22 22 22 22 22 22
श्रद्धा है सबूरी है विश्वास भी है रोटी
जिंदा रहने खातिर कुछ खास भी है रोटी /1/
बातों के ही दम पर तो नही भरता है पेट
जी तोड़ जहाँ मेहनत वहीं आस भी है रोटी/2/
हर मसले का हल है हर ताले की चाबी
कितनों के जीवन का संत्रास भी है रोटी/3/
यूँ ही तो नही बंदा झुकता है यहाँ कोई
लाचारी का पुख्ता आभास भी है रोटी/4/
भूखे को दिखती है वो चांद के ही जैसी
जब पेट हो खाली तो आकाश भी है रोटी/5/
टूटे हुए ख्वाबों को करती है ये पूरा
कितनों की हसरत का मधुमास भी है रोटी/6/
उम्मीद नयी पैदा करती है ये हर दिन
उम्मीदें मरने पर उपवास भी है रोटी/7/
हर एक कहानी का बुनियाद इसी से है
ये सजदा इबादत है अरदास भी है रोटी/8/
है कद्र नही जिनको बर्बाद वहाँ पर है
कुछ बिगड़े नवाबों में बकवास भी है रोटी/9/
पूछे न कोई मजहब ना जात धरम जाने
है लाडली ये सबकी बिंदास भी है रोटी/10/
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