सोचने भर से तो चिट्ठी नही आया करती
याद आती है तसल्ली नही आया करती/1/
सिलसिला जब भी खयालों का शुरू होता है
फिर किसी तर्ह भी झपकी नही आया करती/2/
हम कई बार टहल आए हैं उन गलियों से
उस तरफ कोई दुपहरी नही आया करती/3/
शाम ठहरी है थकी आस लिए चौखट पे
कोई खुश्बू कोई तितली नही आया करती/4/
पेट भरने के लिए फिर से दिलासे ही मिले
भूख के हिस्से में रोटी नही आया करती/5/
जिम्मेदारी का धरा बोझ हो जिनके कांधे
उनके हक में कोई मस्ती नही आया करती/6/
कैसे मुमकिन है बिछड़ तुझसे रहें हम जिंदा
इन खयालों पे हँसी भी नही आया करती/7/
इन परिंदों ने किसी का भी बिगाड़ा क्या है
डर से छत पर कोई टोली नही आया करती/8/
दूर से ही भली लगती है ये आतिशबाजी
घर जलाकर ही दिवाली नही आया करती/9/
जिंदगी बात बिना बात खफ़ा होती है
पर सभी को ये अदा भी नही आया करती/10/
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