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वही अनबुझे से सवाल हैं वो ही टीस वो ही मलाल है
नया कुछ कहाँ नये साल में वही सब पुराना सा हाल है/1/
लूटी सी थकी सी हैं ख्वाहिशें दबी हैं जरूरतों के तले
सरेआम होती नीलाम रोज तमन्नाएं बेमिसाल है/2/
नही बदला ढंग कहीं कोई वही आदतें है पुरानी सब
है अभी भी बेपरवाहियाँ नही समझा कोई कमाल है/3/
यूँ डरे डरे तो हैं सब मगर है दिलों में सबके ही खौफ़ सा
फिर भी जश्न कैसे छूटे कोई ये तो रूतबे का सवाल है/4/
न की खैर की कभी मिन्नतें किसी हाल चाहे ही हम रहे
जो मैं पी गया हूँ उदासियाँ मेरे दर्द को भी मलाल है/5/
न ही दिन ही बदला न रात ही न नया कोई भी कमाल है
कहो किस तरह से कहें इसे भला हम की ये नया साल है/6/
मत पूछ मुझसे तू रास्ता मैं भटक रहा हूँ यहाँ वहाँ
मुझे खुद की कुछ भी खबर नही मेरा जीना जैसे बवाल है/7/
हुई बे लगाम सी जिन्दगी बे हिसाब आरजू ख्वाब है
हाँ मगर मैं इससे उलझ पड़ू कहाँ इतनी मेरी मजाल है/8/
मुझे खींचती अपनी तरफ ये सुनहरे ख्वाब दिखा दिखा
यूँ तो रोकता हूँ मैं खुद को पर कहाँ बस में रहते खयाल हैं/9/
मिले है खुशी गिरा कर वतन का मेयार ही कुछ को यहाँ
वो है जानते सारे हक मगर न पता है फर्ज कमाल है/10/