Saturday, 2 January 2021

वही अनबुझे से सवाल हैं वो ही टीस वो ही मलाल है

11212 11212 11212 11212
वही  अनबुझे से  सवाल हैं  वो ही  टीस  वो  ही  मलाल है
नया  कुछ  कहाँ  नये  साल में  वही सब पुराना सा हाल है/1/

लूटी सी   थकी सी   हैं  ख्वाहिशें   दबी हैं जरूरतों के तले
सरेआम    होती    नीलाम    रोज   तमन्नाएं    बेमिसाल है/2/

नही  बदला  ढंग  कहीं  कोई  वही  आदतें  है  पुरानी  सब
है  अभी  भी   बेपरवाहियाँ   नही  समझा  कोई  कमाल है/3/

यूँ  डरे डरे  तो हैं सब  मगर है दिलों में सबके ही खौफ़ सा
फिर भी  जश्न  कैसे  छूटे  कोई  ये  तो रूतबे का सवाल है/4/

न  की  खैर  की  कभी  मिन्नतें किसी हाल चाहे ही हम रहे
जो  मैं   पी  गया हूँ  उदासियाँ  मेरे  दर्द  को  भी मलाल है/5/

न  ही  दिन ही बदला  न रात ही न नया कोई भी कमाल है
कहो  किस तरह से  कहें इसे भला हम की ये नया साल है/6/

मत  पूछ  मुझसे  तू  रास्ता   मैं  भटक  रहा  हूँ  यहाँ  वहाँ
मुझे खुद की कुछ भी खबर नही  मेरा जीना जैसे बवाल है/7/

हुई  बे लगाम  सी   जिन्दगी  बे हिसाब   आरजू   ख्वाब है 
हाँ  मगर  मैं  इससे  उलझ  पड़ू कहाँ इतनी मेरी मजाल है/8/

मुझे  खींचती  अपनी  तरफ  ये सुनहरे ख्वाब दिखा दिखा
यूँ तो रोकता हूँ मैं खुद को पर कहाँ बस में रहते खयाल हैं/9/

मिले है  खुशी  गिरा कर  वतन का मेयार ही कुछ को यहाँ
वो  है  जानते   सारे  हक  मगर  न पता है फर्ज कमाल है/10/

दिया मत करो यूँ नसीहत जियादा

122 122 122 122 
दिया   मत  करो   यूँ    नसीहत   जियादा
लगे  ना   भली    ऐसी   आदत   जियादा

गुनहगार   जो   जितना    ज्यादा   रहा है
उसी  में   झलकती    शराफत    जियादा

पशेमां   हुई    हर  कदम    जिंदगी   फिर 
थी  गुंजाइशें  कम    थी  चाहत   जियादा

गिना    रिज़्क  हमने    कई  बार   अपना 
लगी   हर  दफ़ा  ही    जरूरत    जियादा

बड़ी   गुफ्तगू   की   तेरी   याद   से  फिर 
कि  है  आजकल  यूँ  भी  फुर्सत जियादा

गरीबों   को    इसकी    इजाजत   नही है
हुई   अब  है  मंहगी    मुहब्बत   जियादा

कि  रहने दो  कुछ राज  आंखों में ही कैद
रिहाई  से  अच्छी      हिरासत     जियादा

ये  माना   बहुत  था  बुरा    साल लेकिन
किया कुछ तो हमने भी गफलत जियादा

परेशानियाँ     दी   है    उम्मीद   ने   बस
लगाओ  नही   आस  की  लत   जियादा

जियारत  इबादत  जो  करना है  कर लो
नही   मौत  के  पास   मोहलत  जियादा

था   बर्बादियों  में   पुरा  साल    शामिल
मगर  है  दिसम्बर  पे   तोहमत  जियादा

रंज बदला न ये हर दिन का तमाशा बदला

2122 1122 1122 22
रंज बदला न ये हर दिन का तमाशा बदला
न कोई जद्दोजहद कोई तकाजा बदला

आज भी सोच वही दायरो में सिमटी है
फिर ये तारीख सिवा कहिये भला क्या बदला

हर ही चेहरे पे दिखा खौफ़ दिखी बेचैनी 
पर किसी के भी न जीने का तरीका बदला

उम्र गुजरी है फकत ख्वाब की ताबीर में ही
चाह मंजिल की रही तौर न अपना बदला

पन्ना पन्ना है मेरी जिन्दगी का इसका गवाह
नाम मजबूरियों का दे के न रिश्ता बदला

वक़्त ने खूब ही शिद्दत से पढ़ा है हमको
कुछ मुरव्वत न कोई हमसे किया या बदला

लत के जैसी है उदासी भी जिसे लग जाए
पर कभी उसने कोई तौर न अपना बदला

हर कोई खुद को समझता है समझदार यहाँ
दौर बदला है पर उनका न भरोसा बदला