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पुरानी खिड़कियाँ परदे नये हों
कदाचित अबकि कुछ मसले नये हों/1/
बिना ही बात हो खर्चा जहाँ पर
नही खलता अगर पैसे नये हों/2/
जरूरी है जगाने बेहिसों को
यहाँ हर रोज़ अब किस्से नये हों/3/
बदल देंगे हम अपने हौसलों से
अगर तेवर मुकद्दर के नये हों/4/
मनाते हैं सभी त्योहार दिल से
जरूरी तो नही कपड़े नये हों/5/
चलाने को सियासत की दुकानें
कदाचित अब कहीं दंगे नये हों/6/
नही पहचानता मुझको मेरा घर
फकत दरकार अब उसके नये हों/7/
समझते ही न जो हालात घर के
बहुत मुमकिन है वो बच्चे नये हों/8/
किसी से बोलता कोई न जब है
भला कैसे वहाँ झगड़े नये हों/9/
बहुत रोया वो अपनी बेबसी पर
मिले शायद अभी सदमें नये हों/10/
सभी अटके हुए है कल पे दिल से
कहाँ हैं लोग जो मन से नये हों/11/
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