12122 12122 12122
कदम कदम पर यहाँ पे बस अजनबी मिलेंगे
कहीं पे लेकिन पुराने कुछ यार भी मिलेंगे/1/
बिछड़ के फिर से करो कभी तो मिलन का वादा
खयाल में ख्वाब में तो यूँ रोज़ ही मिलेंगे/2/
लिखी हुई हैं नसीब में ठोकरें ही गर तो
किसी जतन से सुकून के पल नही मिलेंगे/3/
चली गई है यहाँ से इंसानियत कभी की
न पाल भ्रम अब कहीं तुझे आदमी मिलेंगे/4/
कही गयी चीख कर जो बातें सुनेंगे कम ही
सही से कहने पे सुनने वाले सही मिलेंगे/5/
समय गवाँ मत तु आदमी ढूंढने में ऐ दिल
यहाँ तो जो भी मिलेंगे बस मजहबी मिलेगे/6/
भरी हुई है तमाम दुनिया ही अहमकों से
हमारे जैसे अभी यहाँ और भी मिलेंगे/7/
छिड़कना बाकी है शक्ल पर थोड़ी मुस्कुराहट
उदास चेहरे यहाँ पे अब आखिरी मिलेंगे/8/
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