Monday, 6 January 2020

वहीं है दिन है वही रात फिर नया क्या है

1212 1122 1212 22
वहीं है दिन  है वहीं  रात  फिर  नया क्या है 
ये तारीखों के सिवा कुछ बदल हुआ क्या है

सहमते   कांपते से     लोग  नजर   आते है 
उदासियों के सिवा  कुछ कहीं दिखा क्या है

गुजर रहे हैं  फकत  दिन महीने साल  यूँ ही 
तुम्हारी याद है  और कुछ  फिर बचा क्या है

कुछ एक   लम्हें  ही  हिस्से   हमारे  आए हैं 
तेरी  नराजगी  से बढ़  कभी  मिला  क्या है 

निकल पड़े हैं  हर इक सुब्ह  ढूंढने खुद को
हर एक  शाम  ही घर  पुछता  बता  क्या है 

बखूब  चेहरे   को   पढ़  लेते    बाबूजी  मेरे 
उदास  देख के   पुछ लेते थे   हुआ  क्या है

जो माँ ने  हाथ  धरा  सर पे  मुस्कुरा कर के
मै मुश्किलात  गया  भूल  सब  दुआ क्या है

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