Thursday, 27 December 2018

हादसे बख्श दे मेरा ये शहर जाने दे

हादसे बख्श दे मेरा ये शहर जाने दे
वक्त ने ढाए यहां खूब कहर जाने दे

लोग मिलते ही कहां अब है शहर में जिंदा
क्या अकेले मै करूं मुझको भी मर जाने दे

सांस लेना ही फकत जीने की निशानी है
है यही बात खरी बात अगर जाने दे

दैर के नाम पे उलझा न ये मसला इतना
दायरे सोंच के मजहब के ईतर जाने दे

लोग फुर्सत से नही अब है मिले मतलब से
हर किसी पे है यही आज असर जाने दे

ये वफाएं हैं महज आज किताबी बातें
ये हकीकत में नही आते नजर जाने दे

कल वो चौखट में रहे दिल ये लेकर अपना
क्या हुआ आज गया है जो मुकर जाने दे

रोते चेहरे को फकत पल में हंसा देते थे
अब गया हाथ से अपने ये हुनर जाने दे

ये सियासत को फकत वोट से ही मतलब है
बेबसी भूख से आवाम को मर जाने दे

झोपड़ी में है अंधेरा सा शहर जगमग है
बात ये खास नही यूं न बिफर जाने दे

उजालों का ये जलसा देख डर कर बैठ जाएगा

उजालों  का ये  जलसा देख  डरकर बैठ जाएगा
तले दीपक  अंधेरा  आज  छिपकर  बैठ जाएगा

गरीबों  की  वो  बस्ती  में  रहेगी  तिरगी  कायम
फकत फिर आज वो मुफलिस रोकर बैठ जाएगा

उरूज पर चढ़ के सूरज लाल पीला हो रहा बेहद
उफक  पर  शाम तक  ये जर्द पैकर बैठ जाएगा

इधर  सूरज  के जाते ही  फकत  वो रात आएगी
बिछा  काली सी  चादर चांद उस पर बैठ जाएगा

शिकस्ता पर लिए वो आसमां में उड़ नही सकता
परिंदा  थक गया  तो  छत पे आकर बैठ जाएगा

परिंदे   का  नही   दैरो हरम   से  कोई  वाबस्ता
शिकम  खातिर   दाने चार   पाकर   बैठ जाएगा

समय  पर  खाद  पानी  डालते रहना मुहब्बत के
अगर  बुनयाद हो  कमजोर  तो  घर  बैठ जाएगा

अभी  उफान  पर  होने  सबब  ये शोर  ज्यादा है
जरा  थमने  दे  दरया  को  ये पत्थर  बैठ जाएगा

सियासत  के लिए  मुद्दा  फकत  दैरो हरम  ठहरा
मिली  कुर्सी  सभी  कुछ वो भुलाकर बैठ जाएगा

तपा है  आग में  लोहा  बना है  मुल्क  के खातिर
जो  देखे  हौसला   इनका   सिकंदर  बैठ जाएगा

Monday, 3 December 2018

जिंदगी ने आजमाया देर तक

जिंदगी   ने    आजमाया  देर तक
सोंच  ये  दिल  मुस्कुराया  देर तक

ख्वाब थे  शीशे के  सब पिघल गये
आंच ने  दिल को  जलाया देर तक

मुख्तलिफ  सी ही हवा के दरमियां
इक दिया फिर टिमटिमाया देर तक

हौसलो  के   आखिरी  मुकाम पर
वो  परिंदा   फड़फड़ाया   देर तक

दिल को  बहलाने  गये थे बज्म में
तेरी  महफिल ने  रुलाया  देर तक

चाहतें  थी   चांद  छूने   की मगर
कुछ  तकाजो  ने  भगाया देर तक

दुरियां      मजबूरियां    तन्हाईयाँ
सबने मिलकर ही  सताया देर तक