1222 1222 1222 1222
हमे दिल का कभी व्यापार करना ही नही आया
मुहब्बत को कभी बाजार करना ही नही आया/1/
भरा रहता दुखों से हर समय यूँ तो हृदय अपना
दुखी मन का हमें विस्तार करना ही नही आया/2/
यही कारण सदा ही मात खाया हमने जीवन में
हमें सच बोल कर इंकार करना ही नही आया/3/
लगा इल्ज़ाम है हम पर दगा करने का उल्फत में
मगर हमको कभी तकरार करना ही नही आया/4/
बहुत ही साफगोई से सदा हर बात की हमने
कभी लहजा हमें श्रृंगार करना ही नही आया/5/
वो जब मिलता है तो बस सादगी की बात करता है
दिखावा ऐसे हमको यार करना ही नही आया/6/
शराफत का सदा जिम्मा रहेगा क्या हमारा ही
उन्हे अच्छा कभी व्यवहार करना ही नही आया/7/
हुए नाराज अक्सर ही जरा सी बात पर रिश्ते
बना कर के हमे गुफ्तार करना ही नही आया/8/
लगाया है गले हर मोड़ पर जो गम मिला हमको
कि शरणागत का यूँ दुत्कार करना ही नही आया /9/
लुटायी है सभी में खोलकर जी हमने तो खुशियाँ
हमें ता जिंदगी भंडार करना ही नही आया/10/
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