Saturday, 31 August 2019

क्या खयाल उनको हमारा कभी आया होगा

क्या खयाल उनको  हमारा  कभी आया होगा
यूँ ही  उनका भी कभी  दिल  गुनगुनाया होगा

उठ  के   वो  बैठ    गए होंगे     कभी  रातों में
देख   ख्वाबों में   हमे   दिल   मुस्कुराया होगा

मन तो तड़पा होगा मिलने को कभी हमसे भी
नाम   लब पर  भी हमारा   कभी  आया होगा

झुक   जाती होंगी   नजरें भी  कभी  शर्माकर
याद    वो   बैठ के    हमको    फरमाया होगा

हमपे  गुस्सा   तो कभी प्यार    कभी तब्सिरा
तजकिरा   उनको   हमारा  कभी  भाया होगा

बैठ  खिलवत में   कभी हाल  हमारा  सोच के
वो  जफाओं पे    कभी  तो     पछताया होगा

जब  सताया   कभी  यादों ने   हमारी  उनको
अश्क आंखों में ही फिर तो उतर आया  होगा

Thursday, 1 August 2019

पाक दामन सारे किरदार ज्यूं ही हो जाए

पाक  दामन   सारे   किरदार  ज्यूं ही  हो  जाए 
जन्नतों   से   बड़ी   जन्नत   ये  जमीं  हो  जाए

पलकें  नीची  ही  रखो  हाथ  जो  देने  को उठे
सामने  वाला     पशेमां     न  कहीं     हो जाए

ऐसे   इमदाद   करो   खुद  को  न   मालूम चले
लेने   वाले   को   खुदाई   पे   यकीं    हो  जाए

दिल दुखाने की न कोशिश भी कभी करना तुम
तेरी  हरकत  से   न  आंखों  में    नमीं  हो जाए

गर ये दुनिया को  बदलना है तो खुद को बदलो
क्या  खबर    यूँ  ही    बुराई  में  कमी  हो जाए

आज शिद्दत से  रगड़ कर है गुसल हमने किया
अब  यकीनन  ही  जरा   साफ   जबीं  हो जाए

सो  रहा   भुखे   पड़ोसी   क्या   सरोकार   तुझे
कोई   खुदगर्ज़   न   इतना   भी  कहीं  हो जाए

वक्त ने  हमको  पढ़ा है  बड़ी  शिद्दत  से  मियां
हम   मजम्मत   की   गवाही   न कहीं  हो जाए

अपने किरदार का कुछ भी तो पता रहने दे

2122 1122 1122 22
अपने किरदार का कुछ भी तो पता रहने दे
है जरा  दाग  जो   दामन में   लगा  रहने दें

हसरतों और तकाजों की वही जिद हरदम
फलसफा  है ये  अजीब और  हटा रहने दे

यूँ तमाशा है बहुत दिल का है उखडी सांसे
अब भी उम्मीद का जलता है दीया रहने दे

उलझने  ही है  बढ़ाते  ये फकत रिश्ते सब
रह गया  अब जो है बाकी  ये जरा रहने दे

हम चले जाएंगे महफिल से तेरी यूँ उठकर
करके  बेआबरू  हमको  न   उठा  रहने दे

टांग देता हूँ  हर इक  शाम  बदन  खूंटी पर
मेरी  दहलीज  का  मत  पुछ   पता रहने दे

बांध  दो  मेरे  खयालात  हो  जंजीरें  अगर
आरजूओं  को  न  यूँ   आप  खुला  रहने दे