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दौर है त्रासदी का सोग तर ही मंजर है
सारे चेहरे ही दिखे हैं उदास मुज़्तर है/1/
देख हालात वतन शर्मशार हैं बेहद
आदमीयत है नदारद जमीर जर्जर है/2/
शर्म की बात पे जब नाज़ होने लग जाए
मान लेना की ये ज़महूरियत का कैंसर है/3/
है बड़ी जद्दोजहद सांस सांस के खातिर
जिंदगी सस्ती है मंहगा हुआ सिलेंडर है/4/
एक उनको ही कभी शर्म क्यूँ नही आती
जिनके कांधो पे है जिम्मा बने जो रहबर है/5/
अधखिले फूलों को मत तोड़ बेहिसी से रब
कैसे तू इतना हुआ संग दिल क्या पत्थर है/6/
अब तो स्वागत का तरीका बदल गया यारों
भाप काढ़ा लो या पानी भी गर्म घर घर है/7/
और क्या हाल है सब ठीकठाक है न मियां
पूछ ले इतना भी कोई तो आज बेहतर है/8/
मुज़्तर - व्यथित बेचैन
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