उनकी गलियों से कभी भी तो गुजर कर देखिये
मुफलिसो की बस्तियों मे भी उतर कर देखिये
जिंदगी वो किस कदर मजबूरियों से लड रहे
साथ उनके एक दिन ही तो बसर कर देखिये
भुखे बच्चे देख कर मुँह को कलेजा आता है
कोई लम्हा ऐसे अहसासों गुजर कर देखिये
फाको में ही बीत जाते हैं बड़े त्योहार भी
फिर से इतराते रफू लिबास ही पर देखिये
लोरियों में ख्वाब दिखलाती है बहलाती है माँ
रात भर सोती नही मां आप ये कर देखिये
ख्वाहिशें दम तोडती है रोज ही दहलीज़ पर
गर मिले फुर्सत कभी तो इक नजर भर देखिये
ताकती रहती है उम्मीदी निगाहें हर बखत
उनकी झोली मे नजारे कुछ नजर कर देखिये
मेरे मालिक ने अगर काबिल बनाया है तुम्हे
कुछ जरूरतमंद पर भी तो मेहर कर देखिये