वैसे हम इत्मीनान से आए गये तो हैं
पर उस गली में लोग डराए गये तो हैं
हालात कुछ जटिल है मुद्दे महीन है
टीवी पे नोक झोंक चलाए गये तो हैं
आंसू वहाँ पे पोंछने बहती निगाहों से
बनकर के अपने लोग पराए गये तो हैं
पर हौसलो के काट के पंछी को कैद कर
उम्मीद के मीनार गिराए गये तो हैं
रोटी मिलेगी ख्वाब में देकर तसल्लियाँ
बच्चें गरीब घर के सुलाए गये तो हैं
कुछ मसअलों से ध्यान हटाने के वास्ते
मुद्दे सियासी तौर उठाए गये तो हैं
संगीन चाहे मामला कितना भी हो मियां
आये गये की तर्ज भुलाए गये तो हैं
राहत के नाम बांटी गयी रेवड़ी यहाँ
मजलूम इस कदर भी सताए गये तो हैं
आधे-अधूरे सच ही दिखाते हैं लोग अब
सब असलियत बखूब छिपाए गये तो हैं
मुद्दे यहाँ सियासी है बस और कुछ नही
हालात जो बने हैं बनाए गये तो है
यूँ ही नही ये हादसा बरपा यहाँ है आज
बारूद मुद्दतों से उगाए गये तो हैं
पहलू में रख के आग ही चलने लगे हैं लोग
जुल्मत के दाग यूँ भी छिपाए गये तो हैं
मुद्दत हुई न देखा उजालों की शक्ल को
शिद्दत से आफताब बुलाए गये तो हैं
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