Saturday, 2 January 2021

वही अनबुझे से सवाल हैं वो ही टीस वो ही मलाल है

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वही  अनबुझे से  सवाल हैं  वो ही  टीस  वो  ही  मलाल है
नया  कुछ  कहाँ  नये  साल में  वही सब पुराना सा हाल है/1/

लूटी सी   थकी सी   हैं  ख्वाहिशें   दबी हैं जरूरतों के तले
सरेआम    होती    नीलाम    रोज   तमन्नाएं    बेमिसाल है/2/

नही  बदला  ढंग  कहीं  कोई  वही  आदतें  है  पुरानी  सब
है  अभी  भी   बेपरवाहियाँ   नही  समझा  कोई  कमाल है/3/

यूँ  डरे डरे  तो हैं सब  मगर है दिलों में सबके ही खौफ़ सा
फिर भी  जश्न  कैसे  छूटे  कोई  ये  तो रूतबे का सवाल है/4/

न  की  खैर  की  कभी  मिन्नतें किसी हाल चाहे ही हम रहे
जो  मैं   पी  गया हूँ  उदासियाँ  मेरे  दर्द  को  भी मलाल है/5/

न  ही  दिन ही बदला  न रात ही न नया कोई भी कमाल है
कहो  किस तरह से  कहें इसे भला हम की ये नया साल है/6/

मत  पूछ  मुझसे  तू  रास्ता   मैं  भटक  रहा  हूँ  यहाँ  वहाँ
मुझे खुद की कुछ भी खबर नही  मेरा जीना जैसे बवाल है/7/

हुई  बे लगाम  सी   जिन्दगी  बे हिसाब   आरजू   ख्वाब है 
हाँ  मगर  मैं  इससे  उलझ  पड़ू कहाँ इतनी मेरी मजाल है/8/

मुझे  खींचती  अपनी  तरफ  ये सुनहरे ख्वाब दिखा दिखा
यूँ तो रोकता हूँ मैं खुद को पर कहाँ बस में रहते खयाल हैं/9/

मिले है  खुशी  गिरा कर  वतन का मेयार ही कुछ को यहाँ
वो  है  जानते   सारे  हक  मगर  न पता है फर्ज कमाल है/10/

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