईयों में था/9/
होने लगा बुढ़ापे का बंटवारा जिस समय
चेहरे पे फिक्र के निशाँ बस बेटियों में था/10/
मिटती भी कैसे मुल्क से कोई बुराईयाँ
हर एक शख्स अपनी ही खुदगर्जियों में था/11/
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