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कहीं कुछ बोलता कोई नही है
यहाँ अब आसरा कोई नही है/1/
सब अपने आप में मशरूफ है बस
किसी से राब्ता कोई नही है/2/
खुदा मिलने लगे हैं हर कदम पर
मगर इंसा मिला कोई नही है/3/
मैं ढूंढे जा रहा हूँ जाने क्या क्या
मेरा अपना पता कोई नही है /4/
न की गल्ती कभी कोई हो जिसने
अब इतना पारसा कोई नही है/5/
यहीं आकर के सीखा है सभी ने
हमल में सीखता कोई नही है /6/
तमन्ना आरजू उम्मीद है क्या
हूँ सजदे में दुआ कोई नही है /7/
भला कैसे कहूँ खुद को सुखनवर
अदब से राब्ता कोई नही है/8/
कई मिल जाते हैं राहों में हर दिन
मगर उनमें मेरा कोई नही है /9/
गुजर जाते बगल से हादसों के
ठहर कर देखता कोई नही है /10/
भटकता है कहाँ ऐ दिल बता दो
किसे है ढूंढता कोई नही है /11/
जिधर देखो यहां मातम है पसरा
कहीं भी शाद सा कोई नही है /12/
यूँ तो हर तर्फ खुश्बू है महक है
मुअत्तर आप सा कोई नही है /13/
मैं खुद से दूर होता जा रहा हूँ
कि अब मुझमें मेरा कोई नही है /14/