212 1222 212 1222
जिसकी जितनी हिम्मत थी उतनी वो चला पाया
तौर जिंदगी के सब कौन कब निभा पाया/1/
कीमतें चुकायी है सांस सांस की हमने
जिंदगी से मन माफिक कौन कब वफा पाया/2/
क्या खबर किसी को कुछ है मलाल आंखों में
देख कर पसे मंजर कुछ ने तो मजा पाया/3/
तय हुई हैं जीवन की राहें देख कर हालात
कौन अपनी मर्जी से कुछ भी कर भला पाया/4/
क्या लिखा मुकद्दर है रब ने खूब फुर्सत से
जब लगी जरूरत है तब उसे खफ़ा पाया/5/
कोशिशें तो की मैने खूब मुस्कुराने की
पर न दर्द सीने के आंख में दबा पाया/6/
दिल को खूब समझाया धीर भी बंधाया है
तेरे बिन जिये कैसे ये नही सिखा पाया/7/
हर कदम मिले धोखे हर तरफ छलावा है
नाते रिश्ते दारी के नाम पर दगा पाया/8/
ढूंढ लो भले दर दर रब मिलें दिलों भीतर
पीर भी खुदा खातिर बस यही बता पाया/9/
बांटनी विपत्ति थी बांट डाली संपत्ति
रिश्ता भाई का रब की सोच से जुदा पाया/10/
इल्म तो बहुत सीखा खूब पायी तालीमें
पर न सीख पाया गर कुछ अदब तो क्या पाया/11/
No comments:
Post a Comment