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चर्चा चली है बरसों गहन जानते हो तुम
आयी न रोशनी की किरन जानते हो तुम/1/
जिस हाल जिस जगह पे गये तुम थे छोड़ कर
ठहरा हुआ है आज भी मन जानते हो तुम/2/
तस्वीर अब नही है कोई गैलरी में भी
हर आंख ढूंढती है रिज़न जानते हो तुम/3/
ता जिंदगी कुछ हादसे चलते हैं साथ-साथ
हर बार नया ओढ़ बदन जानते हो तुम/4/
मरने की इस लिए भी है जल्दी गरीब को
बढ़ते हैं रोज़ दामे कफ़न जानते हो तुम/5/
नफरत जो कर रहे हैं उन्हें करने दो मियांँ
अपना तो बस है इश्क मिशन जानते हो तुम/6/
कश्ती बदलने की ही जरूरत नही कोई
साहिल बदलने का भी तो फन जानते हो तुम/7/
भूखा जरुर है प बिकाऊ नही है वो
रखते हैं हम जो दिल में वतन जानते हो तुम/8/
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