Monday, 6 September 2021

सोचने भर से तो चिट्ठी नही आया करती

सोचने  भर  से  तो  चिट्ठी  नही  आया करती
याद  आती  है   तसल्ली  नही  आया  करती/1/

सिलसिला जब भी खयालों का शुरू होता है
फिर किसी तर्ह भी झपकी नही आया करती/2/

हम  कई बार  टहल  आए हैं  उन गलियों से
उस  तरफ  कोई  दुपहरी  नही आया करती/3/

शाम  ठहरी  है  थकी  आस  लिए चौखट पे
कोई  खुश्बू  कोई  तितली नही आया करती/4/

पेट  भरने  के लिए  फिर से दिलासे ही मिले
भूख के  हिस्से  में  रोटी  नही  आया  करती/5/

जिम्मेदारी  का  धरा  बोझ  हो  जिनके कांधे
उनके  हक में  कोई मस्ती नही आया करती/6/

कैसे मुमकिन है बिछड़ तुझसे रहें हम जिंदा
इन  खयालों पे  हँसी भी  नही  आया करती/7/

इन परिंदों ने  किसी का  भी  बिगाड़ा क्या है
डर से छत पर  कोई टोली नही आया करती/8/

दूर से  ही  भली  लगती  है  ये आतिशबाजी
घर  जलाकर ही  दिवाली  नही आया करती/9/

जिंदगी   बात   बिना   बात   खफ़ा   होती है
पर  सभी को  ये अदा  भी नही आया करती/10/

खुद में भी मिल नही रहा खुद को

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खुद में  भी  मिल नही रहा खुद को 
रख  न  जाने  कहाँ   दिया खुद को/1/

आंख   भर   कर के    मुस्कुराएँ  हैं
यूँ  भी  दी   हमने है  सजा खुद को/2/

दी  गई   दिल  को  यूँ  तसल्ली भी
फिर   बताया  गया   बुरा  ख़ुद को/3/

कुछ   अंधेरा    बता    रहे  हैं  उसे
जो  उजाले  किया  जला खुद को /4/

आएंगे  अच्छे  दिन कभी न कभी
दे  रहे   सब  यहाँ   दगा  खुद को/5/

दरमियाँ    भीड़   के    रहे   तन्हा
हिज्र  में  ऐसे  दी  सजा  खुद को/6/

आजमाती है  हर  कदम पर हमें 
जिंदगी है समझती क्या खुद को/7/

शेर  सुनता  यहाँ  है  कौन भला
हर  कोई  है  तलाशता  खुद को/8/

हर दिन के हादसों से हैरान जिंदगी है

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हर  दिन  के   हादसों  से    हैरान   जिंदगी है
नफरत   मिटा   दिलों  से   ईमान   जिंदगी है/1/

खुशियाँ लुटा सभी में  दिल को खुशी मिलेगी
दो चार  दिन  यहाँ  पर   मेहमान   जिंदगी है/2/

हसरत औ जिम्मेदारी और कोई भी जरूरत
ये  तीन  गर  न  हो  तो   आसान  जिंदगी है/3/

अब  आंख  बंद  करते लगने लगा है डर सा
सिरहाने   ख्वाब    बैठे   परेशान  जिंदगी है/4/

लम्बे  सफर  के  खातिर अच्छा न साथ मेरा
दो  चार   पल  कहो  तो   कुर्बान  जिंदगी है /5/

रोटी  मिले  मुझे  बस   चाहत  मेरी  यही थी
अब ख्वाब में उलझ कर हलकान जिंदगी है/6/

कल रात खूब बातें  खुद से किया है जी भर
तुझको   भुलाने  का  ही   ऐलान  जिंदगी है/7/

पड़ता है फेंकना हर दिन ही  कबाड़ में कुछ
इस  हद   भरे  हुए  हैं    अरमान  जिंदगी है/8/

अब भूल मैं चुका हूँ  तुमको है याद मुझको
रहता  ये  याद  हर  पल  बे जान जिंदगी है/9/

महफ़िल सजी है सांवरे की हर कदम पे आईये

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महफ़िल  सजी है  सांवरे , की हर कदम पे आईये
छप्पन  लगे  हैं भोग भी ,जी भर के लुत्फ़ उठाईये/1/

पूजन के भोग के यहाँ , है दाम  सब अलग अलग
कीमत चुकाते जाईये , नेकी     कमाते      जाईये/2/

कीमत  बगैर  आजकल , संभव   न  पूजा  बंदगी
बाजार  सज रखे हैं बस , कीमत   सही   लगाईये/3/

बिकने लगी  दुआएँ भी ,  औकात  के  हिसाब से
गर  जेब  गर्म  है  नही , तब  आस  मत  सजाईये/4/

दर दर   नुमाईशें  लगीं ,   सामान   बन  गये  प्रभू 
जज्बात  बिक रहे हैं बस, सेवा को  मत  लजाईये/5/

स्वीकार  कीजिए  प्रभू , निर्धन  की  याचना कभी
चाहत न राज पाठ की बस दिल से दिल मिलाईये/6/

कुछ भी न पास है मेरे , अर्पित करूँ  बता मैं क्या
बस  भाव  पुष्प  कर रहा , अर्पित मैं  मान जाईये/7/

🙏🌹।।जय श्री श्याम ।।🌹🙏

मुश्किल जरा सी देखकर कमजोर दिल दहल गया

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मुश्किल  जरा  सी  देख कर  कमजोर दिल दहल गया
जिसने   लिया  है   हौसले  से  काम   वो  सँभल  गया/1/

जद्दोजहद   का   नाम   ही   तो   जिंदगी  है   साथियों 
हिम्मत  किया  जो  बढ़ चला उसका समय बदल गया/2/

मजबूरियाँ       जरूरतें       महरूमियाँ       उदासियाँ
इनसे  निजात  पा  लिया  समझो कि  वो  निकल गया/3/

कोई  यकीं  नही   किसी   का  कब  बदल  वो जाएगा
बेहद  अजीज   खास  भी   मौका  लगा तो  छल गया/4/

मन के  ही   हारे   हार  है  मन के  ही   जीते   जीत है
मन पर  जो   पार  पा  लिया  वो  आसमाँ उछल गया/5/

है  धूप छांव   की   तरह    इस  जिंदगी  के   खेल भी
इक पल में चढ़ गया शिखर इक पल में देख ढल गया/6/

मन  पर    रहे    लगाम   गर     आराम  है    सुकून है
बर्बाद   जिंदगी   समझ   मन  गर   मचल मचल गया /7/

दुर्भावना   न   पालिए       मन  में   किसी  के  वास्ते
संगत  बुरी  हुई  अगर  समझो  कि  पुण्य  फल  गया /8/

कहीं बे हताशा बरसना खुशी का

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कहीं   बे हताशा    बरसना    खुशी  का
कहीं  हर  घड़ी  बस  है  रोना  कमी का/1/

कही   अर्श  पर  है  कही   फर्श   पर है
न  आया  समझ  फलसफा जिंदगी का/2/

तमन्ना     तसल्ली    दिलासा    भरोसा
हर इक  रोज  है  बस  तमाशा इसी का/3/

बड़ी   सेल  अरमानों  की  चल  रही है
सजा    खूब    बाजार   है   बेबसी का/4/

तरीके  बहुत   गम   छिपाने  के  है पर
है  मुश्किल  बहुत  मुस्कुराना नमी का/5/

गिले  शिकवे   तन्हाई   आंसू   उदासी
मजा  हमने  पाया है  ये  आशिकी का/6/

बदलने  का   तेरे   कोई   गम  नही है
हमें तो है अफसोस दिल की लगी का/7/

लहू  पीने  की  एक  लत है  जरा बस
भला  चाहती  यूँ  सियासत  सभी का/8/

खड़ी दर पे  उम्मीद के खत लिए धूप
खुले  जाने  दर  कब मेरी बेहतरी का/9/

नजर  का  नही  दोष  है जाविए का 
रहा है  नजरिया  जुदा हर किसी का/10/

चाहिये ख्वाहिशें कुछ खुशी के लिए

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चाहिये  ख्वाहिशें  कुछ  खुशी  के  लिए
है    तमन्ना   जरूरी     सभी    के  लिए/1/

मन  के  बहलाव  खातिर  मिले तो सही
कुछ  तसल्ली   भले  दो  घड़ी  के लिए/2/

मन  ये  बेचैन  है  आजकल  कुछ जरा
छटपटाने    लगा  है   किसी   के  लिए/3/

खा  गया  हर  कदम  पर  भरोसा मुझे
अब बचा खुद  न  मैं अपने ही के लिए /4/

प्यास  सदियों  की  जैसे  कोई तीव्र हो
यूँ   तरसते   हैं   हम   रोशनी  के लिए/5/

जिंदगी   से     नदारद   रही    जिंदगी
हम    भटकते  रहे     जिंदगी  के लिए/6/

दरमियाँ    हादसों  के    हुआ   हादसा
थम  गई  जिंदगी   अपने  जी के लिए/7/

खूब  रोया  है  परदे  में  मुँह को छिपा
जो  कि  मशहूर  है   मसखरी के लिए/8/

दर्द   कितने   समेटे  है   सीने   में   वो
ढो   रहा     लानतें   रहबरी   के  लिए/9/

कुछ न मतलब है अखबार को झूठ से
सुर्खियाँ   चाहिए   सनसनी   के  लिए/10/

बात  कहिये  उन्हे  जो  सुने बात कुछ
जो  न  सुनते  कहो क्या हँसी के लिए/11/

अब तलक जो  कहा या सुना ही गया
था नजरिया किसी का किसी के लिए/12/

छू कर मुझे करीब से सहसा गुजर गया

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छू कर  मुझे    करीब से    सहसा   गुजर गया 
खुशियों का काफिला अभी  आया गुजर गया/1/

त्योहार  के  बहाने  भी   कुछ  काम  आये ना 
रिश्तों से अब तो बिछड़े भी अरसा गुजर गया/2/

रहता जो हर समय ही था अपनो की भीड़ में 
करवट  यूँ  वक़्त  ने  लिया  तन्हा  गुजर गया/3/

कम्बख्त   दिल   बना  रहा   ता उम्र  मुंतजिर 
राहों  को    ताकते   हुए   लम्हा   गुजर  गया/4/

रिश्ते   सहेजते   रहे    मोती   की   जैसे  हम
इसमें  ही  वक़्त   राएगाँ  कितना  गुजर गया /5/

नादानियों   के    नाम   रही    सारी   जिंदगी 
बर्बाद  खुद  को  कर  लिए मौका गुजर गया/6/

दैरो  हरम   में  ढूंढ  लिया   पर   मिला  नही
कैसे   कहाँ   न  जाने   फरिश्ता   गुजर गया/7/

बेसुध  सा  हो के  गिर पड़ा चौराहे जब कोई 
बंदा  कोई  मदद  को  न  ठहरा  गुजर  गया/8/

दौर है त्रासदी का सोग तर ही मंजर है

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दौर  है  त्रासदी  का   सोग तर   ही  मंजर है
सारे  चेहरे  ही   दिखे  हैं  उदास    मुज़्तर है/1/

देख   हालात     वतन    शर्मशार   हैं  बेहद
आदमीयत  है   नदारद    जमीर    जर्जर है/2/

शर्म की  बात पे  जब  नाज़ होने  लग जाए 
मान लेना  की  ये  ज़महूरियत  का कैंसर है/3/

है  बड़ी  जद्दोजहद  सांस सांस  के  खातिर
जिंदगी   सस्ती है   मंहगा  हुआ  सिलेंडर है/4/

एक  उनको ही  कभी  शर्म  क्यूँ नही आती
जिनके  कांधो पे है जिम्मा बने जो रहबर है/5/

अधखिले फूलों को मत तोड़ बेहिसी से रब
कैसे  तू इतना हुआ संग दिल क्या पत्थर है/6/

अब तो स्वागत का तरीका बदल गया यारों 
भाप  काढ़ा  लो या पानी भी गर्म घर घर है/7/

और क्या हाल है सब ठीकठाक है न मियां
पूछ ले  इतना भी  कोई तो आज बेहतर है/8/

मुज़्तर - व्यथित बेचैन

उनके किस्से कभी अखबार में नही आते

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उन के   किस्से   कभी  अखबार   में   नही आते 
भूखे   रह कर    भी  जो    बाजार में   नही आते/1/

डबडबा   जाती  हैं   आंखे  भी   राह  तकते हुए 
दूर   रह कर   भी   जो    त्योहार  में  नही  आते/2/

चीख हमारी जो निकल आयी जुल्म सा हो गया
कत्ल   करके    वो    गुनहगार   में   नही  आते/3/

रह  गयी    मौकापरस्तों  के       इर्द गिर्द  सदा
जो   भले   लोग  हैं    सरकार   में    नही आते/4/

कागजों  पर    ही  चली    राहतों की  बंदरबांट 
झोपड़ों  पर    जो  हैं    लाचार   में   नही आते/5/

है   हमारे  भी   यहां   बेशुमार     ख्वाहिश मंद
पर   हुनर   सबके    इश्तेहार   में    नही  आते/6/

बेबस यतीम लोग मिले सिसकियाँ मिली

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बेबस  यतीम  लोग  मिले  सिसकियाँ  मिली
दफ्तर  बदल बदल के  थकी अर्जियाँ मिली/1/

हाकिम तो कह रहा है कि सब ठीक ठाक है 
पूछे  तो  कोई   उससे   किसे  रोटियाँ मिली/2/

भेजी  गई  है  लानतें  दिल  खोल  कर  उसे
अखबार  में फिर आज  यही सुर्खियाँ मिली/3/

कहने  को  जी  रहे हैं मगर मर चुके हैं लोग
पड़ताल पर बदन में फकत पसलियाँ मिली/4/

हर बार  ख्वाब   झूठे  दिखाये  गये  हैं  बस
पर   दूर दूर   जिस्म  से   परछाईयाँ   मिली/5/

गुजरी   तमाम  उम्र   ही  बस  गज्ल गोई में
उसकी   वसीयतों  में   फकत  रद्दियाँ मिली/6/

मैले  ही  होंगे   रिश्ते   बनेंगे  अगर  लिबास
होकर  के  इस्तेमाल तो बस फब्तियाँ मिली/7/

रोया  तो  वक़्त  भी  मेरे  हालात  पर बहुत 
मेरी  वजह  से   ही  तुम्हे   दुश्वारियांँ  मिली/8/

दिल जिगर जान तेरे नाम ही कर जाएंगे

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दिल   जिगर  जान  तेरे नाम  ही कर जाएंगे
हम  तेरे   वास्ते  हद  से   भी   गुजर जाएंगे/1/

जब  जरूरत  पड़ी  सींचा है लहू से तुझको
सोचना  मत   ऐ वतन  मौत  से डर  जाएंगे/2/

इक न इक दिन  तो ये हालात मियां बदलेंगे 
है  यकीं   खौफ़ जदा    दौर   गुजर  जाएंगे/3/

रात  के  बाद   नयी   सुब्ह   यकीनन  होगी
देख कर   धूप  सभी   चेहरे  निखर  जाएंगे/4/

दिल है सहमा हुआ  पहले से ही हालातों से
खौफ़ मंजर  न  दिखा  सोग से भर  जाएंगे/5/

हादसा   रोज़  नया   एक   चला   आता है
गर  ये  हालात  न  सुधरे  तो किधर जाएंगे /6/

हम बिछड़ कर यूँ भला तुझसे जियेंगे कैसे 
हो  के  आजाद  तेरी  याद  से  मर  जाएंगे/7/

तू  गिरफ्तार कर ले जहन में अपने हमको
गर दिया  छोड़ जो तुमने तो बिखर जाएंगे/8/

हम तो पैगाम मुहब्बत का लिये निकले थे
क्या पता  था  हमे की  लोग यूँ डर जाएंगे/9/

दूर से ही  भली लगती है  ये आतिशबाजी
पास से  देख  के  बच्चे  भी  सिहर जाएंगे/10/

गर नही कुछ भी बुरा इतना तो अच्छा क्या है

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गर नही  कुछ भी बुरा  इतना तो अच्छा क्या है
तेरी   दुनिया  में   खुदा  रोज़   तमाशा  क्या है/1/

अब  तो  बच्चे  भी सिहरने हैं लगे देख ये सब
हर   गली   मोड़  पे   ही   शोर शराबा  क्या है/2/

सहमे सहमे  से  दिखे  खौफ़ जदा  चेहरे सभी
कैसे    हालात    ये   सुधरेंगे   इशारा   क्या है/3/

सोग  के  घर  में  बयानों  के  हैं  मातम  पसरे
ऐ  सियासत   तू   बता   तेरा   इरादा   क्या है/4/

तू  पयंबर  है  फकत  अम्नो अमां  का साहब
फिर तेरा फित्नो फसादों  से  ये रिश्ता क्या है/5/

मेरी आंखों  को  न  तुम ख्वाब दिखाओ कोई 
मै   हूँ   बेचैन   बहुत    भूख  से  चर्चा क्या है/6/

मत  सुनाओ   हमें   झूठे   ये   फसाने  छोड़ो
रोज़  सुनते  हैं  ये  किस्से तो  नया सा क्या है/7/

एक  मुद्दत  से   वो   रोया  ही  नही  था  जैसे
जब वो  रोया  तो  गया  भूल  तरीका  क्या है/8/

रूठने  टूटने   का  हक   नही   होता  है  उसे 
जिम्मेदारी का जो मतलब है समझता क्या है/9/

कैसे मुमकिन है  बिछड़ तुझसे रहें हम जिंदा
सांस  चलती  है  नही  जानते  जीना  क्या है/10/

है  अभी  दूर  बहुत   दूर  तलक   जाना  हमें
ये समझने को तू आखिर  मेरा लगता क्या है/11/

जब बरसने लगे  बूंदों की तरह  लफ्ज़ कभी
भीग जाता कोई मौसम हो जिगर का क्या है/12/