Monday, 22 March 2021

क्या रह गया है शहर में खँडरात के सिवा

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क्या  रह  गया  है  शहर में   खँडरात  के सिवा 
मिलती  नही  खबर   कोई   आफात के  सिवा/1/

मशरुफियत दिखी है  हर इक  शख्स  में  यहां 
मिलता है  गर्मजोशी   से   जज्बात   के  सिवा/2/

तस्वीर   हमने   देखी   है    गुजरे    हयात की 
ठहरा  मिला है   वक्त  भी   लमहात  के सिवा/3/

करती  है    आजमाईश    हर   वक्त   जिंदगी 
बस  रह  गया  वजूद   ही   औकात के  सिवा/4/

है   दफ्न   कहकहों  में  यहां  ढेरों सिसकियाँ 
बस   शोर   रह  गये  हैं   सवालात   के सिवा /5/

तेरा  खयाल     तेरी   तलब       तेरी  आरजू 
सब कुछ मिला है इश्क में मुलाकात के सिवा/6/

महफ़िल  में   रंग  हुश्न  थे  जलवे  तमाम  थे 
सब कुछ  वहां  था  एक  हंसी रात  के  सिवा/7/

यूँ  तो    वहां  थे    खूब     बेशुमार   आदमी 
तन्हा   मगर   नही   था   कोई जात के सिवा/8/

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