Saturday, 23 July 2022

श्रद्धा है सबूरी है विश्वास भी है रोटी

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श्रद्धा है     सबूरी है     विश्वास  भी  है  रोटी 
जिंदा  रहने  खातिर  कुछ  खास भी है रोटी /1/

बातों के  ही दम  पर    तो नही भरता है पेट
जी तोड़ जहाँ मेहनत  वहीं आस भी है रोटी/2/

हर मसले  का  हल है     हर ताले की चाबी
कितनों के  जीवन  का    संत्रास भी है रोटी/3/

यूँ ही  तो  नही  बंदा  झुकता  है  यहाँ कोई 
लाचारी  का  पुख्ता  आभास  भी  है   रोटी/4/

भूखे को  दिखती  है  वो  चांद के  ही जैसी 
जब पेट हो खाली तो  आकाश भी है  रोटी/5/

टूटे हुए  ख्वाबों  को      करती  है  ये  पूरा 
कितनों की हसरत का मधुमास भी है रोटी/6/

उम्मीद  नयी  पैदा   करती  है  ये  हर दिन 
उम्मीदें  मरने  पर      उपवास  भी है रोटी/7/

हर एक  कहानी  का  बुनियाद  इसी से है 
ये  सजदा  इबादत है अरदास भी है  रोटी/8/

है  कद्र नही  जिनको    बर्बाद  वहाँ पर है 
कुछ बिगड़े नवाबों में बकवास भी है रोटी/9/

पूछे न  कोई  मजहब ना जात धरम जाने
है  लाडली  ये  सबकी बिंदास भी है रोटी/10/

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