Friday, 2 April 2021

हमे दिल का कभी व्यापार करना ही नही आया

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हमे  दिल  का  कभी  व्यापार  करना  ही  नही आया
मुहब्बत   को  कभी  बाजार  करना  ही  नही  आया/1/

भरा  रहता  दुखों  से  हर समय  यूँ तो  हृदय अपना
दुखी  मन  का  हमें  विस्तार  करना  ही  नही आया/2/

यही  कारण  सदा  ही  मात  खाया  हमने जीवन में
हमें  सच  बोल कर   इंकार  करना  ही  नही  आया/3/

लगा  इल्ज़ाम  है  हम पर दगा करने का उल्फत में
मगर  हमको  कभी  तकरार  करना  ही नही आया/4/

बहुत  ही  साफगोई  से   सदा  हर  बात  की  हमने 
कभी  लहजा   हमें  श्रृंगार  करना  ही  नही  आया/5/

वो जब मिलता है तो बस सादगी की बात करता है
दिखावा  ऐसे  हमको  यार  करना  ही  नही आया/6/

शराफत  का  सदा  जिम्मा  रहेगा  क्या  हमारा ही
उन्हे  अच्छा  कभी  व्यवहार  करना ही नही आया/7/

हुए  नाराज  अक्सर  ही  जरा  सी  बात पर  रिश्ते
बना कर  के  हमे  गुफ्तार  करना  ही  नही  आया/8/

लगाया है गले  हर मोड़ पर जो गम मिला हमको
कि शरणागत का यूँ दुत्कार करना ही नही आया /9/

लुटायी है सभी में खोलकर जी हमने तो खुशियाँ
हमें  ता जिंदगी   भंडार  करना   ही  नही  आया/10/

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