क्या खयाल उनको हमारा कभी आया होगा
यूँ ही उनका भी कभी दिल गुनगुनाया होगा
उठ के वो बैठ गए होंगे कभी रातों में
देख ख्वाबों में हमे दिल मुस्कुराया होगा
मन तो तड़पा होगा मिलने को कभी हमसे भी
नाम लब पर भी हमारा कभी आया होगा
झुक जाती होंगी नजरें भी कभी शर्माकर
याद वो बैठ के हमको फरमाया होगा
हमपे गुस्सा तो कभी प्यार कभी तब्सिरा
तजकिरा उनको हमारा कभी भाया होगा
बैठ खिलवत में कभी हाल हमारा सोच के
वो जफाओं पे कभी तो पछताया होगा
जब सताया कभी यादों ने हमारी उनको
अश्क आंखों में ही फिर तो उतर आया होगा
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